रेस्क्यू: प्लास्टिक जार में फसा मॉनिटर लिजर्ड का सिर, वाइल्डलाइफ एसओएस ने बचाया

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 08 Sep 2021 10:50 PM IST

सार

वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंजरवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजुराज एम.वी ने कहा, “आगरा में सांप एवं मॉनिटर लिजर्ड से जुड़ी कॉल्स में वृद्धि हुई है। हम हमारे संरक्षण के प्रयासों का समर्थन करने एवं हमारी हेल्पलाइन पर ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट करने के लिए जनता के आभारी हैं।
वाइल्डलाइफ एसओएस ने बचाया मॉनिटर लिजर्ड
वाइल्डलाइफ एसओएस ने बचाया मॉनिटर लिजर्ड - फोटो : वाइल्डलाइफ एसओएस
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विस्तार

आगरा के शाहगंज छेत्र स्थित अवधपुरी में करीब चार फुट लंबी मॉनिटर लिजर्ड (गोह) के गले में प्लास्टिक का जार फंस गया था, जिससे वह खुद को मुक्त करा पाने में असमर्थ थी। वाइल्डलाइफ एसओएस टीम ने मॉनिटर लिजर्ड को सुरक्षित बचाया और प्लास्टिक के जार को काट कर हटा दिया। गोह को कुछ घंटों के लिए चिकित्सकीय निगरानी में रखने के बाद, वापस उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
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वाइल्डलाइफ एसओएस के इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर पर एक संकटग्रस्त कॉल प्राप्त हुई, जिसने वन्यजीव संरक्षण संस्था की रैपिड रिस्पांस यूनिट को आगरा शहर में एक मॉनिटर लिजर्ड (गोह) के प्रति सचेत किया। शाहगंज के अवधपुरी स्थित परिवारजन ने अपने घर के सामने नाले में गोह को देखा, जिसका सिर प्लास्टिक के जार में फंसा हुआ था।


आवश्यक बचाव उपकरणों से लैस दो सदस्यीय टीम जल्द ही स्थान पर पहुंची और मॉनिटर लिजर्ड को बचाया। टीम ने यह सुनिश्चित करते हुए कि प्लास्टिक जार को हटाते समय मॉनिटर लिजर्ड को और अधिक तनाव ना हो, सावधानीपूर्वक जार को काट कर उसके सिर से अलग किया।

वाइल्डलाइफ एसओएस को सूचना देने वाले, सुरेंद्र प्रकाश शर्मा ने बताया, “गोह नाले के अन्दर गिर गई थी, और जार से खुद को मुक्त करा पाने में असमर्थ थी। चूंकि, वाइल्डलाइफ एसओएस शहर और उसके आसपास से संकटग्रस्त जानवरों को बचाता रहा है, इसलिए हमने तुरंत उनकी हेल्पलाइन पर इसकी सूचना दी। हमें खुशी है कि समय पर हस्तक्षेप से मॉनिटर लिज़र्ड की जान बच पाई।

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, “प्लास्टिक जार मॉनिटर लिजर्ड के गले के चारों ओर कसकर फसा हुआ था और थोड़ी सी भी लापरवाही से उसे गंभीर चोट लग सकती थी। अक्सर सांप, पक्षी और छोटे जानवर लोहे की जाली, सिंथेटिक नेट या फिर ऐसे ही प्लास्टिक के जार में फस जाते हैं, जिसके बाद घुटन और भुख के कारण उनकी मौत भी हो सकती है।”

वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंजरवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजुराज एम.वी ने कहा, “आगरा में सांप एवं मॉनिटर लिजर्ड से जुड़ी कॉल्स में वृद्धि हुई है। हम हमारे संरक्षण के प्रयासों का समर्थन करने एवं हमारी हेल्पलाइन पर ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट करने के लिए जनता के आभारी हैं। हमारे प्रशिक्षित बचावकर्मी ऐसी परीस्थितियों का सामना करने के लिए सभी सुरक्षा उपायों का पालन करते हैं।”

बंगाल मॉनिटर या कॉमन इंडियन मॉनिटर भारत में पाए जाने वाले चार मॉनिटर लिजर्ड की प्रजातियों में से एक है, और यह सभी भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची 1 के तहत संरक्षित हैं एवं इनके शरीर के अंगों के आयात या निर्यात पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा हुआ है। मॉनिटर लिजर्ड ईकोसिस्टम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन वे अक्सर गलत धारणाओं के कारण एवं मांस और शरीर के अंगों के लिए भी मारे जाते हैं।

इसके तुरंत बाद, टीम ने रामबाग से एक अजगर का भी रेस्क्यू किया। आठ फुट लंबे अजगर को आगरा के व्यस्त रामबाग चौराहे के पास एक नाले में देखा गया था, जिसे सुरक्षित रूप से बचा लिया गया। टीम ने आगरा के बिचपुरी में एक घर की रसोई से जहरीले कॉमन क्रेट सांप का भी रेस्क्यू किया। इन सभी सांपों को बाद में उनके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ दिया गया।

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