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काम का दबाव और अव्यवस्थित जीवन शैली से इस बीमारी का शिकार हो रहे युवा
Thu, 16 May 2019 11:30 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Thu, 16 May 2019 11:30 PM IST
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भागदौड़ भरी जिंदगी, बढ़ता काम का दबाव और खानपान व रहन सहन में आ रहे बदलाव से युवा प्री-हाइपरटेंशन बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। अधिकतर को डॉक्टर के पास पहुंचने के बाद बीमारी का पता चलता है।
कामकाजी युवाओं (35 वर्ष तक के) में प्री-हाइपरटेंशन अधिक पाया जा रहा है। आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के ओपीडी में विभिन्न कारणों से पहुंचने वाले 42 से 43 फीसदी मरीजों में प्री-हाइपरटेंशन की बीमारी पाई जा रही है। इनमें सर्वाधिक युवा होते हैं।
उसमें भी निजी संस्थानों में नौकरी करने वाले। यह काम का दबाव अधिक लेते हैं। दिनचर्या और खानपान ठीक नहीं है। प्री-हाइपरटेंशन में सिर दर्द, घबराहट, थकान, नींद न आने जैसे लक्षण होते हैं। ब्लड प्रेशर काफी बढ़ जाता है।
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कामकाजी युवाओं (35 वर्ष तक के) में प्री-हाइपरटेंशन अधिक पाया जा रहा है। आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के ओपीडी में विभिन्न कारणों से पहुंचने वाले 42 से 43 फीसदी मरीजों में प्री-हाइपरटेंशन की बीमारी पाई जा रही है। इनमें सर्वाधिक युवा होते हैं।
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उसमें भी निजी संस्थानों में नौकरी करने वाले। यह काम का दबाव अधिक लेते हैं। दिनचर्या और खानपान ठीक नहीं है। प्री-हाइपरटेंशन में सिर दर्द, घबराहट, थकान, नींद न आने जैसे लक्षण होते हैं। ब्लड प्रेशर काफी बढ़ जाता है।
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लक्षण दिखने पर चिकित्सक से लें सलाह
एसएन मेडिकल कॉलेज के फिजिशियन डॉ. आशीष गौतम के मुताबिक जंक फूड के सेवन, अल्कोहल और धूम्रपान, काम का दबाव बढ़ने, पूरी नींद न लेने के कारण युवाओं प्री-हाइपरटेंशन बीमारी हो रही है। लक्षण दिखने पर लोगों को तत्काल चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
हाइपरटेंशन का कारण कई बीमारियां जैसे- डायबिटीज, हृदय रोग, मोटापा आदि भी होती हैं। यह खतरनाक बीमारी है। हाइपरटेंशन से हार्टअटैक, ब्रेनहेमरेज, आंखों की रोशनी कम होने के खतरे होते हैं। डॉ. वीके अग्रवाल का कहना है कि खानपान और जीवनशैली को दुरुस्त करके काफी हद तक बीमारी से बचा जा सकता है।
लक्षण- तनाव, चिड़चिड़ापन, कमजोरी, चक्कर आना, जल्द थक जाना, तेज चलने में दिक्कत, गर्दन और सिर के पीछे दर्द, बेचैनी, नींद कम आना आदि है।
सलाह- जीवनशैली और खानपान को व्यवस्थित करें। ताजा फलों और हरी सब्जियों का सेवन करें। सुबह टहलें, योगाभ्यास और प्राणायाम करें।
समय-समय पर स्वास्थ्य का परीक्षण कराते रहें। काम का तनाव न लें।
हाइपरटेंशन का कारण कई बीमारियां जैसे- डायबिटीज, हृदय रोग, मोटापा आदि भी होती हैं। यह खतरनाक बीमारी है। हाइपरटेंशन से हार्टअटैक, ब्रेनहेमरेज, आंखों की रोशनी कम होने के खतरे होते हैं। डॉ. वीके अग्रवाल का कहना है कि खानपान और जीवनशैली को दुरुस्त करके काफी हद तक बीमारी से बचा जा सकता है।
लक्षण- तनाव, चिड़चिड़ापन, कमजोरी, चक्कर आना, जल्द थक जाना, तेज चलने में दिक्कत, गर्दन और सिर के पीछे दर्द, बेचैनी, नींद कम आना आदि है।
सलाह- जीवनशैली और खानपान को व्यवस्थित करें। ताजा फलों और हरी सब्जियों का सेवन करें। सुबह टहलें, योगाभ्यास और प्राणायाम करें।
समय-समय पर स्वास्थ्य का परीक्षण कराते रहें। काम का तनाव न लें।