फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Hindi Hai Hum: Amar Ujala Samvad On Hindi People Share Experience

#हिंदीहैंहमः हिंदी ने दिलाया सम्मान, पहुंचाया बुलंदियों तक, देश ही नहीं दुनिया में बढ़ा नाम

Wed, 26 Aug 2020 12:06 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 26 Aug 2020 12:06 AM IST
सार

पूर्व सांसद ओमपाल सिंह निडर कहते हैं कि 1967 में बीए प्रथम वर्ष का छात्र था। उस समय मेरठ विवि में सामान्य अंग्रेजी अनिवार्य विषय थी। उस समय हमने आंदोलन किया और अंग्रेजी विषय अनिवार्य नहीं रहा। मैं पहला शिक्षक था, जो राजनीति शास्त्र को हिंदी विषय में पढ़ाता था।

विज्ञापन
Hindi Hai Hum: Amar Ujala Samvad On Hindi People Share Experience
हिंदी से सफलता पाने वाले व्यंग्यकार अरविंद तिवारी, प्रो. ओमपाल सिंह निडर पूर्व सांसद व छात्रा प्रीति - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आज के लोग हिंदी के बजाय अंग्रेजी भाषा को ज्यादा महत्व देते हैं। वहीं यह बात भी किसी से नहीं छुपी कि हिंदी भाषा ने ही लोगों को समाज में सम्मान दिलाया और बुलंदियों तक पहुंचाया है। हिंदी की बदौलत ही वह अपने जीवन को सफल मानते हैं। हिंदी का देश, दुनिया में नाम बढ़ रहा है। अमर उजाला द्वारा व्हाट्सएप पर हुई वार्ता में हिंदी के कारण सफल हुए लोगों ने अपने विचार रखे। 

विज्ञापन


हिंदी के लिए किया आंदोलन, हिंदी से बनाई पहचान
पूर्व सांसद ओमपाल सिंह निडर कहते हैं कि 1967 में बीए प्रथम वर्ष का छात्र था। उस समय मेरठ विवि में सामान्य अंग्रेजी अनिवार्य विषय थी। उस समय हमने आंदोलन किया और अंग्रेजी विषय अनिवार्य नहीं रहा। मैं पहला शिक्षक था, जो राजनीति शास्त्र को हिंदी विषय में पढ़ाता था। विद्यार्थी भी हिंदी में राजनीति शास्त्र पढ़कर आनंदित होते थे। कक्षा दसवीं से मुझे हिंदी कविता लिखने का शौक हुआ। उस समय मैने कविता लिखी सौगंध राम खातिर, मंदिर यही बनाएंगे, जो पूरे विश्व में प्रसिद्घ हुई। वह कहते हैं कि हिंदी की बदौलत मैने अपने मंच पर सम्मान पाया और मुझे सांसद का टिकट मिला। 
विज्ञापन


हिंदी विषय में प्रीती ने पाए सर्वाधिक अंक, मिला सम्मान
दाऊदयाल महाविद्यालय की छात्रा प्रीती जैन ने हिंदी विषय में सर्वाधिक अंक हासिल किए थे। उनको प्रज्ञा हिंदी सेवार्थ संस्थान ट्रस्ट की ओर से सम्मानित किया गया था। प्रीती कहती हैं कि हिंदी मातृभाषा है और लोग उसमें फेल हो जाते हें। मेरे लिए हिंदी विषय तो सम्मान की भाषा बन गई। हिंदी को विदेशों में भी पसंद किए जाने लगा है। हिंदी संस्थान में विदेशी लोग हिंदी को सीखते हैं। हमें अपनी मातृ भाषा को बढ़ावा देना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

व्यंग्य पर 13  किताबें लिख चुके हैं अरविंद, राज्यपाल से मिला है सम्मान
शिकोहाबाद निवासी अरविंद तिवारी डायट प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। किंतु हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए शुरू से ही जुटे हैं। अरविंद तिवारी ने व्यंग की 13 पुस्तकें लिखीं हैं। एक किताब तो नेशनल बुक ट्रस्ट की ओर से प्रकाशित हुई है।

उन्हें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का श्रीनारायण चतुर्वेदी पुरस्कार व्यंग सम्मान दो लाख रुपये के रूप में मिला था। राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री भी सम्मानित कर चुके हैं। देश के 100 शीर्ष रचनाकारों में अरविंद तिवारी का दो साल से नाम शामिल हो रहा है। वह कहते हैं हिंदी मातृभाषा है। इससे सम्मान इतना मिलता है कि हर रोज हिंदी विषय को समय देता हूं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed