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भूख की वजह से हमलावर होते हैं बंदर, हमलों से बचने के लिए करना होगा यह काम
Fri, 02 Aug 2019 05:00 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 02 Aug 2019 05:00 PM IST
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सड़कों पर बंदरों का झुंड
- फोटो : अमर उजाला
ताजनगरी में जानलेवा हो चुके बंदरों के आतंक से बचना है तो खुले में कूड़ा और कचरे में खाना फेंकना बंद करना पड़ेगा। वन्यजीव विशेषज्ञों ने लोगों को फिर चेताया है कि जब तक खुले में कूड़ा पड़ा रहेगा, बंदर खाने की तलाश में टोलियों में आते रहेंगे और खाना न मिलने पर चिड़चिड़े होकर हमला करते रहेंगे। बंदरों के प्रति धार्मिक नजरिया बदलिए, तभी बंदरों का आतंक रुक पाएगा।
बंदरों के हमले की लगातार बढ़ रही घटनाओं को लेकर अमर उजाला ने वन्य जीव विशेषज्ञों और वन अधिकारियों से बात की, जिसमें बंदरों की समस्या से निपटने के कई विकल्प सामने आए, लेकिन उससे पहले लोगों की मानसिकता बदलना सबसे जरूरी बिंदु रहा। वाइल्ड लाइफ एसओएस के आगरा प्रभारी बैजूराज के मुताबिक बंदरों को खाना देने के लिए जगह तय करें और केवल वहीं पर खाना दिया जाए। जगह जगह खाना फेंकना बंद करना होगा।
25 एकड़ जमीन, 55 करोड़ मिलें, तब संभलेंगे बंदर
बंदरों के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए वाइल्ड लाइफ एसओएस ने वन विभाग को आगरा और मथुरा में रेस्क्यू सेंटर (बंदरशाला) खोलने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें सेंट्रल जू अथारिटी के मानकों के मुताबिक 2 हजार बंदरों को रखने के लिए कम से कम 25 एकड़ जमीन चाहिए। एसओएस ने पांच साल तक रेस्क्यू सेंटर में दो हजार बंदरों के खाने-पीने स्वास्थ्य और अन्य रखरखाव के लिए 55 करोड़ रुपये की मांग की है।
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बंदरों के हमले की लगातार बढ़ रही घटनाओं को लेकर अमर उजाला ने वन्य जीव विशेषज्ञों और वन अधिकारियों से बात की, जिसमें बंदरों की समस्या से निपटने के कई विकल्प सामने आए, लेकिन उससे पहले लोगों की मानसिकता बदलना सबसे जरूरी बिंदु रहा। वाइल्ड लाइफ एसओएस के आगरा प्रभारी बैजूराज के मुताबिक बंदरों को खाना देने के लिए जगह तय करें और केवल वहीं पर खाना दिया जाए। जगह जगह खाना फेंकना बंद करना होगा।
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25 एकड़ जमीन, 55 करोड़ मिलें, तब संभलेंगे बंदर
बंदरों के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए वाइल्ड लाइफ एसओएस ने वन विभाग को आगरा और मथुरा में रेस्क्यू सेंटर (बंदरशाला) खोलने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें सेंट्रल जू अथारिटी के मानकों के मुताबिक 2 हजार बंदरों को रखने के लिए कम से कम 25 एकड़ जमीन चाहिए। एसओएस ने पांच साल तक रेस्क्यू सेंटर में दो हजार बंदरों के खाने-पीने स्वास्थ्य और अन्य रखरखाव के लिए 55 करोड़ रुपये की मांग की है।
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मथुरा में ककरौठा में जिला प्रशासन के पास 175 हेक्टेयर जमीन है, जिसमें से 25 एकड़ जमीन रेस्क्यू सेंटर के लिए देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन आगरा में जमीन की तलाश जारी है। कीठम से लगे क्षेत्रों में प्रशासन 25 एकड़ जमीन तलाश रहा है। वन्य जीव अधिकारी आनंद कुमार के मुताबिक बंदरों को पकड़कर रेस्क्यू सेंटर भेजना सबसे अच्छा विकल्प है।
दो साल से केवल चिंतन, प्रस्ताव लखनऊ में अटके
ताजमहल में विदेशी पर्यटकों को बंदरों द्वारा काटने की खबरें दुनिया भर की मीडिया में छाईं तो प्रदेश के अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने आगरा के कमिश्नर और डीएम को बंदरों के आतंक से मुक्ति के लिए निर्देश दिए थे, लेकिन वन विभाग और नगर निगम दोनों ही बंदरों पर नियंत्रण के लिए किसी कार्य योजना को अब तक अमल में नहीं ला सके हैं। वाइल्ड लाइफ एसओएस के बंदरों की नसबंदी और रेस्क्यू सेंटर के प्रस्ताव लखनऊ भेजने के बाद उन पर कोई फैसला नहीं हो पाया।
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