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100 साल की उम्र में भी शराबबंदी आंदोलन चलाने वाले गांधीवादी चिम्मन लाल जैन नहीं रहे
Sun, 23 Feb 2020 01:40 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 23 Feb 2020 01:40 PM IST
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शराबबंदी आंदोलन के दौरान चिम्मनलाल जैन का चेकअप करते डॉक्टर (फाइल)
- फोटो : Amar Ujala
आगरा में दो साल पहले तक 100 साल की उम्र होते हुए भी शराबबंदी के लिए आंदोलन चलाने वाले गांधीवादी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चिम्मन लाल जैन (102) नहीं रहे। उन्होंने शनिवार सुबह बेलनगंज के पथवारी स्थित आवास पर अंतिम सांस ली।
वो दो साल से अस्वस्थ चल रहे थे। मोक्षधाम श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार दोपहर को किया गया। बेटे राजेंद्र प्रसाद जैन ने मुखाग्नि दी।
चिम्मन लाल जैन ने जंग-ए-आजादी में अंग्रेजी अफसरों की नाक में दम कर दिया था। वो नवंबर 1942 में आगरा कॉलेज के प्राचार्य के दफ्तर में बम विस्फोट, जनवरी 1943 में पुरानी कोतवाली सिटी ऑफिस को बम से उड़ाने की घटनाओं में शामिल रहे। उन्हें बम के साथ ही गिरफ्तार किया गया था। दो साल जेल में रहे।
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वो दो साल से अस्वस्थ चल रहे थे। मोक्षधाम श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार दोपहर को किया गया। बेटे राजेंद्र प्रसाद जैन ने मुखाग्नि दी।
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चिम्मन लाल जैन ने जंग-ए-आजादी में अंग्रेजी अफसरों की नाक में दम कर दिया था। वो नवंबर 1942 में आगरा कॉलेज के प्राचार्य के दफ्तर में बम विस्फोट, जनवरी 1943 में पुरानी कोतवाली सिटी ऑफिस को बम से उड़ाने की घटनाओं में शामिल रहे। उन्हें बम के साथ ही गिरफ्तार किया गया था। दो साल जेल में रहे।
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देश को आजादी मिलने के बाद भी वो जन जागरुकता में लगे रहे। देश में इमरजेंसी लगी तो उन्होंने खुलकर विरोध किया। इसके लिए उन्हें 1975 से 1977 तक तीन साल जेल में रखा गया। इसके बाद सामाजिक बुराइयों को खत्म करने का बीड़ा उठा लिया।
वर्ष 2000 से शराबबंदी आंदोलन चलाया। इसके लिए पुलिस ने कई बार उन्हें नजरबंद किया। उन्होंने जलसमाधि लेने की धमकी दी थी, इस पर पुलिस ने उन्हें घर में ही नजरबंद कर लिया था।
भारत माता की प्रतिमा के लिए किया था अनशन
चिम्मन लाल जैन ने दीवानी चौराहा स्थित भारत माता की प्रतिमा को बदलवाने के लिए भी अनशन किया था। प्रतिमा क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। प्रशासन बदलवा नहीं रहा था। इस पर वह धरने पर बैठ गए और तभी हटे जबप्रशासन ने उनकी बात मान ली।
वर्ष 2000 से शराबबंदी आंदोलन चलाया। इसके लिए पुलिस ने कई बार उन्हें नजरबंद किया। उन्होंने जलसमाधि लेने की धमकी दी थी, इस पर पुलिस ने उन्हें घर में ही नजरबंद कर लिया था।
भारत माता की प्रतिमा के लिए किया था अनशन
चिम्मन लाल जैन ने दीवानी चौराहा स्थित भारत माता की प्रतिमा को बदलवाने के लिए भी अनशन किया था। प्रतिमा क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। प्रशासन बदलवा नहीं रहा था। इस पर वह धरने पर बैठ गए और तभी हटे जबप्रशासन ने उनकी बात मान ली।
गजब था जुझारूपन था मेरे भाई में: रानी सरोज गौरिहार
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रानी सरोज गौरिहार ने चिम्मन लाल जैन केसाथ लंबे समय काम किया। उन्होंने बताया, चिम्मन जी मुझे बहन कहते थे। मैं कहती है, आप बड़े हैं, मैं छोटी हूं। इस पर वह कहते, तो क्या हुआ, छोटी बहन ही तो हो आप। उनमें गजब का जुझारूपन था।
न उम्र की परवाह की, न स्वास्थ्य की, कहते थे, सांस है तो संघर्ष जारी रहना चाहिए। जब शराबबंदी आंदोलन चला रहे थे, तो स्वास्थ्य साथ नहीं दे रहा था, लेकिन जुझारूपन के दम पर अनशन किए। उनके साथ युवाओं की पूरी टोली जुड़ गई थी। स्कूलों में बच्चों को शराब न पीने, गुटखा न खाने की शपथ दिलाते थे।
न उम्र की परवाह की, न स्वास्थ्य की, कहते थे, सांस है तो संघर्ष जारी रहना चाहिए। जब शराबबंदी आंदोलन चला रहे थे, तो स्वास्थ्य साथ नहीं दे रहा था, लेकिन जुझारूपन के दम पर अनशन किए। उनके साथ युवाओं की पूरी टोली जुड़ गई थी। स्कूलों में बच्चों को शराब न पीने, गुटखा न खाने की शपथ दिलाते थे।