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Independence Day 2020 : विद्यावती के तेवर देख कांप गई थी गोरों की पलटन, पारना के किले पर फहराया था तिरंगा
Sat, 15 Aug 2020 12:03 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 15 Aug 2020 12:03 AM IST
सार
- विद्यावती ने जिस किले पर फरहाया था तिरंगा, खंडहर में तब्दील हो गया है वो किला
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खंडहर हुआ पारना का किला
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान आगरा के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों को लोहे के चने चबा दिए थे। स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं ने भी अहम योगदान दिया। दमन चक्र (1930) के विरोध में पारना गांव की विद्यावती राठौर घोडे़ पर चढ़कर गोरों की पलटन के सामने चट्टान की तरह खड़ी हो गईं थीं।
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उनके तेवर देख दुश्मन सेना कांप गई। गिरफ्तारी तक मैदान में वो झुकी नहीं। तीन बार जेल जाने के बाद भी उनका जुनून कम नहीं हुआ था। अफसोस इस बात का है कि आजादी के बाद उन्होंने पारना के जिस किले पर शान से तिरंगा फहराया था, वो खंडहर में तब्दील हो गया है।
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नमक सत्याग्रह (1930) के दौरान पारना गांव की विद्यावती के तेवर देख सत्याग्रही उन्हें झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का अवतार मानने लगे थे। किरावली के सत्याग्रहियों पर अत्याचार का जवाब देने को वो क्रांतिकारियों के महिला दल के साथ गोरों की पलटन के सामने घोडे़ पर सवार होकर आ डटीं।
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उनके तेवर देख गोरों की पलटन कांप गई। उनको बंदी बना लिया गया। देश आजाद हुआ तो क्रांति की गतिविधियों का केंद्र रहे पारना गांव के किले पर विद्यावती ने तिरंगा फहराया। वो किला अब खंडहर में तब्दील हो गया है। किले के पास बने मंदिर के अवशेष बचे हैं। वीरांगना के क्रांति इतिहास पर धूल की परत जमी है।
वीरांगना के पूरे परिवार में थी क्रांति की आग
वीरांगना विद्यावती राठौर के पूरे परिवार में क्रांति की आग धधकती थी। उनके पति कुंवर बैजनाथ सिंह 1918 में मैनपुरी षड्यंत्र केस में शामिल थे। 1942 की तोड़फोड़ के कार्यों में उनकी प्रभावी भूमिका रही थी। उनके जेठ राम सिंह के पुत्र भूपेंद्र नारायण और उपेंद्र नारायण को भी भारत छोड़ो आंदोलन में जेल भेजा गया था।
वीरांगना के पूरे परिवार में थी क्रांति की आग
वीरांगना विद्यावती राठौर के पूरे परिवार में क्रांति की आग धधकती थी। उनके पति कुंवर बैजनाथ सिंह 1918 में मैनपुरी षड्यंत्र केस में शामिल थे। 1942 की तोड़फोड़ के कार्यों में उनकी प्रभावी भूमिका रही थी। उनके जेठ राम सिंह के पुत्र भूपेंद्र नारायण और उपेंद्र नारायण को भी भारत छोड़ो आंदोलन में जेल भेजा गया था।