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गरीब ही नहीं, एडीए ने अमीर को भी ठगा
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Mon, 29 Jun 2015 02:26 AM IST
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आवास उपलब्ध कराने के नाम पर आगरा विकास प्राधिकरण ने गरीबों को ही नहीं, अमीरों को भी ठगा है। ‘भ्रष्टाचार’ की जड़ें इतनी गहरी हैं कि किसी भी वर्ग के लोगों के लिए मजबूत आवास नहीं बनाए गए हैं। चाहे वह विश्वविख्यात ताजमहल के पास लग्जरी अपार्टमेंट ही क्यों न हों। ताजनगरी फेस-2 में एडीए की महत्वाकांक्षी योजना एडीए हाइट्स में कुछ सालों में दरारें आ गईं। दूर से भले ही यह इमारत सुंदर दिखती हो, लेकिन इसके निर्माण में बरती गई लापरवाही नजदीक से साफ नजर आती हैै।
शहीद नगर में एडीए के ईडब्ल्यूएस मकानों के निर्माण की पोल शनिवार को उस वक्त खुल गई जब दो डबल स्टोरी भवन धराशायी हो गए। इसमें दो लोगों की जान चली गई। यह ईडब्ल्यूएस मकान तीन दशक में ही खंडहर हो गए हैं। इन घरों में कदम रखते ही दिल दहल जाता है कि पता नहीं मकान का कौन सा हिस्सा कब गिर जाए। अति दुर्बल आय वर्ग के लोगाें के लिए बनाए गए यह आवास जरूरतमंदों ने 60 से 70 हजार रुपये में लिए थे। अमीरों के लिए बनाए गए आवासों की स्थिति भी कुछ ठीक नहीं है। सिर्फ सात साल पहले विकसित हुई एडीए हाइट्स में भी दरार आ गई हैं। एक फ्लैट के लाखों रुपये वसूलने वाले एडीए ने निर्माण सामग्री में किस दर्जे का घालमेल किया है इसका अंदाजा प्लास्टर झड़ने से लगाया जा सकता है। यह हालत तब है, जबकि इसमें बहुत से वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों के फ्लैट हैं। इसके रखरखाव के लिए हर साल अलग से बजट भी पास होता है। इसके बावजूद बिल्डिंग अभी से जर्जर होने लगी है।
इनसेट
अधिकतर फ्लैट खाली
एडीए हाइट्स में अभी भी अधिकांश फ्लैट खाली हैं। दरअसल, इस योजना में अधिकतर लोगों ने निवेश के लिहाज से फ्लैट खरीदकर छोड़ दिए हैं। कुछ इनवेस्टर दिल्ली के भी हैं। इसलिए इसमें रहने वालों की संख्या कम है।
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एडीए हाइट्स
टाइप क्षेत्रफल (वर्ग मीटर) कीमत (लाख)
स्टूडियो 80.10 25.87
डीलक्स 142.17 45.91
सुपर डीलक्स-1 181.17 58.58
सुपर डीलक्स-2 223.51 72.19
अल्ट्रा डीलक्स 260.14 84.01
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शहीद नगर में एडीए के ईडब्ल्यूएस मकानों के निर्माण की पोल शनिवार को उस वक्त खुल गई जब दो डबल स्टोरी भवन धराशायी हो गए। इसमें दो लोगों की जान चली गई। यह ईडब्ल्यूएस मकान तीन दशक में ही खंडहर हो गए हैं। इन घरों में कदम रखते ही दिल दहल जाता है कि पता नहीं मकान का कौन सा हिस्सा कब गिर जाए। अति दुर्बल आय वर्ग के लोगाें के लिए बनाए गए यह आवास जरूरतमंदों ने 60 से 70 हजार रुपये में लिए थे। अमीरों के लिए बनाए गए आवासों की स्थिति भी कुछ ठीक नहीं है। सिर्फ सात साल पहले विकसित हुई एडीए हाइट्स में भी दरार आ गई हैं। एक फ्लैट के लाखों रुपये वसूलने वाले एडीए ने निर्माण सामग्री में किस दर्जे का घालमेल किया है इसका अंदाजा प्लास्टर झड़ने से लगाया जा सकता है। यह हालत तब है, जबकि इसमें बहुत से वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों के फ्लैट हैं। इसके रखरखाव के लिए हर साल अलग से बजट भी पास होता है। इसके बावजूद बिल्डिंग अभी से जर्जर होने लगी है।
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अधिकतर फ्लैट खाली
एडीए हाइट्स में अभी भी अधिकांश फ्लैट खाली हैं। दरअसल, इस योजना में अधिकतर लोगों ने निवेश के लिहाज से फ्लैट खरीदकर छोड़ दिए हैं। कुछ इनवेस्टर दिल्ली के भी हैं। इसलिए इसमें रहने वालों की संख्या कम है।
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