{"_id":"5d5d44d68ebc3e6c1b288c85","slug":"janmashtami-2019-celebration-in-gokul-live-news","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"जन्माष्टमीः गोकुल में बज उठी शहनाई, आ रहे हैं कृष्ण कन्हाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जन्माष्टमीः गोकुल में बज उठी शहनाई, आ रहे हैं कृष्ण कन्हाई
Thu, 22 Aug 2019 04:49 AM IST
Abhishek Saxena
पुनीत शर्मा, अमर उजाला, मथुरा
पुनीत शर्मा, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 22 Aug 2019 04:49 AM IST
विज्ञापन
गोकुल में उखल बंधन में बंधे भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूं तो पूरे ब्रज में ही जन्माष्टमी की धूम है। हर कोई कान्हा के रंग में रंगा हुआ नजर आ रहा है। क्या मथुरा, क्या वृंदावन। हर तरफ राधे-राधे की गूंज सुनाई दे रही है। कान्हा के भजनों पर लोग झूम रहे हैं।
गोकुल तो इन दिनों अपने कन्हैया का इंतजार बड़ी बेसब्री से कर रहा है। हर घर सज गया है। शहनाई बजने लगी है। रंगाई-पुताई हो गई है। महमानों का न्योता चला गया है। यहां जन्मोत्सव के साथ ही नंदोत्सव की भी तैयारियां चल रही हैं।
मथुरा से बारह किलोमीटर दूर बसा है कान्हा का गांव गोकुल। गोकुल में प्रवेश करते ही जगह-जगह कान्हा के भजन सुनाई देते हैं। कुंज गलियों वाले इस कस्बे में कान्हा के जयकारे गूंज रहे हैं। क्योंकि जन्माष्टमी का मौका है लिहाजा श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
गोकुल तो इन दिनों अपने कन्हैया का इंतजार बड़ी बेसब्री से कर रहा है। हर घर सज गया है। शहनाई बजने लगी है। रंगाई-पुताई हो गई है। महमानों का न्योता चला गया है। यहां जन्मोत्सव के साथ ही नंदोत्सव की भी तैयारियां चल रही हैं।
विज्ञापन
मथुरा से बारह किलोमीटर दूर बसा है कान्हा का गांव गोकुल। गोकुल में प्रवेश करते ही जगह-जगह कान्हा के भजन सुनाई देते हैं। कुंज गलियों वाले इस कस्बे में कान्हा के जयकारे गूंज रहे हैं। क्योंकि जन्माष्टमी का मौका है लिहाजा श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
जन्मोत्सव के साथ नंदोत्सव की जानकारी देते गोकुल के पुजारी
- फोटो : अमर उजाला
गोकुल निवासी सुरेश आचार्य कहते हैं कि 24 को जन्माष्टमी और 25 को नंदोत्सव मनाया जाएगा। इसी की तैयारी में पूरा गोकुल लगा है। तैयारी हो भी क्यों नहीं, हमारा कान्हा जो आ रहा है। घर घर में पकवान बनेंगे। जन्माष्टमी के अगले दिन नंदोत्सव मनाया जाएगा। नंदोत्सव में कान्हा के जन्म की खुशी में खूब उपहार लुटाए जाएंगे।
परमानंद शर्मा का कहना है कि बाल्यकाल की जो भी लीलाएं हुईं हैं वह सब कान्हा ने गोकुल में ही की हैं। राक्षसों का वध यहीं किया था। पूतना का भी वध यहीं किया गया था। चंद्रकांत भंडारी का कहना है कि हर तरफ कान्हा की भक्ति की बहार है। गोकुल पर तो भगवान की हमेशा कृपा रहती है। कृपा हो भी क्यों नहीं, आखिर यह कान्हा ही तो गांव है।
विपिन गुप्ता का कहना है कि जन्माष्टमी से लेकर नंदोत्सव तक गोकुल में जश्न रहेगा। नंदभवन समिति के मैनेजर गिरधारी भाटिया ने बताया कि नंदोत्सव में पूरा गोकुल शामिल होगा। नंद चौक पर भव्य आयोजन किया जाता है।
परमानंद शर्मा का कहना है कि बाल्यकाल की जो भी लीलाएं हुईं हैं वह सब कान्हा ने गोकुल में ही की हैं। राक्षसों का वध यहीं किया था। पूतना का भी वध यहीं किया गया था। चंद्रकांत भंडारी का कहना है कि हर तरफ कान्हा की भक्ति की बहार है। गोकुल पर तो भगवान की हमेशा कृपा रहती है। कृपा हो भी क्यों नहीं, आखिर यह कान्हा ही तो गांव है।
विपिन गुप्ता का कहना है कि जन्माष्टमी से लेकर नंदोत्सव तक गोकुल में जश्न रहेगा। नंदभवन समिति के मैनेजर गिरधारी भाटिया ने बताया कि नंदोत्सव में पूरा गोकुल शामिल होगा। नंद चौक पर भव्य आयोजन किया जाता है।
जब मां यशोदा भूल गईं थीं छटी पूजना
उस वक्त कंस के राक्षसों का खौफ हर तरफ था। अपनी मौत की खबर सुनकर मामा कंस ने पूतना को गोकुल में सभी बालकों को मारने के लिए भेजा था। पूतना के कारण पूरा गोकुल खौफ में था। स्थिति यह रही कि यशोदा मैया अपने लाल की छटी पूजना ही भूल गईं थीं।
जब अगले साल कन्हैया का जन्मदिवस आया तो यशोदा ने सभी के घर बुलावा भेजा। पूरे उत्साह के साथ जन्मोत्सव मनाया जाना था। तब कुछ महिलाओं ने कहा कि कान्हा की छटी तो हुई ही नहीं फिर हम कैसे आ सकते हैं।
इस पर जन्मदिवस से एक दिन पहले कान्हा की छटी पूजी गई थी। लिहाजा आज भी जन्म से एक दिन पहले ही गोकुल में कान्हा की छटी पूजी जाती है। भागवताचार्य सुरेश आचार्य ने बताया कि 23 को छटी पूजी जाएगी।
उस वक्त कंस के राक्षसों का खौफ हर तरफ था। अपनी मौत की खबर सुनकर मामा कंस ने पूतना को गोकुल में सभी बालकों को मारने के लिए भेजा था। पूतना के कारण पूरा गोकुल खौफ में था। स्थिति यह रही कि यशोदा मैया अपने लाल की छटी पूजना ही भूल गईं थीं।
जब अगले साल कन्हैया का जन्मदिवस आया तो यशोदा ने सभी के घर बुलावा भेजा। पूरे उत्साह के साथ जन्मोत्सव मनाया जाना था। तब कुछ महिलाओं ने कहा कि कान्हा की छटी तो हुई ही नहीं फिर हम कैसे आ सकते हैं।
इस पर जन्मदिवस से एक दिन पहले कान्हा की छटी पूजी गई थी। लिहाजा आज भी जन्म से एक दिन पहले ही गोकुल में कान्हा की छटी पूजी जाती है। भागवताचार्य सुरेश आचार्य ने बताया कि 23 को छटी पूजी जाएगी।