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ब्रज को रास नहीं आया अच्छे लड़कों का साथ
ब्रज को रास नहीं आया अच्छे लड़कों का साथ
Updated Sun, 12 Mar 2017 01:32 AM IST
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राहुल और अखिलेश
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ब्रज में न सपा का काम बोला और न ही ‘युवराजों’ का जादू चला। यही वजह रही कि ब्रज में सपा 14 से 4 सीटों पर ही सिमट गई। आगरा सहित मथुरा, एटा और कासगंज में तो खाता ही नहीं खुला। मैनपुरी में भी एक सीट का नुकसान हुआ है।
पिछले विधानसभा चुनाव में ब्रज में सपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर आई थी। आगरा, मथुरा, एटा, कासगंज, मैनपुरी और फीरोजाबाद की 30 सीटों में से 14 पर उसका कब्जा था। मगर, मोदी लहर में उसका ये किला ढह गया। सिर्फ मैनपुरी में तीन और फीरोजाबाद में एक सीट ही मिल पाई। पिछले पांच सालों में अखिलेश सरकार का काम बोला हो या न बोला लेकिन इस चुनाव में मतदाताओं ने उनकी बोलती बंद कर दी है। परिवार की कलह को दरकिनार कर कांग्रेस का हाथ थामने वाले अखिलेश यूपी तो छोड़िए बृज के मतदाताओं को भी राहुल गांधी का साथ पसंद नहीं करवा पाए। 2012 के चुनाव में फीरोजाबाद की पांच सीटों में से तीन पर काबिज रहने वाली सपा को इस बार सिर्फ एक ही सीट मिल पाई है। वहीं, एटा की चारों, कासगंज की दो, मैनपुरी और आगरा की एक-एक सीट से हाथ धोना पड़ा है। मैनपुरी और एटा तो सपा के गढ़ माने जाते रहे हैं। यह क्षेत्र यादव बाहुल्य हैं। इसके बावजूद अपने ही घर में सपा पराई हो गई। अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने भाजपा को घेरने के लिए नोटबंदी का मुद्दा भी खूब उछाला लेकिन मतदाताओं पर इसका असर नहीं दिखा। दोनों दिग्गज अपना जादू नहीं चला पाए।
सपा की स्थिति
जिले कुल सीटें 2012 2017
आगरा 9 1 0
मथुरा 5 0 0
एटा 4 4 0
कासगंज 3 2 0
मैनपुरी 4 4 0
फिरोजाबाद 5 3 1
पिछले विधानसभा चुनाव में ब्रज में सपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर आई थी। आगरा, मथुरा, एटा, कासगंज, मैनपुरी और फीरोजाबाद की 30 सीटों में से 14 पर उसका कब्जा था। मगर, मोदी लहर में उसका ये किला ढह गया। सिर्फ मैनपुरी में तीन और फीरोजाबाद में एक सीट ही मिल पाई। पिछले पांच सालों में अखिलेश सरकार का काम बोला हो या न बोला लेकिन इस चुनाव में मतदाताओं ने उनकी बोलती बंद कर दी है। परिवार की कलह को दरकिनार कर कांग्रेस का हाथ थामने वाले अखिलेश यूपी तो छोड़िए बृज के मतदाताओं को भी राहुल गांधी का साथ पसंद नहीं करवा पाए। 2012 के चुनाव में फीरोजाबाद की पांच सीटों में से तीन पर काबिज रहने वाली सपा को इस बार सिर्फ एक ही सीट मिल पाई है। वहीं, एटा की चारों, कासगंज की दो, मैनपुरी और आगरा की एक-एक सीट से हाथ धोना पड़ा है। मैनपुरी और एटा तो सपा के गढ़ माने जाते रहे हैं। यह क्षेत्र यादव बाहुल्य हैं। इसके बावजूद अपने ही घर में सपा पराई हो गई। अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने भाजपा को घेरने के लिए नोटबंदी का मुद्दा भी खूब उछाला लेकिन मतदाताओं पर इसका असर नहीं दिखा। दोनों दिग्गज अपना जादू नहीं चला पाए।
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सपा की स्थिति
जिले कुल सीटें 2012 2017
आगरा 9 1 0
मथुरा 5 0 0
एटा 4 4 0
कासगंज 3 2 0
मैनपुरी 4 4 0
फिरोजाबाद 5 3 1