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अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजौ, राष्ट्रीय बालिका दिवस पर पढ़ें 'खुशखबर'
Thu, 24 Jan 2019 01:12 AM IST
मुकेश कुमार
धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला, आगरा
धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Thu, 24 Jan 2019 01:12 AM IST
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National girl day
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ताजनगरी में बेटियों की चाहत बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। अब प्रति 1000 लड़कों पर 920 लड़कियां हो गई हैं। 2011 में यह संख्या महज 861 थी। आठ साल पहले की गई जनगणना में आगरा में 1000/861 रही। छह साल में यह संख्या बढ़कर 2017 में 909 पहुंच गई।
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हाल ही में हेल्थ मैनेजमेंट इनफॉरमेशन सिस्टम (एचएमआईएस) की रिपोर्ट बताती है कि आगरा में सितंबर 2018 तक प्रति एक हजार पुरुषों पर बेटियों की संख्या 920 पहुंच गई है। इस तरह से एक साल में 11 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई।
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सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स का कहना है कि पीसीपीएनडीटी एक्ट की सख्ती और समाज की बदलती सोच का असर है। बेटियों के प्रति लोग जागरूक हुए और भ्रूण लिंग जांच कानून का भी भय बना हुआ है। इससे भ्रूण लिंग जांच का धंधा रुका है। सरकारी योजनाएं सोने पे सुहागा साबित हुई।
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बेटियों के बढ़ने की यह हैं तीन वजह
भ्रूण लिंग जांच कानून: भ्रूण लिंग जांच रोकने के लिए पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने शहर के अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर ताबड़तोड़ छापे मारे। भ्रूण लिंग जांच करते हुए आठ से अधिक विशेषज्ञ चिकित्सक और पांच झोलाछाप को गिरफ्तार किया।
शिक्षा-रोजगार को योजनाएं : बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के तहत शिक्षा और रोजगार के लिए कई सरकारी योजनाएं प्रभावी साबित हुईं। छात्रवृत्ति योजना, सुकन्या योजना, सामूहिक विवाह समेत कई कारगर योजनाएं लागू कीं। इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम हुआ।
सामर्थ्यवान बनतीं बेटियां : राजनीति, अंतरिक्ष, खेलकूद, सेना मतलब हर क्षेत्र में बेटियों ने दम दिखाया। अपने शहर की हेमलता काला, पूनम यादव, दीप्ति शर्मा जैसी बेटियां राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पटल पर नाम रोशन करने लगीं तो समाज का नजरिया बदलने लगा।
आगरा में ये रहा लिंगानुपात:
शिक्षा-रोजगार को योजनाएं : बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के तहत शिक्षा और रोजगार के लिए कई सरकारी योजनाएं प्रभावी साबित हुईं। छात्रवृत्ति योजना, सुकन्या योजना, सामूहिक विवाह समेत कई कारगर योजनाएं लागू कीं। इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम हुआ।
सामर्थ्यवान बनतीं बेटियां : राजनीति, अंतरिक्ष, खेलकूद, सेना मतलब हर क्षेत्र में बेटियों ने दम दिखाया। अपने शहर की हेमलता काला, पूनम यादव, दीप्ति शर्मा जैसी बेटियां राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पटल पर नाम रोशन करने लगीं तो समाज का नजरिया बदलने लगा।
आगरा में ये रहा लिंगानुपात:
| वर्ष | लिंग अनुपात |
| 2001 | 1000/866 |
| 2011 | 1000/861 |
| 2017 | 1000/909 |
| 2018 | 1000/920 |
यह सोचती हैं महिलाएं
डॉ अनुपमा शर्मा का कहना है कि बेटियों के प्रति महिलाओं की सोच में बड़ा बदलाव आया है। हमारे अस्पताल में बेटियां जन्म लेती हैं तो उनके अभिभावकों की खुशी देखते बनती है।
वाटर वर्क्स निवासी मानसी सिंह ने कहा कि दो बेटियां हैं और दोनों को बेटों की तरह पाल पोस रही हूं। परिवार में यह सबकी चहेती हैं। सोच बदल रही है, यही महिला सशक्तिकरण है।
बल्केश्वर की अनामिका श्रीवास्तव ने कहा कि जब डॉक्टर ने बताया कि बेटी हुई है तो पूरा परिवार खुशी से झूम उठा। अस्पताल मेें ही मिठाई बांटी, ये बदलती सोच का ही नतीजा है।
वाटर वर्क्स निवासी मानसी सिंह ने कहा कि दो बेटियां हैं और दोनों को बेटों की तरह पाल पोस रही हूं। परिवार में यह सबकी चहेती हैं। सोच बदल रही है, यही महिला सशक्तिकरण है।
बल्केश्वर की अनामिका श्रीवास्तव ने कहा कि जब डॉक्टर ने बताया कि बेटी हुई है तो पूरा परिवार खुशी से झूम उठा। अस्पताल मेें ही मिठाई बांटी, ये बदलती सोच का ही नतीजा है।