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ताज : मडपैक से पहली बार दमकेगा गुंबद

Wed, 06 Apr 2016 02:16 AM IST
अमित कुलश्रेष्ठ
अमित कुलश्रेष्ठ Updated Wed, 06 Apr 2016 02:16 AM IST
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madpack will cover gumbad on taj
ताजमहल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
ताजमहल के मुख्य गुंबद को 75 साल बाद शटरिंग से फिर ढक दिया जाएगा। ताज की मीनारों के बाद इसके गुंबद से पीलापन हटाने के लिए मडपैक लगाया जाएगा। 
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दो मीनारों पर मडपैक के बाद उजली सफेद नजर आने लगी है, जबकि शेष दो में भी जल्द काम खत्म हो जाएगा। एएसआई मीनारों के बाद गुंबद पर मडपैक लगाएगा। गुंबद पर छह महीने केवल शटरिंग लगाने में ही लगेंगे। गुंबद के टूटे पत्थरों को बदलने के साथ कलश की केमिकल क्लीनिंग और संगमरमर पर मुल्तानी मिट्टी का लेप लगाकर इसे साफ किया जाएगा। बता दें कि ताजमहल के पीला पड़ने की रिपोर्ट के बाद सांसद अश्वनी कुमार की अध्यक्षता वाली संसदीय कमेटी की सिफारिशों पर एएसआई ने ताज पर मुल्तानी मिट्टी का लेप यानी मडपैक लगाकर पीलापन हटाने की शुरुआत की है। 

तब 92 हजार में हुआ गुंबद का काम
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 75 साल पहले ताज में सन 1941 से 1944 तक मुख्य गुंबद का संरक्षण कराया गया। तब गुंबद के लीकेज, टूटे हुए पत्थरों को ताज एडवाइजरी कमेटी के विशेषज्ञों के मुताबिक ठीक कराया गया। हाइड्रोलिक लाइम मोर्टार के साथ संगमरमर के पीस लगाए गए। गुंबद की रिसती छत से 15 इंच तक मैटेरियल निकालकर दोबारा कंकर लाइम का प्रयोग कर लगाया गया। उससे पहले 1874 में ब्रिटिश इंजीनियर जे डब्ल्यू एलेक्जेंडर ने 70,926 रुपये में गुंबद का संरक्षण कराया था। 
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ताज के गुंबद पर संरक्षण कार्य
साल    कमियां और संरक्षण
1874    गुंबद के पत्थर, कलश लगाया
1888    गुंबद के कलश की प्रतिकृति बनाई
1899    गुंबद के संगमरमर, काले पत्थर बदले
1941-44    गुंबद की लीकेज, टूटे पत्थर, इनले वर्क
1947-49    गुंबद की चारों छतरियों का संरक्षण
1953    संगमरमर के खुले जोड़ और वाटर प्रूफिंग
1956    चारों छतरियों की लीकेज, टूटे पत्थर बदले
1958    गुंबद के आयरन की जगह कॉपर क्लैंप

‘कमेटी की सिफारिशों के बाद मडपैक मीनारों, आर्च के बाद गुंबद पर लगाया जाएगा। बारिश से गुंबद पर लगी धूल हटती है, लेकिन पीलापन बरकरार है, इसलिए मडपैक लगाना होगा। इससे एकरूपता आ जाएगी।’’
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डा. भुवन विक्रम, अधीक्षण पुरातत्वविद
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