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जंग में मैनपुरी ने दिल खोल कर निभाया संग
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शहर के लेनगंज में बंद बाजार
- फोटो : MAINPURI
मैनपुरी। कोरोना से जंग में मैनपुरी ने दिल खोलकर साथ निभाया। प्रधानमंत्री के जनता कर्फ्यू के आह्वान पर मैनपुरी के लोगों ने भी संयम के साथ घर पर रहने का संकल्प लिया। यही कारण रहा कि जिलेभर में जनता कर्फ्यू का ऐतिहासिक असर देखने को मिला। 14 घंटे तक 21 लाख लोग अपने घरों में रहे।
भारत में कोरोना वायरस को महामारी घोषित किया जा रहा है। केंद्र और प्रदेश सरकारें इससे निपटने के लिए काम कर रही हैं। जनता भी शासन-प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। रविवार को जनता कर्फ्यू का जिलेभर में शत-प्रतिशत पालन हुआ। शहर से लेकर कस्बों और गांवों में लोग घर में ही रहे। चाय के खोखों से लेकर पान की दुकानों पर ताले लटकते नजर आए। जिन बाजारों में रोजाना हजारों लोगों की भीड़ रहती थी, वहां सन्नाटा छाया रहा। सड़कें वीरान पड़ी रहीं। जनता कर्फ्यू में सहयोग लोगों ने अपनी मर्जी से किया।
सुरक्षा की दृष्टि से शहर से लेकर कस्बों में पुलिस फोर्स तैनात किया था। खुद जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह, एसपी अजय कुमार, एडीएम बी राम, एएसपी ओमप्रकाश सिंह जिलेभर में भ्रमण करते रहे। अधिकारी जनता को सहयोग के लिए धन्यवाद देते रहे। साथ ही शहर में एसडीएम रजनीकांत, सीओ सिटी अभयनरायन राय पुलिस फोर्स के साथ गश्त पर रहे।
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भोगांव में एसडीएम सुधीर कुमार, सीओ प्रयांक जैन, इंस्पेक्टर पहुप सिंह क्षेत्र में गश्त करते रहे। किशनी में एसडीएम रामसकल मौर्य, थानाध्यक्ष ओमहरि वाजपेयी गश्त पर रहे। इसी तरह करहल में एसडीएम रतन कुमार वर्मा थाना पुलिस के साथ भ्रमण पर रहे। घिरोर, बेवर, कुरावली, कुसमरा, आलीपुर खेड़ा आदि कस्बों में अधिकारी और थाना पुलिस भ्रमण पर रही। पुलिस की गश्त सिर्फ और सिर्फ सुरक्षा को लेकर थी।
खूब बजीं तालियां, घंटा और शंख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से आह्वान किया था कि वह 22 मार्च को चिकित्सकों, पुलिसकर्मियों सहित ऐसे लोगों के सम्मान में ताली, थाली और घंटी बजाएं, जो जनहित में कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री की इस अपील का भी जिलेभर में असर देखने को मिला। घड़ी में शाम के पांच बजते ही पूरा जिला तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज हुआ। अपने दरवाजों और खिड़कियों के पास खड़े होकर लोगों ने तालियों के साथ ही घंटा, थाली, शंख बजाए। ------
पहले नहीं हुई ऐसी बंदी
मैनपुरी में जनता कर्फ्यू ऐतिहासिक रहा। बाजार पूरी तरह से बंद रहे। पुरानी मैनपुरी निवासी 76 वर्षीय मालती शर्मा ने कहा कि इस तरह की बंदी उन्होंने अपने जीवन में नहीं देखी। यह पहला मौका था जब जनता ने स्वेच्छा से कर्फ्यू लगाया। दुकानदारों ने स्वेच्छा से दुकानों को बंद रखा।
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भारत में कोरोना वायरस को महामारी घोषित किया जा रहा है। केंद्र और प्रदेश सरकारें इससे निपटने के लिए काम कर रही हैं। जनता भी शासन-प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। रविवार को जनता कर्फ्यू का जिलेभर में शत-प्रतिशत पालन हुआ। शहर से लेकर कस्बों और गांवों में लोग घर में ही रहे। चाय के खोखों से लेकर पान की दुकानों पर ताले लटकते नजर आए। जिन बाजारों में रोजाना हजारों लोगों की भीड़ रहती थी, वहां सन्नाटा छाया रहा। सड़कें वीरान पड़ी रहीं। जनता कर्फ्यू में सहयोग लोगों ने अपनी मर्जी से किया।
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सुरक्षा की दृष्टि से शहर से लेकर कस्बों में पुलिस फोर्स तैनात किया था। खुद जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह, एसपी अजय कुमार, एडीएम बी राम, एएसपी ओमप्रकाश सिंह जिलेभर में भ्रमण करते रहे। अधिकारी जनता को सहयोग के लिए धन्यवाद देते रहे। साथ ही शहर में एसडीएम रजनीकांत, सीओ सिटी अभयनरायन राय पुलिस फोर्स के साथ गश्त पर रहे।
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भोगांव में एसडीएम सुधीर कुमार, सीओ प्रयांक जैन, इंस्पेक्टर पहुप सिंह क्षेत्र में गश्त करते रहे। किशनी में एसडीएम रामसकल मौर्य, थानाध्यक्ष ओमहरि वाजपेयी गश्त पर रहे। इसी तरह करहल में एसडीएम रतन कुमार वर्मा थाना पुलिस के साथ भ्रमण पर रहे। घिरोर, बेवर, कुरावली, कुसमरा, आलीपुर खेड़ा आदि कस्बों में अधिकारी और थाना पुलिस भ्रमण पर रही। पुलिस की गश्त सिर्फ और सिर्फ सुरक्षा को लेकर थी।
खूब बजीं तालियां, घंटा और शंख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से आह्वान किया था कि वह 22 मार्च को चिकित्सकों, पुलिसकर्मियों सहित ऐसे लोगों के सम्मान में ताली, थाली और घंटी बजाएं, जो जनहित में कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री की इस अपील का भी जिलेभर में असर देखने को मिला। घड़ी में शाम के पांच बजते ही पूरा जिला तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज हुआ। अपने दरवाजों और खिड़कियों के पास खड़े होकर लोगों ने तालियों के साथ ही घंटा, थाली, शंख बजाए। ------
पहले नहीं हुई ऐसी बंदी
मैनपुरी में जनता कर्फ्यू ऐतिहासिक रहा। बाजार पूरी तरह से बंद रहे। पुरानी मैनपुरी निवासी 76 वर्षीय मालती शर्मा ने कहा कि इस तरह की बंदी उन्होंने अपने जीवन में नहीं देखी। यह पहला मौका था जब जनता ने स्वेच्छा से कर्फ्यू लगाया। दुकानदारों ने स्वेच्छा से दुकानों को बंद रखा।