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लापरवाही : एक महीने पहले लगे एक हजार पौधे अब बचे सिर्फ गड्ढे
Wed, 16 Dec 2020 11:24 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 16 Dec 2020 11:24 AM IST
सार
- सिंचाई की न जानवरों से सुरक्षा के किए इंतजाम
- शाहदरा फ्लाईओवर के डिवाइडर पर झरना नाले तक लगाए गए थे
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गड्ढे
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा में शहादरा फ्लाईओवर से लेकर झरना नाला तक डिवाइडर पर 30 दिन पहले एक हजार पौधे लगाए गए थे। अब यहां सिर्फ गड्ढे ही बचे हैं। ऐसा पौधों की देखरेख नहीं करने के कारण हुआ है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इन पौधों को लगाने के बाद सिंचाई नहीं की गई। पशुओं से सुरक्षा का भी कोई इंतजाम नहीं किया गया।
एनएच-2 पर शाहदरा फ्लाईओवर पर दीवाली की पूर्व संध्या पर 14 नवंबर को यातायात शुरू किया गया था। पुल निर्माण के बाद फ्लाईओवर के डिवाइडरों पर झरना नाले तक तकरीबन 800 मीटर में एक हजार से अधिक बोगनबेलिया, कनेर, अमलताश समेत कई प्रजातियों के पौधों को रोपा गया था।
उस वक्त अफसरों ने कहा था कि ये पौधे सिर्फ हरियाली नहीं बढ़ाएंगे, बल्कि हादसे भी रोकेंगे। क्योंकि डिवाइडर पर होने केकारण ये चालकों का ध्यान भटकने से बचाएंगे। चालकों को दूसरी तरफ आ रहे वाहन नजर नहीं आएंगे।
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एनएच-2 पर शाहदरा फ्लाईओवर पर दीवाली की पूर्व संध्या पर 14 नवंबर को यातायात शुरू किया गया था। पुल निर्माण के बाद फ्लाईओवर के डिवाइडरों पर झरना नाले तक तकरीबन 800 मीटर में एक हजार से अधिक बोगनबेलिया, कनेर, अमलताश समेत कई प्रजातियों के पौधों को रोपा गया था।
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उस वक्त अफसरों ने कहा था कि ये पौधे सिर्फ हरियाली नहीं बढ़ाएंगे, बल्कि हादसे भी रोकेंगे। क्योंकि डिवाइडर पर होने केकारण ये चालकों का ध्यान भटकने से बचाएंगे। चालकों को दूसरी तरफ आ रहे वाहन नजर नहीं आएंगे।
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पौधे फिर से लगवाएंगे..... जीओ टैगिंग होगी
शाहदरा फ्लाईओवर लगवाए गए पौधे सूख गए हैं। इस बारे में कार्यदायी संस्था को दोबारा पौधरोपण करने के लिए नोटिस दिया गया है। इस बार पौधे लगवाने के बाद जीओ टैगिंग भी करवाई जाएगी। हरेक पौधे का हिसाब लिया जाएगा -अरुण कुमार यादव, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
एक हजार पेड़ काटने के बदले पौधरोपण नहीं किया
वर्ष 2014 से 2018 के बीच दिल्ली से आगरा तक के सिक्सलेन प्रोजेक्ट में एनएचएआई ने आगरा में आठ हजार से ज्यादा हरे पेड़ों को कटवाया था। इसकी भरपाई के लिए एनएचएआई को तीन गुना पौधे रोपने थे। 1928 करोड़ रुपये की लागत का यह प्रोजेक्ट आगरा में 95 फीसदी तक पूरा हो चुका है। लेकिन रुनकता से लेकर वाटर वर्क्स तक कटवाए गए हरे पेड़ों की जगह आज तक एक भी पौधा एनएचएआई ने नहीं लगवाया है। यही कारण है कि गर्मी में धूल उड़ने पर एनएच-2 पर हवा प्रदूषित होती है। वायु गुणवत्ता सूचकांक में हाईवे के आसपास सबसे ज्यादा प्रदूषण पाया जाता है।
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