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मुस्लिमों को रास नहीं आया तीन तलाक पर अध्यादेश, बोले- इतनी परवाह थी तो रोजगार देते

Thu, 20 Sep 2018 03:21 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Updated Thu, 20 Sep 2018 03:21 PM IST
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Muslims reactions on triple talaq ordinance in agra
तीन तलाक
केंद्र की मोदी सरकार ने तीन तलाक बिल पर बड़ा फैसला लेते हुए अध्यादेश को मंजूरी दी, लेकिन यह अध्यादेश ताजनगरी के मुस्लिमों को रास नहीं आया। तीन तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत के मामले को गैर जमानती अपराध माना गया है, लेकिन संशोधन के हिसाब से अब मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार होगा। इस प्रावधान के कारण मुस्लिमों ने अध्यादेश का विरोध किया है।
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आगरा के मुस्लिमों का मानना है कि तीन तलाक का अध्यादेश चुनावी मौसम में लाया गया है। यह केवल छह महीने ही वैद्य रहेगा। चुनावी चाल चलते हुए सरकार इस अध्यादेश को लाई है। मुस्लिम समाज इसे कभी स्वीकार नहीं कर सकता। 
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शहर काजी से लेकर कॉलेज की प्रोफेसर और संगठनों के मुस्लिमों ने इस अध्यादेश का विरोध किया है। हालांकि तीन तलाक की पीड़िता मुस्लिम महिलाओं के लिए यह अध्यादेश कवच की तरह से होगा। समाज के कई लोग ऐसा मानते हैं, लेकिन सार्वजनिक प्रतिक्रिया देने से बचते रहे।
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अध्यादेश से कोई लेनादेन नहीं

नायब शहर काजी मौलाना उजेर आलम ने कहा कि तीन तलाक पर इस अध्यादेश को भारतीय संविधान की भावना के खिलाफ मानता हूं। भारतीय मुस्लिम कुरआन और हदीस के मुताबिक ही चलते हैं। चंद महिलाओं के लिए यह अध्यादेश बनाया गया है। आम मुस्लिमों को इससे कोई लेना देना नहीं है।

शिक्षिका नसरीन बेगम का कहना है कि भारतीय मुस्लिम महिलाओं में शिक्षा की कमी है। यह दूर करने की पहल होनी चाहिए थी। तीन तलाक इस्लाम में है ही नहीं। कुछ महिलाएं शोहरत के लिए मुहिम में शामिल होती हैं। महिलाएं परिवार, समाज के नियमों का पालन करती है। शिक्षा, आरक्षण की जगह ये अध्यादेश क्या जरूरी था ?

'इतनी परवाह थी तो आरक्षण दे देते'

सर्वदलीय मुस्लिम एक्शन कमेटी के इरफान सलीम ने कहा कि सरकार को मुस्लिम महिलाओं की परवाह थी तो आरक्षण दे, शिक्षा दे और रोजगार से जोड़ती, लेकिन तीन तलाक का मुद्दा 5 साल से उठा है। इस अध्यादेश से कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। महिलाएं समाज के नियमों से बंधी हैं। 

भारतीय मुस्लिम विकास परिषद समी अगाई का कहना है कि मॉब लिचिंग में जिन महिलाओं के पति मारे गए, उनका सरकार ख्याल करती, लेकिन यह 2019 चुनाव की तैयारी के लिए अध्यादेश लाया गया है। कोर्ट ने गाइड लाइन के निर्देश दिए, लेकिन सरकार अध्यादेश ले आई। जो पति इसमें जेल जाएगा, क्या वह भविष्य में कभी समझौता कर पाएगा।
 
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