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49 साल से बस स्टैंड का इंतजार: मथुरा के बजाना कस्बे के लोगों का दर्द, सड़क पर करते हैं वाहनों का इंतजार
Mon, 16 Mar 2026 06:48 PM IST
Dhirendra Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 16 Mar 2026 06:48 PM IST
सार
नगर पंचायत का दर्जा मिलने के 49 साल बाद भी बाजना कस्बे में बस स्टैंड नहीं बन पाया है, जिससे यात्रियों को सड़क किनारे बसों का इंतजार करना पड़ता है। सीधी रोडवेज सेवा न होने से लोग डग्गेमार और ओवरलोड वाहनों में सफर करने को मजबूर हैं।
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रोडवेज की बस-
- फोटो : संवाद
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विस्तार
मथुरा के नौहझील के कस्बा बाजना को नगर पंचायत का दर्जा मिले 49 वर्ष बीत गए हैं, लेकिन आज तक यहां बस स्टैंड नहीं बन पाया है। यमुना एक्सप्रेस-वे से सटे इस कस्बे के हजारों लोग रोजाना सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करते हैं।
बाजना क्षेत्र से करीब पांच दर्जन छोटे-बड़े गांव जुड़े हुए हैं। यहां से बड़ी संख्या में छात्र, मजदूर और नौकरीपेशा लोग रोजाना मथुरा, आगरा, अलीगढ़, नोएडा, दिल्ली, गाजियाबाद, पलवल,बल्लभगढ़ और फरीदाबाद की यात्रा करते हैं। बस स्टैंड न होने के कारण यात्रियों को सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। वहीं सीधी रोडवेज सेवा का अभाव होने से अधिकांश लोगों को डग्गेमार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। कई बार ओवरलोड वाहनों में सफर करने से दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
स्थानीय निवासी भोला सेठ, लख्मी सेठ, महेश अग्रवाल, योगेश वार्ष्णेय, शिवम वार्ष्णेय, शिवकुमार तोमर, शिवम सूर्यवंशी, मनीष गुप्ता का कहना है कि कस्बा पांच दशक से बस स्टैंड की बाट जोह रहा है। रोडवेज के एआरएम मदन मोहन शर्मा का कहना है कि नगर पंचायत अध्यक्ष यदि बस स्टैंड के लिए जमीन का प्रस्ताव भेजते हैं तो उसे शासन और निगम को अग्रसारित कर अनुमति ली जाएगी। वहीं नगर पंचायत अध्यक्ष सुभाष चौधरी ने बताया कि बस स्टैंड के लिए जमीन की तलाश की जा रही है।
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बाजना क्षेत्र से करीब पांच दर्जन छोटे-बड़े गांव जुड़े हुए हैं। यहां से बड़ी संख्या में छात्र, मजदूर और नौकरीपेशा लोग रोजाना मथुरा, आगरा, अलीगढ़, नोएडा, दिल्ली, गाजियाबाद, पलवल,बल्लभगढ़ और फरीदाबाद की यात्रा करते हैं। बस स्टैंड न होने के कारण यात्रियों को सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। वहीं सीधी रोडवेज सेवा का अभाव होने से अधिकांश लोगों को डग्गेमार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। कई बार ओवरलोड वाहनों में सफर करने से दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
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स्थानीय निवासी भोला सेठ, लख्मी सेठ, महेश अग्रवाल, योगेश वार्ष्णेय, शिवम वार्ष्णेय, शिवकुमार तोमर, शिवम सूर्यवंशी, मनीष गुप्ता का कहना है कि कस्बा पांच दशक से बस स्टैंड की बाट जोह रहा है। रोडवेज के एआरएम मदन मोहन शर्मा का कहना है कि नगर पंचायत अध्यक्ष यदि बस स्टैंड के लिए जमीन का प्रस्ताव भेजते हैं तो उसे शासन और निगम को अग्रसारित कर अनुमति ली जाएगी। वहीं नगर पंचायत अध्यक्ष सुभाष चौधरी ने बताया कि बस स्टैंड के लिए जमीन की तलाश की जा रही है।
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