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यूपी पुलिस का एक और कारनामा, सात साल के लड़के को बना दिया लड़की

Fri, 05 Oct 2018 09:57 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Updated Fri, 05 Oct 2018 09:57 PM IST
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police changed gender of missing boy in general diary
यूपी पुलिस
यूपी पुलिस के कारनामे थम नहीं रहे हैं। अब पुलिस ने एक लड़के को लड़की बना दिया। दरअसल, हाथरस में मिले सात साल के लड़के को पुलिस ने जनरल डायरी (जीडी) में लड़की दर्शा दिया। बाल कल्याण समिति ने भी बालिका लिखते हुए आगरा के बाल गृह में रखने का आदेश कर दिया। 
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तीन दिन पहले बच्चे को लेने उसकी नानी आई। मगर, आदेश में लड़की के रूप में दर्ज होने के कारण सुपुर्द करने से मना कर दिया गया। मामले में यूपी पुलिस, डीआईजी अलीगढ़ और हाथरस पुलिस को ट्वीट किया गया। अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बाद भूल सुधार करते हुए बच्चे को सुपुर्द किया गया।
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सात साल के दायमतीन के पिता अकरम दिव्यांग हैं। वो बदायूं में रहते हैं। जबकि मां चांदनी का इंतकाल हो चुका है। दायमतीन नानी खुशमीदा के घर में रहकर पढ़ाई कर रहा है। 28 सितंबर को वो रास्ता भटक गया। पुलिस ने परिजनों की रिपोर्ट दर्ज नहीं की। वो शाम को मुरसान चौराहे पर घूमता मिला। पुलिस उसे थाने ले आई।
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'आप बालक को मांग रही हो'

सादाबाद कोतवाली में जीडी में दर्ज करते समय उसे बालक की जगह बालिका दर्शा दिया गया। महफूज संस्था के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के समन्वयक नरेश पारस ने बताया कि हाथरस बाल कल्याण समिति ने बालक को बाल गृह आगरा भेज दिया। आदेश में बालिका ही लिखा था। 

बुधवार को बच्चे की नानी खुशमीदा को पता चला कि दायमतीन बाल गृह में है। इस पर वो यहां आ गई। मगर, कर्मचारियों ने यह कहते हुए सुपुर्द करने से इंकार कर दिया कि वह बालिका के रूप में दर्ज है। आप बालक को मांग रही हो।

परिजन शुक्रवार को नरेश पारस से मिले। उन्होंने यूपी पुलिस, हाथरस पुलिस और डीआईजी अलीगढ़ को ट्वीट किया। अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बाद पुलिस हरकत में आई। बाद में बाल कल्याण समिति हाथरस ने बालक परिजनों के सुपुर्द करने के आदेश दिए। इसके बाद उसे नानी को सौंप दिया गया। 

दायमतीन के मिलने से नानी की खुशी का ठिकाना न रहा। बाल गृह की अधीक्षिका उर्मिला गुप्ता ने बताया कि बाल कल्याण समिति हाथरस के आदेश में बालक की जगह बालिका दर्शाया गया था। आदेश को संशोधित करके भेजने के बाद बालक को उसकी नानी के सुपुर्द कर दिया गया। बाल गृह में बालक ही दर्ज किया गया था। 
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