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मायावती ने खोला चुनावी वायदों का पिटारा
मायावती ने खोला चुनावी वायदों का पिटारा
Updated Mon, 06 Feb 2017 10:11 PM IST
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मायावती ने खोला चुनावी वायदों का पिटारा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पूर्व मुख्यमंत्री एवं बसपा अध्यक्ष मायावती चुनाव घोषणा पत्र भले ही जारी न करती हों लेकिन आगरा की रैली में उन्होंने चुनावी वायदों की झड़ी लगा दी। आगरा और मथुरा की तमाम समस्याओं का समाधान करने के साथ 20 से अधिक वायदे किए। उन्होंने किसान, नौजवान, व्यापारी, मजदूर सभी के जख्म कुरेदे। फिर भरोसा दिया कि सरकार बनने पर मरहम लगाया जाएगा। उन्होंने आगरा के जूता कारोबार से जुड़े तमाम लोगों से कहा कि अपनी पिछली सरकार में उनकी कई समस्याओं का समाधान किया। फिर वादा किया कि जो रह गई हैं, उन्हें इस बार सरकार बनने पर पूरा कर देंगी। बता दें, आगरा के जूता उद्योग से लाखों लोग जुड़े हैं। उन्होंने कई चुनावी वादे तो सपा और भाजपा से घोषणा पत्र से बढ़कर किए। भाजपा किसानों के कर्ज माफी की बात कर रही है। मायावती ने कहा, एक लाख तक के सभी के कर्ज माफ कर देंगे। सपा ने भत्ता देने की बात कही है, मायावती ने रोजगार का वादा किया। लैपटॉप और मोबाइल की जगह रोजगार शुरू करने के लिए आर्थिक मदद देने की बात कही।
ये वादे किए
- व्यापारियों को सुरक्षा, उनकी समस्याओं का समाधान, व्यापारी आयोग का गठन।
- किसी भी धर्म के जेल में बंद बेकसूर युवकों के मामलों की समीक्षा की जाएगी।
- थानों में हर पीड़ित की एफआईआर दर्ज की जाएगी, सभी को न्याय मिलेगा
- जिनकी सपा सरकार में एफआईआर नहीं लिखी गई, उनकी रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
- गन्ना किसानों समेत अन्य किसानों की फसल का जल्द भुगतान।
- सपा सरकार द्वारा बंद की गई पुरानी योजनाओं को फिर चलाएंगे।
- शैक्षणिक संस्थानों, शहरों के पुराने नामों को बहाल किया जाएगा।
- बेरोजगारों को भत्ता नहीं, सरकारी-प्राइवेट नौकरी दिलाई जाएगी।
- लैपटॉप-मोबाइल की जगह छात्रों को आर्थिक मदद मिलेगी।
- मिड डे मील में फल, दूध, अंडा, चना, केक, बिस्किट मिलेंगे।
- किसानों के एक लाख रुपये तक के कर्ज माफ किए जाएंगे।
- गरीबों को फिर से पट्टे मिलेंगे, कब्जाधारकों पर एफआईआर।
- नए स्मारक नहीं बनवाएंगे, विकास और जनसुविधाओं पर जोर।
- सपा सरकार के आर्थिक फैसलों, भर्तियों की जांच कराई जाएगी ।
दलित-मुस्लिमों पर फोकस रहा माया का भाषण
बसपा अध्यक्ष मायावती ने 45 मिनट के भाषण में वोट के गणित पर फिट बैठने वाले मुद्दों को एक एक कर बड़ी सफाई से पेश किया। किसान, नौजवान और व्यापारियों को सुहाने सपने दिखाए लेकिन फोकस डी-एम यानी दलित-मुस्लिम समीकरण पर किया। दोनों के सामने भाजपा का हौव्वा खड़ा किया। दलितों से कहा कि यूपी में भाजपा आई तो आरक्षण खत्म हो सकता है। मुस्लिमों को डराया कि उन पर अन्याय और बढ़ जाएगा। एएमयू और जामिया मिलिया से अल्पसंख्यक दर्जा छिन सकता है। उन्होंने मुस्लिम पर्सनल लॉ और तीन तलाक पर भाजपा के नजरिए की आलोचना भी की।
साथ ही यह भी समझाया कि अगर मुस्लिम साइकिल पर चढ़े तो भाजपा का भला होगा। इसके लिए तर्क दिया कि मुलायम कुनबे के विवाद के चलते शिवपाल और अखिलेश गुट एक दूसरे को चुनाव में नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे हैं। मुस्लिमों को सपा-कांग्रेस गठबंधन से दूर करने के लिए यह भी याद दिलाया कि जब मुजफ्फरनगर दंगा हुआ तब प्रदेश में सपा की और केंद्र में यूपीए की सरकार थी। दलितों को भाजपा से डराने के लिए रोहित वेमुला कांड, गुजरात का ऊना कांड जैसे मामले उछाले। प्रदेश में भाजपा की सरकार आने पर आरक्षण खत्म हो जाने का भय दिखाया। यह भी कहा कि पदोन्नति में आरक्षण लागू नहीं किया जा रहा है।
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मुस्लिमों से कहा कि गोरक्षा, लव जेहाद और देशभक्ति के नाम पर उन्हें परेशान किया जा रहा है। उनकी सरकार आने पर यह बंद होगा। पर्सनल लॉ और तीन तलाक के मुद्दे पर मायावती उलेमा के साथ खड़ी नजर आईं। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर वह केंद्र सरकार के नजरिए से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सपा सरकार को घेरा। मुजफ्फरनगर दंगा, बुलंदशहर रेप कांड, मथुरा का जवाहर बाग कांड, नोएडा का दादरी कांड जैसी घटनाओं का जिक्र किया। गुण्डे-माफिया को जेल भेजने के भाजपा के चुनावी वादे पर कहा, जिन पर दिल्ली की कानून व्यवस्था नहीं संभल रही, वो उससे कई गुना बड़े यूपी की कैसे संभाल पाएंगे। उन्होंने किसानों से एक लाख तक की कर्ज माफी, व्यापारियों को व्यापारी आयोग के गठन और नौजवानों को रोजगार देने के चुनावी वादे कर सुहाने सपने भी दिखाए।
व्यापारियों के लिए क्या किया बीजेपी ने
मायावती ने बीजेपी के लोकसभा चुनाव के वादे गिनाए। फिर पूछा कि खाते में 15-20 लाख रुपये आए या नहीं। किसानों की कर्ज माफी हुई या नहीं। व्यापारियों से पूछा कि आपकी हितैषी बनने वाली बीजेपी सरकार ने अभी तक आपके लिए कुछ किया या नहीं।
ओपीनियन पोल की खुल जाएगी पोल
मायावती ने चुनाव पूर्व सर्वे और पोल पर भी निशाना साधा। कहा कि 2007 के चुनाव में तमाम पोल बसपा को चौथे नंबर पर बता रहे थे लेकिन जब चुनाव नतीजे आई तो बसपा पहले नंबर पर थी। इस बार भी 11 मार्च को तमाम ओपीनियन पोल की पोल खुल जाएगी।
जिनके खुद के घर शीशे के हों....
मायावती ने फिल्म का डायलॉग भी बोला। नोटबंदी पर बसपा के खातों की जांच का जिक्र करते हुए भाजपा से कहा, जिनके खुद के घर शीशे के हों, उन्हें दूसरों पर पत्थर नहीं उछालने चाहिए।
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ये वादे किए
- व्यापारियों को सुरक्षा, उनकी समस्याओं का समाधान, व्यापारी आयोग का गठन।
- किसी भी धर्म के जेल में बंद बेकसूर युवकों के मामलों की समीक्षा की जाएगी।
- थानों में हर पीड़ित की एफआईआर दर्ज की जाएगी, सभी को न्याय मिलेगा
- जिनकी सपा सरकार में एफआईआर नहीं लिखी गई, उनकी रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
- गन्ना किसानों समेत अन्य किसानों की फसल का जल्द भुगतान।
- सपा सरकार द्वारा बंद की गई पुरानी योजनाओं को फिर चलाएंगे।
- शैक्षणिक संस्थानों, शहरों के पुराने नामों को बहाल किया जाएगा।
- बेरोजगारों को भत्ता नहीं, सरकारी-प्राइवेट नौकरी दिलाई जाएगी।
- लैपटॉप-मोबाइल की जगह छात्रों को आर्थिक मदद मिलेगी।
- मिड डे मील में फल, दूध, अंडा, चना, केक, बिस्किट मिलेंगे।
- किसानों के एक लाख रुपये तक के कर्ज माफ किए जाएंगे।
- गरीबों को फिर से पट्टे मिलेंगे, कब्जाधारकों पर एफआईआर।
- नए स्मारक नहीं बनवाएंगे, विकास और जनसुविधाओं पर जोर।
- सपा सरकार के आर्थिक फैसलों, भर्तियों की जांच कराई जाएगी ।
दलित-मुस्लिमों पर फोकस रहा माया का भाषण
बसपा अध्यक्ष मायावती ने 45 मिनट के भाषण में वोट के गणित पर फिट बैठने वाले मुद्दों को एक एक कर बड़ी सफाई से पेश किया। किसान, नौजवान और व्यापारियों को सुहाने सपने दिखाए लेकिन फोकस डी-एम यानी दलित-मुस्लिम समीकरण पर किया। दोनों के सामने भाजपा का हौव्वा खड़ा किया। दलितों से कहा कि यूपी में भाजपा आई तो आरक्षण खत्म हो सकता है। मुस्लिमों को डराया कि उन पर अन्याय और बढ़ जाएगा। एएमयू और जामिया मिलिया से अल्पसंख्यक दर्जा छिन सकता है। उन्होंने मुस्लिम पर्सनल लॉ और तीन तलाक पर भाजपा के नजरिए की आलोचना भी की।
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साथ ही यह भी समझाया कि अगर मुस्लिम साइकिल पर चढ़े तो भाजपा का भला होगा। इसके लिए तर्क दिया कि मुलायम कुनबे के विवाद के चलते शिवपाल और अखिलेश गुट एक दूसरे को चुनाव में नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे हैं। मुस्लिमों को सपा-कांग्रेस गठबंधन से दूर करने के लिए यह भी याद दिलाया कि जब मुजफ्फरनगर दंगा हुआ तब प्रदेश में सपा की और केंद्र में यूपीए की सरकार थी। दलितों को भाजपा से डराने के लिए रोहित वेमुला कांड, गुजरात का ऊना कांड जैसे मामले उछाले। प्रदेश में भाजपा की सरकार आने पर आरक्षण खत्म हो जाने का भय दिखाया। यह भी कहा कि पदोन्नति में आरक्षण लागू नहीं किया जा रहा है।
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मुस्लिमों से कहा कि गोरक्षा, लव जेहाद और देशभक्ति के नाम पर उन्हें परेशान किया जा रहा है। उनकी सरकार आने पर यह बंद होगा। पर्सनल लॉ और तीन तलाक के मुद्दे पर मायावती उलेमा के साथ खड़ी नजर आईं। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर वह केंद्र सरकार के नजरिए से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सपा सरकार को घेरा। मुजफ्फरनगर दंगा, बुलंदशहर रेप कांड, मथुरा का जवाहर बाग कांड, नोएडा का दादरी कांड जैसी घटनाओं का जिक्र किया। गुण्डे-माफिया को जेल भेजने के भाजपा के चुनावी वादे पर कहा, जिन पर दिल्ली की कानून व्यवस्था नहीं संभल रही, वो उससे कई गुना बड़े यूपी की कैसे संभाल पाएंगे। उन्होंने किसानों से एक लाख तक की कर्ज माफी, व्यापारियों को व्यापारी आयोग के गठन और नौजवानों को रोजगार देने के चुनावी वादे कर सुहाने सपने भी दिखाए।
व्यापारियों के लिए क्या किया बीजेपी ने
मायावती ने बीजेपी के लोकसभा चुनाव के वादे गिनाए। फिर पूछा कि खाते में 15-20 लाख रुपये आए या नहीं। किसानों की कर्ज माफी हुई या नहीं। व्यापारियों से पूछा कि आपकी हितैषी बनने वाली बीजेपी सरकार ने अभी तक आपके लिए कुछ किया या नहीं।
ओपीनियन पोल की खुल जाएगी पोल
मायावती ने चुनाव पूर्व सर्वे और पोल पर भी निशाना साधा। कहा कि 2007 के चुनाव में तमाम पोल बसपा को चौथे नंबर पर बता रहे थे लेकिन जब चुनाव नतीजे आई तो बसपा पहले नंबर पर थी। इस बार भी 11 मार्च को तमाम ओपीनियन पोल की पोल खुल जाएगी।
जिनके खुद के घर शीशे के हों....
मायावती ने फिल्म का डायलॉग भी बोला। नोटबंदी पर बसपा के खातों की जांच का जिक्र करते हुए भाजपा से कहा, जिनके खुद के घर शीशे के हों, उन्हें दूसरों पर पत्थर नहीं उछालने चाहिए।