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Agra News: कंपोनेंट यूनिट का मिला लाइसेंस, एक यूनिट खून से बचेगी तीन मरीजों की जान
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मैनपुरी। तीन साल के इंतजार के बाद ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया से जिला अस्पताल के ब्लड बैंक को ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का लाइसेंस मिल गया है। अब एक यूनिट ब्लड को आरबीसी, प्लाज्मा व प्लेटलेट्स में चेंज कर तीन रोगियों के लिए उपयोग में लाया जा सकेगा।मरीजों के लिए ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन का काम आगामी कुछ दिनों में प्रारंभ कर दिया जाएगा। ब्लड बैंक प्रशासन की ओर से सेपरेशन यूनिट के लिए ट्रिपल बैग सहित आवश्यक सामग्री की डिमांड भेज दी है। उल्लेखनीय है कि तीन साल पहले सरकार ने ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट के लिए करीब 65 लाख रुपये का बजट मंजूर किया था, जिससे भवन के नवीनीकरण और निर्माण कार्य किया गया। वहीं, बाद में मिले बजट से मशीनरी की खरीद की गई। इस पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इस संबंध में कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
प्लेटलेट्स चढ़ाने और बर्न के इलाज के लिए मरीज अबन हीं होंगे रेफर
जिला अस्पताल में रोजाना 10 से 15 मरीजों को प्लेटलेट्स या खून के अन्य कंपोनेंट्स की जरूरत होती है। प्लेटलेट्स व प्लाज्मा के लिए हर महीने करीब 40 से 45 मरीजों को बाहर भेजना पड़ता है। यूनिट के शुरू होने के बाद अब इन मरीजों को जिला असपताल में ही सेपरेशन यूनिट से तीनों कंपोनेंट अलग-अलग करके मिल सकेंगे। जिस मरीज को जिसकी जरूरत होगी, उसे वहीं दिया जाएगा।
मरीजों को होगी इन चीजों की आपूर्ति -आरबीसी: एनीमिया व खून की कमी के रोगियों को।
- प्लाज्मा: बर्न व ब्लडिंग डिसऑर्डर के मरीजों को।
- प्लेटलेट्स: डेंगू और चिकनगुनिया के मरीजों के लिए
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क्या है कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट
एक्सपर्ट्स के अनुसार ब्लड में 3 कंपोनेंट होते हैं। इनमें रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लाज्मा और प्लेटलेट्स शामिल हैं। सेपरेशन यूनिट में ब्लड को घुमाया (मथा) जाता है। इससे ब्लड परत दर परत (लेयर बाई लेयर) हो जाता है और आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स अलग हो जाते हैं। रक्त के प्रत्येक तत्व की अलग-अलग जीवन अवधि होती है। जिसे जरूरत के मुताबिक रोगियों को दिया जाता है। इससे रोगियों की हालत में तेजी से सुधार होता है।
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सेपरेशन यूनिट को शुरू करने के लिए लाइसेंस मिल गया है। इसको लेकर तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। ट्रिपल बैग सहित अन्य सामग्री की डिमांड भेज दी है। जल्द ही यूनिट प्रारंभ हो सकेगी।
- डॉ. विकास यादव, ब्लड बैंक प्रभारी
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प्लेटलेट्स चढ़ाने और बर्न के इलाज के लिए मरीज अबन हीं होंगे रेफर
जिला अस्पताल में रोजाना 10 से 15 मरीजों को प्लेटलेट्स या खून के अन्य कंपोनेंट्स की जरूरत होती है। प्लेटलेट्स व प्लाज्मा के लिए हर महीने करीब 40 से 45 मरीजों को बाहर भेजना पड़ता है। यूनिट के शुरू होने के बाद अब इन मरीजों को जिला असपताल में ही सेपरेशन यूनिट से तीनों कंपोनेंट अलग-अलग करके मिल सकेंगे। जिस मरीज को जिसकी जरूरत होगी, उसे वहीं दिया जाएगा।
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मरीजों को होगी इन चीजों की आपूर्ति -आरबीसी: एनीमिया व खून की कमी के रोगियों को।
- प्लाज्मा: बर्न व ब्लडिंग डिसऑर्डर के मरीजों को।
- प्लेटलेट्स: डेंगू और चिकनगुनिया के मरीजों के लिए
क्या है कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट
एक्सपर्ट्स के अनुसार ब्लड में 3 कंपोनेंट होते हैं। इनमें रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लाज्मा और प्लेटलेट्स शामिल हैं। सेपरेशन यूनिट में ब्लड को घुमाया (मथा) जाता है। इससे ब्लड परत दर परत (लेयर बाई लेयर) हो जाता है और आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स अलग हो जाते हैं। रक्त के प्रत्येक तत्व की अलग-अलग जीवन अवधि होती है। जिसे जरूरत के मुताबिक रोगियों को दिया जाता है। इससे रोगियों की हालत में तेजी से सुधार होता है।
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सेपरेशन यूनिट को शुरू करने के लिए लाइसेंस मिल गया है। इसको लेकर तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। ट्रिपल बैग सहित अन्य सामग्री की डिमांड भेज दी है। जल्द ही यूनिट प्रारंभ हो सकेगी।
- डॉ. विकास यादव, ब्लड बैंक प्रभारी