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लखनऊ से दिल्ली के बीच छह टोल प्लाजा
लखनऊ से दिल्ली के बीच छह टोल प्लाजा
Updated Sat, 24 Dec 2016 01:26 AM IST
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लखनऊ से दिल्ली के बीच छह टोल प्लाजा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सूबे की राजधानी से देश की राजधानी तक की राह में छह टोल मिलेंगे। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे और यमुना एक्सप्रेस वे से होकर गुजरने वाले वाहनों को आगरा में इनर रिंग रोड पर यात्रा करने का टैक्स भी चुकाना होगा। फिलहाल एक्सप्रेस वे और इनर रिंग रोड पर मुफ्त की सवारी की जा सकती है। दरअसल सरकार ने अभी तक दोनों ही मार्गों पर टोल की दरें घोषित नहीं की हैं।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेेस वे से आगरा से लखनऊ की दूरी करीब 302 किलोमीटर रह जाएगी। सिक्स लेन एक्सप्रेस वे पर यह दूरी करीब 3.30 घंटे में तय की जा सकेगी। लखनऊ एक्सप्रेस वे पर दो बार टोल प्लाजा आएंगे। पहला टोल प्लाजा आगरा से निकलते ही करीब 21 किलोमीटर दूरी पर प्रतापपुर गांव के पास मिलेगा, जबकि दूसरा टोल प्लाजा लखनऊ के पास करीब 280 किलोमीटर पर बनाया गया है। दिल्ली से लखनऊ आने जाने वाले को इनर रिंग का टोल भी चुकाना होगा। इनर रिंग रोड का निर्माण आगरा विकास प्राधिकरण ने किया है। इसके बाद यमुना एक्सप्रेस वे पर खंदौली, मथुरा और जेवर पर टोल टैक्स अदा करना होगा। इनर रिंग रोड पर अभी टोल प्लाजा का काम पूरा नहीं हुआ है। एडीए के अधिकारियों का कहना है कि इनर रिंग रोड के दूसरे चरण का निर्माण होने के बाद टोल वसूल किया जाएगा। उधर आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर सरकार ने टोल वसूलने की तिथि का एलान नहीं किया है।
टायर फटने की घटनाएं होंगी कम
आगरा। यमुना एक्सप्रेस वे पर वाहनों के टायर फटने घटनाएं होती हैं। इसकी वजह से कई बड़े हादसे हो चुके हैं। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे का सफर यमुना एक्सप्रेस वे के सफर से अधिक सुरक्षित होगा। बिटुमिन की सड़क होने के कारण टायरों के फटने की घटनाएं कम होंगी।
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विशेषज्ञों का कहना है कि यमुना एक्सप्रेस वे की सड़क कंकरीट की बनी है। घर्षण की वजह से टायर अधिक गरम हो जाते हैं। इसकी वजह से टायर फटने की घटनाएं अधिक होती हैं। वहीं आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे की सड़क बिटुमिन (डामर) से बनी है। टायरों के घर्षण सड़क और टायर गरम होते हैं लेकिन डामर की वजह से एक लेयर बन जाती है। इससे टायरों में गिट्टियां चुभने की संभावना कम रहती है और टायर कम फटते हैं। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस को फिलहाल सिक्स लेन बनाया गया है। भविष्य में इसे आठ लेन बनाया जा सकता है। कार्यदाई संस्थाओं ने जो पुल बनाएं वे आठ लेन के हिसाब से ही बनाए हैं। जानवरों को रोकने से लिए तारों की फेंसिंग की गई है। अधिकांश फेंसिंग काम पूरा हो चुका है।
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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेेस वे से आगरा से लखनऊ की दूरी करीब 302 किलोमीटर रह जाएगी। सिक्स लेन एक्सप्रेस वे पर यह दूरी करीब 3.30 घंटे में तय की जा सकेगी। लखनऊ एक्सप्रेस वे पर दो बार टोल प्लाजा आएंगे। पहला टोल प्लाजा आगरा से निकलते ही करीब 21 किलोमीटर दूरी पर प्रतापपुर गांव के पास मिलेगा, जबकि दूसरा टोल प्लाजा लखनऊ के पास करीब 280 किलोमीटर पर बनाया गया है। दिल्ली से लखनऊ आने जाने वाले को इनर रिंग का टोल भी चुकाना होगा। इनर रिंग रोड का निर्माण आगरा विकास प्राधिकरण ने किया है। इसके बाद यमुना एक्सप्रेस वे पर खंदौली, मथुरा और जेवर पर टोल टैक्स अदा करना होगा। इनर रिंग रोड पर अभी टोल प्लाजा का काम पूरा नहीं हुआ है। एडीए के अधिकारियों का कहना है कि इनर रिंग रोड के दूसरे चरण का निर्माण होने के बाद टोल वसूल किया जाएगा। उधर आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर सरकार ने टोल वसूलने की तिथि का एलान नहीं किया है।
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टायर फटने की घटनाएं होंगी कम
आगरा। यमुना एक्सप्रेस वे पर वाहनों के टायर फटने घटनाएं होती हैं। इसकी वजह से कई बड़े हादसे हो चुके हैं। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे का सफर यमुना एक्सप्रेस वे के सफर से अधिक सुरक्षित होगा। बिटुमिन की सड़क होने के कारण टायरों के फटने की घटनाएं कम होंगी।
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विशेषज्ञों का कहना है कि यमुना एक्सप्रेस वे की सड़क कंकरीट की बनी है। घर्षण की वजह से टायर अधिक गरम हो जाते हैं। इसकी वजह से टायर फटने की घटनाएं अधिक होती हैं। वहीं आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे की सड़क बिटुमिन (डामर) से बनी है। टायरों के घर्षण सड़क और टायर गरम होते हैं लेकिन डामर की वजह से एक लेयर बन जाती है। इससे टायरों में गिट्टियां चुभने की संभावना कम रहती है और टायर कम फटते हैं। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस को फिलहाल सिक्स लेन बनाया गया है। भविष्य में इसे आठ लेन बनाया जा सकता है। कार्यदाई संस्थाओं ने जो पुल बनाएं वे आठ लेन के हिसाब से ही बनाए हैं। जानवरों को रोकने से लिए तारों की फेंसिंग की गई है। अधिकांश फेंसिंग काम पूरा हो चुका है।