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अस्पतालों में नहीं डॉक्टर उपचार के अभाव में बच्चों की हो रही मौत
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मैनपुरी। जिले में संक्रामक बीमारियों ने दस्तक दे दी है। वायरल फीवर के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। शुक्रवार रात बुखार से पीड़ित एक साल के बच्चे की मौत हो गई। सरकारी अस्पताल में बालरोग विशेषज्ञ न होने के कारण परिजन बच्चे का इलाज झोलाछाप से करा रहे थे। हालात बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल लाया गया, यहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
बेवर के गांव मझोला निवासी अजीत सिंह के एक वर्षीय पुत्र सागर को दो दिन से बुखार आ रहा था। परिजन उसे पहले बेवर स्थित सीएचसी पर उपचार के लिए ले गए। परिजन के अनुसार यहां कोई बाल रोग विशेषज्ञ नहीं मिला। इस पर बच्चे को कस्बा स्थित एक झोलाछाप से उपचार दिलाया। शुक्रवार की रात सागर की हालत बिगड़ी तो परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां बाल रोग विशेषज्ञ की तलाश करते रहे वे नहीं मिले तो इमरजेंसी पहुंचे। यहां डॉक्टर ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया।
छह दिन से नहीं है बाल रोग विशेषज्ञ
जिला अस्पताल में बच्चों के उपचार के लिए पिछले छह दिन से बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। यहां तैनात डॉक्टर कोर्ट के मामले में बाहर गए हुए हैं। उनके कक्ष में ताला लटक रहा है जिससे यहां आने वाले बच्चों को परिजन मायूस होकर लौट रहे हैं।
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तीन बच्चों की हो चुकी मौत
इस सप्ताह जिला अस्पताल में तीन बच्चों की मौत हुई। इनमें से एक बच्चा डायरिया की चपेट में था जबकि दो अन्य की बुखार से पीड़ित होने पर मौत हुई है।
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अस्पताल से संबद्ध बाल रोग विशेषज्ञ कोर्ट जाने की बात कहकर नहीं लौटे हैं। इसके चलते बच्चों के उपचार में दिक्कत आ रही है। जिला अस्पताल में दूसरा बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में फिजीशियन से बच्चों को उपचार दिलाया जा रहा है। शुक्रवार की रात जिस बच्चे की मौत हुई है वह मृत अवस्था में लाया गया था।
डॉ. अरविंद कुमार गर्ग, सीएमएस
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बेवर के गांव मझोला निवासी अजीत सिंह के एक वर्षीय पुत्र सागर को दो दिन से बुखार आ रहा था। परिजन उसे पहले बेवर स्थित सीएचसी पर उपचार के लिए ले गए। परिजन के अनुसार यहां कोई बाल रोग विशेषज्ञ नहीं मिला। इस पर बच्चे को कस्बा स्थित एक झोलाछाप से उपचार दिलाया। शुक्रवार की रात सागर की हालत बिगड़ी तो परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां बाल रोग विशेषज्ञ की तलाश करते रहे वे नहीं मिले तो इमरजेंसी पहुंचे। यहां डॉक्टर ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया।
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छह दिन से नहीं है बाल रोग विशेषज्ञ
जिला अस्पताल में बच्चों के उपचार के लिए पिछले छह दिन से बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। यहां तैनात डॉक्टर कोर्ट के मामले में बाहर गए हुए हैं। उनके कक्ष में ताला लटक रहा है जिससे यहां आने वाले बच्चों को परिजन मायूस होकर लौट रहे हैं।
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तीन बच्चों की हो चुकी मौत
इस सप्ताह जिला अस्पताल में तीन बच्चों की मौत हुई। इनमें से एक बच्चा डायरिया की चपेट में था जबकि दो अन्य की बुखार से पीड़ित होने पर मौत हुई है।
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अस्पताल से संबद्ध बाल रोग विशेषज्ञ कोर्ट जाने की बात कहकर नहीं लौटे हैं। इसके चलते बच्चों के उपचार में दिक्कत आ रही है। जिला अस्पताल में दूसरा बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में फिजीशियन से बच्चों को उपचार दिलाया जा रहा है। शुक्रवार की रात जिस बच्चे की मौत हुई है वह मृत अवस्था में लाया गया था।
डॉ. अरविंद कुमार गर्ग, सीएमएस