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एक्सक्लूसिव: आगरा में इलाज का 'लॉकडाउन', 54 दिनों में 145 टीबी मरीजों ने दम तोड़ा

Fri, 15 May 2020 09:44 AM IST
Abhishek Saxena देश दीपक तिवारी, अमर उजाला, आगरा
देश दीपक तिवारी, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Fri, 15 May 2020 09:44 AM IST
सार

  • 5817, मरीज निश्चय पोर्टल पर हुए पंजीकृत इस साल पांच माह में
  • 507, मरीजों के ही परिणाम हुए प्राप्त, सिर्फ सात मरीज ठीक हुए

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Lockdown In Treatment 145 TB Patients Dies in 54 Days
एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ताजनगरी में 20 मार्च से 12 मई तक 54 दिनों में क्षय रोग (टीबी) के मरीजों में से 145 ने दम तोड़ दिया। इसकी वजह सही उपचार, परामर्श व समय पर दवाएं नहीं मिलना मानी जा रही है। लॉकडाउन से पहले 1 जनवरी से 19 मार्च तक आगरा में सिर्फ 27 टीबी रोगियों ने दम तोड़ा था। टीबी रोगियों के लिए बने राष्ट्रीय निश्चय पोर्टल की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है।
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इस साल एक जनवरी से 12 मई तक इस पोर्टल पर आगरा में 5,817 टीबी मरीज पंजीकृत हुए। पांच माह बाद भी इनमें से 290 मरीजों का उपचार शुरू नहीं हो सका है। जिनका उपचार शुरू हुआ उनमें से 12 मई तक 507 मरीजों के परिणाम सामने आए हैं।
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सिर्फ सात मरीज पूर्ण रूप से ठीक हुए। 507 में कुल 172 मरीजों की मौत हो गई। इनमें 145 मरीज ऐसे हैं, जिनकी मौत लॉकडाउन के दौरान हुई। 27 मरीजों ने लॉकडाउन लागू होने से पहले 80 दिनों में दम तोड़ा। 123 मरीजों पर प्रथम श्रेणी टीबी दवाएं बेअसर हो गईं। अब इनका उपचार बदलकर बिगड़ी टीबी की दवाओं से किया जा रहा है।
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आगरा में 21 हजार से ज्यादा टीबी मरीज

वर्ष 2019 में आगरा में 21,577 टीबी रोगी पंजीकृत हुए। इनमें 4,325 मरीजों का इलाज चल रहा है। अभी तक 17,244 मरीजों के परिणाम आए हैं। 17,244 में से 841 की मौत हुई। 1909 पूर्ण रूप से ठीक हो गए। 12,335 मरीजों ने टीबी का कोर्स पूरा किया और 670 मरीजों पर दवाएं बेअसर होने के बाद इनके उपचार की श्रेणी बदली गई। 74 मरीजों पर उपचार कारगर नहीं रहा, 870 ने इलाज छोड़ दिया जबकि अन्य मरीजों के बारे में पूर्ण रिपोर्ट नहीं आई।

'गंभीर मामला है, रिपोर्ट मांगी है'

जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने कहा कि इतनी मौतें होना गंभीर है। टीबी रोगियों को उपचार मिलेगा। दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। एडीएम सिटी से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है।

ओपीडी बंद होने से दिक्कत

जिला टीबी अधिकारी डॉ. यूबी सिंह ने बताया कि टीबी रोगियों की इम्यूनिटी कम होती है। कोविड में पूरे स्टाफ की ड्यूटी लगी है। दवाएं तो पहुंचा रहे हैं लेकिन ओपीडी बंद हैं, इस कारण मरीजों को दिक्कतें हो रही हैं। 


एमडीआर की स्थिति चिंताजनक


एसएन मेडिकल कॉलेज के टीबी विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि ओपीडी बंद हैं। फिर भी गंभीर टीबी मरीजों को भर्ती कर उन्हें उपचार दिलाया जा रहा है। एमडीआर श्रेणी के मरीजों की स्थिति चिंताजनक होती है।

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