एक्सक्लूसिव: आगरा में इलाज का 'लॉकडाउन', 54 दिनों में 145 टीबी मरीजों ने दम तोड़ा
- 5817, मरीज निश्चय पोर्टल पर हुए पंजीकृत इस साल पांच माह में
- 507, मरीजों के ही परिणाम हुए प्राप्त, सिर्फ सात मरीज ठीक हुए
विस्तार
इस साल एक जनवरी से 12 मई तक इस पोर्टल पर आगरा में 5,817 टीबी मरीज पंजीकृत हुए। पांच माह बाद भी इनमें से 290 मरीजों का उपचार शुरू नहीं हो सका है। जिनका उपचार शुरू हुआ उनमें से 12 मई तक 507 मरीजों के परिणाम सामने आए हैं।
सिर्फ सात मरीज पूर्ण रूप से ठीक हुए। 507 में कुल 172 मरीजों की मौत हो गई। इनमें 145 मरीज ऐसे हैं, जिनकी मौत लॉकडाउन के दौरान हुई। 27 मरीजों ने लॉकडाउन लागू होने से पहले 80 दिनों में दम तोड़ा। 123 मरीजों पर प्रथम श्रेणी टीबी दवाएं बेअसर हो गईं। अब इनका उपचार बदलकर बिगड़ी टीबी की दवाओं से किया जा रहा है।
आगरा में 21 हजार से ज्यादा टीबी मरीज
'गंभीर मामला है, रिपोर्ट मांगी है'
जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने कहा कि इतनी मौतें होना गंभीर है। टीबी रोगियों को उपचार मिलेगा। दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। एडीएम सिटी से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है।
ओपीडी बंद होने से दिक्कत
जिला टीबी अधिकारी डॉ. यूबी सिंह ने बताया कि टीबी रोगियों की इम्यूनिटी कम होती है। कोविड में पूरे स्टाफ की ड्यूटी लगी है। दवाएं तो पहुंचा रहे हैं लेकिन ओपीडी बंद हैं, इस कारण मरीजों को दिक्कतें हो रही हैं।
एमडीआर की स्थिति चिंताजनक
एसएन मेडिकल कॉलेज के टीबी विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि ओपीडी बंद हैं। फिर भी गंभीर टीबी मरीजों को भर्ती कर उन्हें उपचार दिलाया जा रहा है। एमडीआर श्रेणी के मरीजों की स्थिति चिंताजनक होती है।