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#हिंदीहैंहमः मयन ऋषि की तपोभूमि पर मातृभाषा का बढ़ा मान, दीन मोहम्मद को मिला यश भारती सम्मान

Mon, 14 Sep 2020 12:52 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Mon, 14 Sep 2020 12:52 PM IST
सार

82 वर्षीय दीन मोहम्मद दीन को हिंदी की सेवा के लिए वर्ष 2016 में प्रदेश सरकार ने यश भारती सम्मान से नवाजा था। वर्ष 1985 से
हिंदी की सेवा करते आ रहे कवि दीन मोहम्मद दीन अब तक एक दर्जन से अधिक रचनाएं लिख चुके हैं।

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Hindi Hain Hum: Deen Mohammad Deen Get Yash Bharati Award For Hindi
हिंदी हैं हम - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

हिंदी का अगर हम सम्मान करेंगे तो हमारे देश का भी मान बढ़ेगा। बिना अपनी संस्कृति, भाषा और सभ्यता को आगे बढ़ाए हम देश को आगे नहीं बढ़ा सकते। ये कहना है कि राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त हिंदी कवि और साहित्यकार दीन मोहम्मद दीन का। 
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82 वर्षीय दीन मोहम्मद दीन को हिंदी की सेवा के लिए वर्ष 2016 में प्रदेश सरकार ने यश भारती सम्मान से नवाजा था। वर्ष 1985 से हिंदी की सेवा करते आ रहे कवि दीन मोहम्मद दीन अब तक एक दर्जन से अधिक रचनाएं लिख चुके हैं। इनमें से हुलसी के तुलसी रचना प्रमुख है।
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अपनी कलम के माध्यम से वे न केवल हिंदी को बढ़ाने का काम कर रहे हैं, बल्कि सामाजिक कुरीतियों के विनाश के लिए पहल कर रहे हैं। हालांकि जब बात युवाओं और हिंदी की आती है तो वे दुखी हो जाते हैं। उनका कहना है कि युवा पीढ़ी अपनी मातृभाषा से उतनी नहीं जुड़ी है, जितनी आवश्यकता है। इसके लिए हम सभी लोगों को काम करना होगा। 
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Hindi Hain Hum: Deen Mohammad Deen Get Yash Bharati Award For Hindi
#हिंदीहैंहमः हिंदी की महत्ता के लिए वक्ताओं ने रखे अपने विचार - फोटो : अमर उजाला
हिंदी की सेवा के लिए अपना जीवन लगाने वाले लोग हमारे लिए प्रेरणा हैं। अगर हम सभी लोग हिंदी के लिए प्रयास करें, तो हमारी भाषा विश्व पटल पर स्थापित होने में देर नहीं लगेगी।  डॉ. अनंत मिश्रा, असिस्टेंट प्रोफेसर, नेशनल डिग्री कॉलेज भोगांव।

भारत आबादी के अनुसार एक बड़ा देश है। वहीं हिंदी इस देश की सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। इस भाषा के विकास के लिए हमें निरंतर प्रयास करना होगा, तभी बदलाव होगा। महेश मिश्रा, शिक्षक। 

बीते कुछ दशकों में हिंदी के प्रचलन में बदलाव आया है। लोग अंग्रेजी भाषा की ओर दौड़ रहे हैं। हमें इस पलायन को रोकना होगा। साथ ही हिंदी के महत्व और उसके सम्मान के प्रति जागरूक करना होगा। सुनील कुमार अग्निहोत्री, शाखा प्रबंधक एलआईसी
 
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