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Holi 2020: युवाओं ने जमकर मचाया होली पर धमाल, रंग-गुलाल से चेहरे हुए लाल
Wed, 11 Mar 2020 10:16 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 11 Mar 2020 10:16 AM IST
सार
ब्रज में होली विशेष पर्व है। इसकी हर रीति रिवाज में ब्रज की संस्कृति झलकती है।
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होली खेलती युवतियां
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
होली मनाने से पहले होलिका दहन का त्योहार मनाया जाता है। सोमवार देर रात होलिका दहन का त्योहार संपन्न हुआ। आगरा में बेमौसम बारिश के चलते सूखी लकड़ियों और उपलों की कमी रही। लेकिन शहर के हर गली मोहल्ले में होलिका तैयार की गई।
होलिका दहन से पहले महिलाओं ने होलिका माता की पूजा अर्चना की। रात को सभी ने सामूहिक रूप से होलिका दहन किया साथ ही घरों में होलिका में अग्नि प्रज्जवलित कर उन पर होरे और जौ भून कर होली के लोक गीत गए।
ब्रज में होली विशेष पर्व है। इसकी हर रीति रिवाज में ब्रज की संस्कृति झलकती है। घरों में होली से पहले होलिका दहन के लिए भी विशेष तैयारियां की गई। सुबह हर गली मोहल्ले के युवाओं और बच्चों ने लकड़ियों और कंड़ों से होलिका सजाई।
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दोपहर से शाम तक महिलाओं ने पारंपरिक होली के गीत गाते हुए होलिका का पूजन किया। इसके बाद सभी ने सामूहिक रूप से बुराई पर सत्य की जीत के प्रतीक में होलिका का दहन किया।
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होलिका दहन से पहले महिलाओं ने होलिका माता की पूजा अर्चना की। रात को सभी ने सामूहिक रूप से होलिका दहन किया साथ ही घरों में होलिका में अग्नि प्रज्जवलित कर उन पर होरे और जौ भून कर होली के लोक गीत गए।
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ब्रज में होली विशेष पर्व है। इसकी हर रीति रिवाज में ब्रज की संस्कृति झलकती है। घरों में होली से पहले होलिका दहन के लिए भी विशेष तैयारियां की गई। सुबह हर गली मोहल्ले के युवाओं और बच्चों ने लकड़ियों और कंड़ों से होलिका सजाई।
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दोपहर से शाम तक महिलाओं ने पारंपरिक होली के गीत गाते हुए होलिका का पूजन किया। इसके बाद सभी ने सामूहिक रूप से बुराई पर सत्य की जीत के प्रतीक में होलिका का दहन किया।
होली के रंगों में सराबोर युवक-युवतियां
- फोटो : अमर उजाला
सूखी लकड़ियों की बिक्री बढ़ी
इस बार बारिश के चलते होलिका दहन के लिए सूखी लकड़ियां आसानी से अब उपलब्ध नहीं थी। इसलिए युवाओं और बच्चों ने सोमवार को सबसे पहले पूरे मोहल्ले में चंदा कर पैसे जुटाए और फिर सभी लकड़ी की टाल पर पहुंचे। वहां से उन्होंने लकड़ी और कंड़े खरीदे। कई लकड़ी की टालों पर भीड़ रही।
मान्यता है कि मोहल्लों में होने वाले सामूहिक होलिका दहन की अग्नि से ही घरों में होलिका को प्रज्जवलित किया जाता है। इसके बाद घर की महिलाएं होली के पारंपरिक गीत गाते हुए जौ और होरे भूनती हैं। इसका संबंध अनाज की पूजा करने से माना जाता है।
होलिका दहन के बाद युवाओं ने रात से ही होली का धमाल शुरू कर दिया। मोहल्लों में डीजे साउंड सिस्टम की व्यवस्था कर उन्होंने पूरी रात धमाल किया। यह सिलसिला अगले दिन तक चलता रहा और युवाओं ने होली का अपने ही अंदाज में लुत्फ उठाया। इस मौके पर ठंडाई का भी प्रबंध किया गया।
इस बार बारिश के चलते होलिका दहन के लिए सूखी लकड़ियां आसानी से अब उपलब्ध नहीं थी। इसलिए युवाओं और बच्चों ने सोमवार को सबसे पहले पूरे मोहल्ले में चंदा कर पैसे जुटाए और फिर सभी लकड़ी की टाल पर पहुंचे। वहां से उन्होंने लकड़ी और कंड़े खरीदे। कई लकड़ी की टालों पर भीड़ रही।
मान्यता है कि मोहल्लों में होने वाले सामूहिक होलिका दहन की अग्नि से ही घरों में होलिका को प्रज्जवलित किया जाता है। इसके बाद घर की महिलाएं होली के पारंपरिक गीत गाते हुए जौ और होरे भूनती हैं। इसका संबंध अनाज की पूजा करने से माना जाता है।
होलिका दहन के बाद युवाओं ने रात से ही होली का धमाल शुरू कर दिया। मोहल्लों में डीजे साउंड सिस्टम की व्यवस्था कर उन्होंने पूरी रात धमाल किया। यह सिलसिला अगले दिन तक चलता रहा और युवाओं ने होली का अपने ही अंदाज में लुत्फ उठाया। इस मौके पर ठंडाई का भी प्रबंध किया गया।