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लॉकडाउनः निजी नर्सिंग होम बंद, सरकारी अस्पताल में गूंजी 521 बच्चों की किलकारियां
Fri, 08 May 2020 12:08 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 08 May 2020 12:08 AM IST
सार
25 मार्च से सात मई तक 521 में बच्चों ने जन्म लिया
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विस्तार
फिरोजाबाद में कोरोना वायरस के बीच सैकड़ों घरों में किलकारियां गूंजी। लॉकडाउन के बीच सौ शैय्या अस्पताल में 521 बच्चों ने जन्म लिया। जिसमें से अधिकतर बच्चे सामान्य प्रसव से पैदा हुए हैं।
लॉकडाउन में कोरोना संक्रमण के डर से निजी अस्पताल डिलीवरी केस नहीं ले रहे हैं तो सरकारी अस्पतालों में प्रसव की संख्या बढ़ गई है। लॉकडाउन में अधिकतर निजी नर्सिंग होम बंद हैं जिसके कारण प्रसूताएं सीधे सरकारी अस्पताल की ओर रुख कर रही हैं।
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए चिकित्सक सामान्य प्रसव पर जोर दे रहे हैं। सौ शैय्या अस्पताल में हर माह औसतन 150 से 170 बच्चे जन्म लेते हैं। वहीं 80 से 90 बच्चे ही सामान्य प्रसव से होते थे। मातृ-शिशु अस्पताल में 25 मार्च से सात मई तक 521 में बच्चों ने जन्म लिया है। सामान्य डिलीवरी का आंकड़ा 500 है। जबकि 21 ऑपरेशन हुए हैं।
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लॉकडाउन में कोरोना संक्रमण के डर से निजी अस्पताल डिलीवरी केस नहीं ले रहे हैं तो सरकारी अस्पतालों में प्रसव की संख्या बढ़ गई है। लॉकडाउन में अधिकतर निजी नर्सिंग होम बंद हैं जिसके कारण प्रसूताएं सीधे सरकारी अस्पताल की ओर रुख कर रही हैं।
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कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए चिकित्सक सामान्य प्रसव पर जोर दे रहे हैं। सौ शैय्या अस्पताल में हर माह औसतन 150 से 170 बच्चे जन्म लेते हैं। वहीं 80 से 90 बच्चे ही सामान्य प्रसव से होते थे। मातृ-शिशु अस्पताल में 25 मार्च से सात मई तक 521 में बच्चों ने जन्म लिया है। सामान्य डिलीवरी का आंकड़ा 500 है। जबकि 21 ऑपरेशन हुए हैं।
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ऑपरेशन के पहले स्क्रीनिंग
कोरोना वायरस के कारण प्रसव से पूर्व प्रसूता की थर्मल स्क्रीनिंग भी की जा रही है। कोरोना से संबंधित लक्षण दिखने पर कोविड-19 की जांच कराने की भी व्यवस्था की गई है। साथ ही उन्हें जागरूक भी किया जा रहा है। सर्दी, खांसी व जुकाम की शिकायत पर तुरंत जांच कराने की सलाह दी जा रही है। सिजेरियन ऑपरेशन करने से पहले डॉक्टर डाटा भी तैयार कर रहे हैं।
प्रसूताओं को मास्क पहनना अनिवार्य
प्रसूताओं को मास्क पहनना अनिवार्य है। प्रसूता खुद को और बच्चे का संक्रमण से बचाने के लिए मास्क पहन रही हैं। ऑपरेशन कक्ष में जाने के पहले प्रसूताओं को बकायदा मास्क पहनाया जाता है। परिवार के सदस्यों को कम से कम अस्पताल आने की सलाह दी जा रही है।
कोरोना वायरस को लेकर विभाग एहतियात बरतता जा रहा है। लॉकडाउन की अवधि में नार्मल डिलीवरी काफी हुई है। संदिग्ध मरीजों के लिए अलग से ओटी की व्यवस्था है। कोरोना पॉजिटिव प्रसूताओं के लिए भी अस्पताल में डिलीवरी की व्यवस्था करा रहे हैं। डॉ. संगीता अनेजा, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
कोरोना वायरस के कारण प्रसव से पूर्व प्रसूता की थर्मल स्क्रीनिंग भी की जा रही है। कोरोना से संबंधित लक्षण दिखने पर कोविड-19 की जांच कराने की भी व्यवस्था की गई है। साथ ही उन्हें जागरूक भी किया जा रहा है। सर्दी, खांसी व जुकाम की शिकायत पर तुरंत जांच कराने की सलाह दी जा रही है। सिजेरियन ऑपरेशन करने से पहले डॉक्टर डाटा भी तैयार कर रहे हैं।
प्रसूताओं को मास्क पहनना अनिवार्य
प्रसूताओं को मास्क पहनना अनिवार्य है। प्रसूता खुद को और बच्चे का संक्रमण से बचाने के लिए मास्क पहन रही हैं। ऑपरेशन कक्ष में जाने के पहले प्रसूताओं को बकायदा मास्क पहनाया जाता है। परिवार के सदस्यों को कम से कम अस्पताल आने की सलाह दी जा रही है।
कोरोना वायरस को लेकर विभाग एहतियात बरतता जा रहा है। लॉकडाउन की अवधि में नार्मल डिलीवरी काफी हुई है। संदिग्ध मरीजों के लिए अलग से ओटी की व्यवस्था है। कोरोना पॉजिटिव प्रसूताओं के लिए भी अस्पताल में डिलीवरी की व्यवस्था करा रहे हैं। डॉ. संगीता अनेजा, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज