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आगरा: एसएस कॉलेज से जब्त दवाइयों के बिल मिले न कोई लिखापढ़ी, चोरी कर छिपाने का अंदेशा
Fri, 22 Jan 2021 08:31 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 22 Jan 2021 08:31 PM IST
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स्कूल में छापा के दौरान दवाओं की जानकारी करती टीम का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा के खासपुरा स्थित एसएस कॉलेज ऑफ एजूकेशन में गुरुवार को पकड़ी गई 10 लाख की दवाओं के औषधि विभाग को न बिल मिले और न ही कोई अन्य कागजात। कॉलेज प्राचार्य और ट्रस्ट के अध्यक्ष ने इनके बारे में कोई जानकारी भी नहीं दी। औषधि विभाग के अधिकारियों को आशंका है कि दवाएं किसी अस्पताल से चोरी कर यहां छिपाई गईं होंगी। हालांकि आगरा में दवा चोरी का कोई मामला हाल फिलहाल में सामने नहीं आया है, इसलिए माना जा रहा है कि इन्हें बाहर से लाया गया है।
औषधि निरीक्षक नरेश मोहन दीपक ने बताया कि जब्त की गई दवाओं का कॉलेज स्टाफ ने कोई बिल और फर्म का लाइसेंस नहीं दिखाया है। यह दवाएं किसी ऐसे अस्पताल से चोरी की आशंका है, जहां डायलिसिस यूनिट भी होगी क्योंकि दवाइयां डायलिसिस में इस्तेमाल की हैं। प्रारंभिक जांच में लग रहा है कि इन दवाओं को चोरी कर कॉलेज के गोदाम में स्टॉक किया जा रहा था, फिर इनको यहां से सप्लाई किया जाता था। इसकी कुछ जानकारी भी मिली है। और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। इन दवाओं को प्रशासन के निर्देश पर मंडी समिति में सुरक्षित रखवाया गया है। तीन दवाओं के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए हैं।
संबंधित खबर- आगरा: कॉलेज को बनाया गोदाम, छापे में मिली दस लाख की अवैध दवाएं
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पदाधिकारी के बेटे की भूमिका की हो रही जांच
कॉलेज में एक पदाधिकारी के बेटे की भूमिका भी इन दवाओं में संदिग्ध मिली है। यह किसी अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में कार्यरत है। यह किस अस्पताल में कार्य कर रहा है, इसकी जांच गोपनीय रूप से की जा रही है। कुछ वाहन भी संदिग्ध मिले हैं, इनके पड़ोसियों से पूछताछ करने पर बताया गया कि सप्ताह में तीन-चार दिन लोडिंग टैंपो आता-जाता था।
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औषधि निरीक्षक नरेश मोहन दीपक ने बताया कि जब्त की गई दवाओं का कॉलेज स्टाफ ने कोई बिल और फर्म का लाइसेंस नहीं दिखाया है। यह दवाएं किसी ऐसे अस्पताल से चोरी की आशंका है, जहां डायलिसिस यूनिट भी होगी क्योंकि दवाइयां डायलिसिस में इस्तेमाल की हैं। प्रारंभिक जांच में लग रहा है कि इन दवाओं को चोरी कर कॉलेज के गोदाम में स्टॉक किया जा रहा था, फिर इनको यहां से सप्लाई किया जाता था। इसकी कुछ जानकारी भी मिली है। और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। इन दवाओं को प्रशासन के निर्देश पर मंडी समिति में सुरक्षित रखवाया गया है। तीन दवाओं के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए हैं।
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पदाधिकारी के बेटे की भूमिका की हो रही जांच
कॉलेज में एक पदाधिकारी के बेटे की भूमिका भी इन दवाओं में संदिग्ध मिली है। यह किसी अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में कार्यरत है। यह किस अस्पताल में कार्य कर रहा है, इसकी जांच गोपनीय रूप से की जा रही है। कुछ वाहन भी संदिग्ध मिले हैं, इनके पड़ोसियों से पूछताछ करने पर बताया गया कि सप्ताह में तीन-चार दिन लोडिंग टैंपो आता-जाता था।
तीन कंपनियों की हैं दवाएं, इनमें एक जापान की
औषधि विभाग की टीम ने जब्त की गई दवाओं की बैच संख्या, एमआरपी, निर्माता कंपनी समेत अन्य जानकारी की रिपोर्ट बनाई है। औषधि निरीक्षक राजकुमार शर्मा ने बताया कि इनमें पांच तरह की दवाएं और इन पर 16 बैच नंबर दर्ज हैं। ये दवाएं डायलिसिस के अलावा आईसीयू और क्रिटिकल मरीजों के इलाज में उपयोग होती हैं।
यह तीन कंपनियों की दवाएं हैं। इसमें दो कंपनी अलीगढ़ और गुजरात की हैं। तीसरी कंपनी जापान की है। अलीगढ़ और गुजरात की कंपनियों को पत्र भेजकर दवाओं की सप्लाई की जानकारी मांगी है। जापान की कंपनी से ई-मेल के जरिये संपर्क करने की कोशिश की जा रही है।
औषधि विभाग की टीम ने जब्त की गई दवाओं की बैच संख्या, एमआरपी, निर्माता कंपनी समेत अन्य जानकारी की रिपोर्ट बनाई है। औषधि निरीक्षक राजकुमार शर्मा ने बताया कि इनमें पांच तरह की दवाएं और इन पर 16 बैच नंबर दर्ज हैं। ये दवाएं डायलिसिस के अलावा आईसीयू और क्रिटिकल मरीजों के इलाज में उपयोग होती हैं।
यह तीन कंपनियों की दवाएं हैं। इसमें दो कंपनी अलीगढ़ और गुजरात की हैं। तीसरी कंपनी जापान की है। अलीगढ़ और गुजरात की कंपनियों को पत्र भेजकर दवाओं की सप्लाई की जानकारी मांगी है। जापान की कंपनी से ई-मेल के जरिये संपर्क करने की कोशिश की जा रही है।