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गीत रामायण सुन श्रोता हुए मंत्रमुग्ध हुए श्रोता, कलाकार किए गए सम्मानित
Tue, 15 Jan 2019 04:59 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 15 Jan 2019 04:59 PM IST
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गीत रामायण गाते महाराष्ट्र के कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर स्थित जेपी सभागार में आयोजित गीत रामायण महोत्सव में गीत-संगीत और सुरीली आवाज का ऐसा संगम हुआ कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। कार्यक्रम के अंतिम दिन बाबूजींची गाणी कार्यक्रम में गीतों की शानदार प्रस्तुति दी।
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महाराष्ट्र से आए कलाकार आनंद माड़गूलकर और श्रीधर फड़के की युगलबंदी ने समा बांध दिया। जैसे ही उन्होंने मराठी गीतों के बाद हिंदी में सेतु बांधों रे सहचरो...सुनाया पूरा पांडाल तालियों से गूंज उठा। आनंद माड़लूकर ने गायन करते हुए बताया कि जब भगवान श्रीराम लंका पर चढ़ाई करने के लिए समुद्र पर पुल बांध रहे थे, तब ये गीत गाया गया।
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इसके बाद हे नौका तुम लौट न जा, हे गंगा मत आह भरो सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए। गायन करते हुए श्रीधर फड़के ने बताया कि जब भगवान राम वनवास को जा रहे थे तो नदी पार करने के लिए निषाद गुहा की नौका में बैठे, तब उन्होंने इसका गायन किया।
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समापन पर मुख्य अतिथि कुलपति डॉ. अरविंद दीक्षित ने महाराष्ट्र की गायन मंडली को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में महाराष्ट्र समाज और मराठी समाज के लोग भी शामिल हुए। आयोजन में महाराष्ट्र समाज आगरा के अध्यक्ष अभय पोताड़े, मराठा समाज आगरा के अध्यक्ष सुभाष बाबा वलेकर, एयर कमोडोर महेश भाष्कर, डॉ. मनोज श्रीवास्तव, डॉ. गिरिजाशंकर शर्मा रहे।