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Mauni Amavasya 2024: कब है मौनी अमावस्या? जानें मुहूर्त, स्नान-दान के नियम और पूजन विधि
Thu, 08 Feb 2024 04:24 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 08 Feb 2024 04:24 PM IST
सार
Mauni Amavasya 2024: माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। ज्योतिष के अनुसार ऐसा करने से पापों से मुक्ति मिलती है। मौनी अमावस्या इस बार 9 फरवरी को है।
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मौनी अमावस्या पूजन करतीं महिलाएं। ।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
Mauni Amavasya 2024 Date: मौनी अमावस्या पर शुक्रवार को शुभ योगों के बीच कासगंज के गंगा घाटों पर आस्था की डुबकी लगेगी। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, बुधदित्य योग और महोदय योग का मिलन हो रहा है। ज्योतिष पर्व के मौके पर बन रहे इन विशेष योगों को काफी शुभ मान रहे हैं इस ।महासंयोग पितर प्रसन्न होंगे।
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ज्योतिषाचार्य मुकुंद बल्लभ भट़्ट का कहना है कि माघ मास में पड़ने वाली मौनी अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इस दिन गंगा स्नान कर दान करने से विशेष पुण्य, मिलता है लेकिन इस बार की यह अमावस्या और भी खास है। श्रवण नक्षत्र, व्यतीपात योग और शकुनी करण के संयोग से महोदय योग का निर्माण हो रहा है। महोदय योग सुबह 8.04 से शाम 7.06 बजे तक रहेगा। यह योग पितरों को प्रसन्न करने के लिए बहुत ही शुभ है।
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मौनी अमावस्या के अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान करने से पाप खत्म होते हैं और पुण्य मिलता है। इसके अलावा सर्वार्थ सिद्ध योग का संयोग बनने से सभी कार्य सिद्ध होंगे। पूजा पाठ, अनुष्ठान, साधना आदि के लिए यह योग काफी शुभ है। इस दिन बुधदित्य योग, विनायक अमृत हंस और मालव्य योग भी बन रहे हैँ। इतने योगों का संयोग एक साथ बनना दुर्लभ माना जाता है।
मौनी अमावस्या की पूजन विधि
मौनी अमावस्या के दिन सवेरे.सवेरे ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर की साफ सफाई करेंं इसके बाद पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लें, अगर आपके लिए ऐसा करना संभव न हो तो पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। मौनी अमावस्या का व्रत रखने वाले साधक जहां तक संभव हो मौन रहें। तुलसी के पौधे की 108 बार परिक्त्रमा करें। पूजा के बाद गरीबों और जरूरतमंदों को धन, भोजन और वस्त्रों का दान करेंं।
मौनी अमावस्या के दिन सवेरे.सवेरे ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर की साफ सफाई करेंं इसके बाद पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लें, अगर आपके लिए ऐसा करना संभव न हो तो पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। मौनी अमावस्या का व्रत रखने वाले साधक जहां तक संभव हो मौन रहें। तुलसी के पौधे की 108 बार परिक्त्रमा करें। पूजा के बाद गरीबों और जरूरतमंदों को धन, भोजन और वस्त्रों का दान करेंं।
मौन व्रत का महत्व
इस तिथि को मौन एवं संयम की साधना,स्वर्ग एवं मोक्ष देने वाली मानी गई है।वैसे तो इस व्रत को कभी भी किया जा सकता है,पर शास्त्रों में मौनी अमावस्या पर मौन रखने का विधान बताया गया है।यदि किसी व्यक्ति के लिए मौन रखना संभव नहीं हो तो वह अपने विचारों को शुद्ध रखें मन में किसी तरह की कुटिलता नहीं आने दें। आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी वाणी का शुद्ध और सरल होना अति आवश्यक है। मौन से वाणी शुद्ध और नियंत्रित होती है व यह हमारे सोचने-समझने की शक्ति को विकसित करता है इसलिए हमारे शास्त्रों में मौन का विधान बताया गया है। ऋषि-मुनि या चिंतक मौन रहकर ही मनन-चिंतन करते हैं इससे उनकी मानसिक ऊर्जा बढ़ती है, मौन रहकर कार्य करने से ज्ञानेन्द्रियाँ व कामेन्द्रियां एकाग्र होती हैं और कार्य सुचारु रूप से संपन्न होता है।
इस तिथि को मौन एवं संयम की साधना,स्वर्ग एवं मोक्ष देने वाली मानी गई है।वैसे तो इस व्रत को कभी भी किया जा सकता है,पर शास्त्रों में मौनी अमावस्या पर मौन रखने का विधान बताया गया है।यदि किसी व्यक्ति के लिए मौन रखना संभव नहीं हो तो वह अपने विचारों को शुद्ध रखें मन में किसी तरह की कुटिलता नहीं आने दें। आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी वाणी का शुद्ध और सरल होना अति आवश्यक है। मौन से वाणी शुद्ध और नियंत्रित होती है व यह हमारे सोचने-समझने की शक्ति को विकसित करता है इसलिए हमारे शास्त्रों में मौन का विधान बताया गया है। ऋषि-मुनि या चिंतक मौन रहकर ही मनन-चिंतन करते हैं इससे उनकी मानसिक ऊर्जा बढ़ती है, मौन रहकर कार्य करने से ज्ञानेन्द्रियाँ व कामेन्द्रियां एकाग्र होती हैं और कार्य सुचारु रूप से संपन्न होता है।