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फतेहपुर सीकरी से रिकॉर्ड मतों से जीते भाजपा के राजकुमार, राजबब्बर को इतने वोटों से हराया

Fri, 24 May 2019 09:10 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 24 May 2019 09:10 AM IST
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Lok Sabha Election Result BJP Candidate Rajkumar Chahar won from fatehpur sikri seat
भाजपा के विजयी प्रत्याशी राजकुमार चाहर, कांग्रेस के राजबब्बर हारे - फोटो : अमर उजाला
पुरानी कहावत है, हम तो डूबेंगे सनम, तुम्हें भी ले डूबेंगे। फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट पर बसपा से जाने अनजाने में कुछ ऐसा ही हो गया। किसे नहीं मालूम था कि बार बार उम्मीदवार बदलने से नुकसान होगा। इसके बावजूद एक नहीं, दो बार उम्मीदवार बदले गए। दूर दूर से प्रत्याशी लाए गए सीकरी के संग्राम में उतारने के लिए। फिर क्या होना था। भाजपा के चाहर सीकरी के राजकुमार बन गए।
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फतेहपुर सीकरी से भाजपा प्रत्याशी राजकुमार चाहर ने करीब 4.91 लाख रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की। राजकुमार को 662794 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी राज बब्बर 170822 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे, वहीं गठबंधन के बसपा प्रत्याशी श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित को 167517 मत प्राप्त हुए। सीकरी से कुल 15 प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे थे।   
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सीकरी में 2014 में भाजपा के चौधरी बाबूलाल जीते थे। इस बार भाजपा ने उनका पत्ता साफ कर दिया। मैदान में उतारा राजकुमार चाहर को। उनकी छवि किसान नेता की है। वो स्थानीय हैं। विधानसभा चुनाव में निर्दलीय लड़कर 60 हजार वोट ला चुके हैं। जाहिर है, उनकी पकड़ भी मजबूत हैं। इतने सारे फैक्टर मिल जाने से चाहर की जीत की उम्मीद ज्यादा थी।
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ऐसे बना जीत का रास्ता

चाहर का मुकाबला उन राज बब्बर से था जिनके पास न केवल ग्लैमर है बल्कि राजनीतिक सूझबूझ भी है। चाहर की राह आसान नहीं थी लेकिन बसपा के उम्मीदवार बदल जाने का फायदा मिल गया। बसपा से पहले सीमा उपाध्याय हटीं तो माहौल बना कि चाहर से मुकाबला आसान नहीं। 

राज बब्बर भी मुरादाबाद चले गए थे। लौटे तो बसपा का उम्मीदवार बदल चुका था। अब राजवीर आ चुके थे दिल्ली से। उनका भी टिकट कटा और आखिर में गुड्डू पंडित को मिला। उनके खिलाफ कई केस हैं। देर से आए और दूर से आए।

नतीजा ब्राह्मण वोट भी भाजपा को चला गया। ठाकुर, जाट, ब्राह्मण, वैश्य, कुशवाहा, इनके वोट बेहद महत्वपूर्ण हैं सीकरी में। चाहर ने इन्हें साध लिया तो रिकार्ड वोट तो मिलने ही थे। गुड्डू पंडित और राज बब्बर को लगभग बराबर वोट मिले हैं।

‘शिष्य’ से चुनाव हार गए राज बब्बर 

राजकुमार चाहर का राजनीतिक जीवन उतारचढ़ाव से भरा हुआ है। 2009 में वो राज बब्बर के साथ थे। लोग कहते थे कि वो राज बब्बर के शिष्य हो गए हैं। उन्होंने सीकरी में ही राज बब्बर को लोकसभा का चुनाव लड़ाया था। वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि अब चाहर ने राज बब्बर को चुनाव हरा दिया।

राजकुमार ने पहला चुनाव 2002 में बसपा के टिकट से विधानसभा का लड़ा। वोट मिले 30970 लेकिन जीत नहीं मिली। 2007 में भाजपा के टिकट से लड़े, इस बार वोट मिले 43407 लेकिन कुछ वोटों से हार गए। 2012 में भाजपा से टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय लडे़, वोट मिले 61568। इस बार भाजपा ने लोकसभा चुनाव में उतारा तो लगभग सात लाख वोट मिल गए और सांसद बन गए।
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