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वो चुनाव, जिसमें वाजपेयी ने जब्त करा ली अपनी जमानत, पर हारकर भी जीता लोगों का दिल

Fri, 15 Mar 2019 04:36 PM IST
Prabudhh Jain पुनीत शर्मा, अमर उजाला, मथुरा
पुनीत शर्मा, अमर उजाला, मथुरा Published by: Prabudhh Jain Updated Fri, 15 Mar 2019 04:36 PM IST
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lok sabha elections 2019 atal bihari vajpayee defeated in the first election from mathura
अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल)
चुनावी मौसम चल रहा है तो उन चुनावों का जिक्र होना भी जरूरी है, जो किसी खास वजह से सियासत के इतिहास में जाने जाते हैं। ऐसा ही चुनाव 1957 में मथुरा सीट से हुआ था। यहां से अटल बिहारी वाजपेयी चुनाव लड़े थे। वो यह हार गए थे, लेकिन उन्होंने मथुरा के लोगों का दिल जीत लिया था। उस चुनाव का जिक्र आज भी यहां के बुजुर्ग करते हैं।  
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मथुरा से अटल बिहारी वाजपेयी के सामने राजा महेंद्रप्रताप सिंह मैदान में थे। अटल ने एक सभा को संबोधित करते हुए लोगों से अपील कर दी थी कि राजा महेंद्रप्रताप सिंह का देश की आजादी में बहुत बड़ा योगदान रहा है। जैसे शख्स की देश को जरूरत है, इसलिए राजा साहब को जिता दो। राजा साहब इस चुनाव को रिकॉर्ड मतों से जीते थे। 
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देश की आजादी के बाद लोकसभा का यह दूसरा चुनाव था। मथुरा से अटल बिहारी वाजपेयी को जनसंघ से प्रत्याशी बनाया गया था। भले ही अटल, राजा महेंद्रप्रताप के समर्थन में अपील कर चुनाव हार गए थे, लेकिन मथुरा वालों का दिल जीत लिया था। 
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बैलगाड़ी से करते थे चुनाव प्रचार

अटल बिहारी वाजपेयी ने बैलगाड़ी पर बैठकर प्रचार किया था। एक दिन में तीन से चार गांव में ही पहुंच पाते थे। जहां भी शाम हो जाती वहीं विश्राम। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अटल के समर्थन में कई सभाएं की थीं। चुनाव में मुकाबला काफी कड़ा था। निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में राजा महेंद्रप्रताप सिंह ने अपने पक्ष में माहौल खड़ा कर लिया था। 

भाजपा के वरिष्ठ नेता बांकेबिहारी माहेश्वरी ने बताया कि मथुरा शहर में वाजपेयी की सभा हो रही थी। यहां उन्होंने कहा था कि राजा महेंद्र प्रताप सिंह का देश की आजादी में बड़ा योगदान रहा है, लिहाजा सभी को चाहिए कि उनका सम्मान किया जाए। मेरी परवाह मत कीजिए आप सभी राजा साहब को जिता दो। देश की संसद को उनकी जरूरत है। 

इस सभा के बाद तो राजा साहब के समर्थन में ही पूरा माहौल बन गया। अटल बिहारी की जमानत मथुरा से जब्त हो गई थी। राजा साहब रिकॉर्ड मतों से विजयी हुए। अटल, मथुरा से चुनाव भले ही हार गए लेकिन उन्होंने लोगों के दिलों को जीत लिया। 

फिर तो उनका मथुरा से ऐसा रिश्ता जुड़ा कि साल में एक दो बार मथुरा आ ही जाते थे। मथुरा में होने वाले कार्यक्रमों में भी वो हिस्सा लिया करते थे। जब वो प्रधानमंत्री बने तब भी मथुरा के लोग उनसे मिलने जाया करते थे।
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