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अंतरात्मा को झकझोर गया ‘किस्सा मौजपुर का’
ब्यूरो अमर उजाला आगरा।
Updated Fri, 26 Jun 2015 02:17 AM IST
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ये किस्सा मौजपुर का’ जरूर था, लेकिन देश के हर गांव, गली, शहर की यही कहानी है। झूठी शान और दहेज के डर से लोग बेटियों को गर्भ में बेशक मार रहे हैं, लेकिन वह असल में अपने ही बेटों का भविष्य खराब कर रहे हैं। अंतरात्मा को झकझोरते हुए हास्य नाटक ‘किस्सा मौजपुर का’ यही संदेश सभी को दे गया। गुरुवार शाम को कलाकृति ऑडिटोरियम में नेशनल चेंबर द्वारा आयोजित नाटक के जरिए रंगभूमि दिल्ली के कलाकारों ने समाज को आईना भी दिखाया।
फतेहाबाद रोड स्थित कलाकृति ऑडिटोरियम में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के संदेश को लेकर हास्य नाटक का मंचन किया गया। देश के दर्जनों शहरों में 52 मंचीय प्रस्तुति दे चुकी रंगभूमि दिल्ली के 28 कलाकारों की टीम ने कन्या भ्रूण हत्या से पनप रही सामाजिक बुराईयों को मौजपुर गांव के जरिए दिखाया। इस गांव में बेटियां नहीं हैं और बेटों की शादी के लिए उन्हीं लोगों को पापड़ बेलने पड़ते हैं, जिन्होंने बेटी की शादी में सिर झुकने और रुपये खर्च होने का तर्क दिया था। नाटक के अंत में बेटों की शादी के लिए बेटी के पिता की हर शर्त मानने की मजबूरी भविष्य दिखा गई कि बेटियां नहीं होंगी तो बेटों के लिए बहू लाने में दहेज देना होगा और लड़की घोड़े पर बैठकर बारात लेकर आएगी। बहू नहीं, बल्कि बेटा घर से विदा होगा। कोख में बेटियों को मार देने की प्रवृत्ति से सामाजिक तानाबाना टूट जाने को हास्य के जरिए दिखाया गया।
इससे पहले नाटक का शुभारंभ कमिश्नर प्रदीप भटनागर, आयकर आयुक्त द्वय अनिरुद्ध कुमार, डीपी सेमवाल, कमिश्नर सेंट्रल एक्साइज एंड कस्टम्स मनीष कुमार, डीएम पंकज कुमार, एडीए उपाध्यक्ष मनीषा त्रिघाटिया ने किया। मंचन के दौरान सांसद चौ. बाबूलाल, अध्यक्ष भुवेश अग्रवाल, केके पालीवाल, राजेश गोयल, अवनीश कौशल, संजय गोयल, सतीश चंद्र गुप्ता, सोहन लाल जैन, एसपी फरसैया, योगेंद्र सिंघल, अतुल गुप्ता, पूरन डावर, डा. एमसी गुप्ता समेत शहर के 500 लोगों की मौजूदगी रही।
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नाटक में पर्दे के पीछे ये
किस्सा मौजपुर की निर्देशक चित्रा सिंह थीं, जबकि लेखक जयवर्धन। सेट डिजायनर वेद पाहूजा, लाइट डिजायनर आरके धींगरा थे। निर्देशक चित्रा सिंह भारतेंदु नाट्य अकादमी, भारत भवन मंडल और श्रीराम कल्चरल सेंटर से जुड़ी रही हैं।
आगरा-मथुरा ही असल में ‘मौजपुर’
देश में हरियाणा के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश खासकर आगरा मथुरा में कन्या भ्रूण हत्या का ग्राफ ज्यादा है। यह आंकड़े देते हुए कमिश्नर प्रदीप भटनागर ने कहा कि कोख में बेटियों को मार देने के खिलाफ अनवरत जागरूकता अभियान की जरूरत है। आयकर आयुक्त अनिरुद्ध कुमार ने भी कहा कि ऐसे नाटकों के जरिए लोगों को जगाते रहने चाहिए।
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फतेहाबाद रोड स्थित कलाकृति ऑडिटोरियम में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के संदेश को लेकर हास्य नाटक का मंचन किया गया। देश के दर्जनों शहरों में 52 मंचीय प्रस्तुति दे चुकी रंगभूमि दिल्ली के 28 कलाकारों की टीम ने कन्या भ्रूण हत्या से पनप रही सामाजिक बुराईयों को मौजपुर गांव के जरिए दिखाया। इस गांव में बेटियां नहीं हैं और बेटों की शादी के लिए उन्हीं लोगों को पापड़ बेलने पड़ते हैं, जिन्होंने बेटी की शादी में सिर झुकने और रुपये खर्च होने का तर्क दिया था। नाटक के अंत में बेटों की शादी के लिए बेटी के पिता की हर शर्त मानने की मजबूरी भविष्य दिखा गई कि बेटियां नहीं होंगी तो बेटों के लिए बहू लाने में दहेज देना होगा और लड़की घोड़े पर बैठकर बारात लेकर आएगी। बहू नहीं, बल्कि बेटा घर से विदा होगा। कोख में बेटियों को मार देने की प्रवृत्ति से सामाजिक तानाबाना टूट जाने को हास्य के जरिए दिखाया गया।
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इससे पहले नाटक का शुभारंभ कमिश्नर प्रदीप भटनागर, आयकर आयुक्त द्वय अनिरुद्ध कुमार, डीपी सेमवाल, कमिश्नर सेंट्रल एक्साइज एंड कस्टम्स मनीष कुमार, डीएम पंकज कुमार, एडीए उपाध्यक्ष मनीषा त्रिघाटिया ने किया। मंचन के दौरान सांसद चौ. बाबूलाल, अध्यक्ष भुवेश अग्रवाल, केके पालीवाल, राजेश गोयल, अवनीश कौशल, संजय गोयल, सतीश चंद्र गुप्ता, सोहन लाल जैन, एसपी फरसैया, योगेंद्र सिंघल, अतुल गुप्ता, पूरन डावर, डा. एमसी गुप्ता समेत शहर के 500 लोगों की मौजूदगी रही।
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नाटक में पर्दे के पीछे ये
किस्सा मौजपुर की निर्देशक चित्रा सिंह थीं, जबकि लेखक जयवर्धन। सेट डिजायनर वेद पाहूजा, लाइट डिजायनर आरके धींगरा थे। निर्देशक चित्रा सिंह भारतेंदु नाट्य अकादमी, भारत भवन मंडल और श्रीराम कल्चरल सेंटर से जुड़ी रही हैं।
आगरा-मथुरा ही असल में ‘मौजपुर’
देश में हरियाणा के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश खासकर आगरा मथुरा में कन्या भ्रूण हत्या का ग्राफ ज्यादा है। यह आंकड़े देते हुए कमिश्नर प्रदीप भटनागर ने कहा कि कोख में बेटियों को मार देने के खिलाफ अनवरत जागरूकता अभियान की जरूरत है। आयकर आयुक्त अनिरुद्ध कुमार ने भी कहा कि ऐसे नाटकों के जरिए लोगों को जगाते रहने चाहिए।