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आगरा: छह महीने में करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले पिता-पुत्र सहित चार गिरफ्तार

Thu, 22 Apr 2021 12:20 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 22 Apr 2021 12:20 AM IST
सार

गिरफ्तार आरोपी बीमा, शेयर, लोन और नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी करते थे। गैंग में 14 सदस्य शामिल हैं। दो सरगना सहित नौ आरोपी फरार हैं। 

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Four arrested including father and son for cyber fraud in agra
साइबर ठगी के आरोपी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छह महीने में चार करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करने वाले गैंग के चार सदस्यों को आगरा रेंज साइबर थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों में दो भाई और पिता-पुत्र शामिल हैं। गैंग के दो सरगना सहित नौ आरोपी अभी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में लगी है। 

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पुलिस के मुताबिक, गैंग फर्जी कंपनी के नाम से खाते खोलते थे। लोगों को फोन करके बंद बीमा पॉलिसी का लाभ, नौकरी, शेयर और लोन दिलाने का झांसा देकर ठगते थे। कई राज्य के लोग ठगी का शिकार हो चुके हैं। पुलिस ने गैंग का एक खाता फ्रीज भी कराया है। 
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आईजी रेंज नवीन अरोरा के मुताबिक, नगला हवेली, दयालबाग निवासी अनिल कुमार मित्तल ने रेंज साइबर सेल में शिकायत की। उन्होंने बताया कि उनका जनरल इंश्योरेंस का पैसा फंस गया था। रुपये वापसी का तारीका जानने के लिए ऑनलाइन सर्च किया। इस पर उनके पास फोन आया। 

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फोन करने वालों ने कहा कि जो पॉलिसी लेप्स हो गई है, उसका पैसा वापस मिल जाएगा। नुकसान की भरपाई के लिए पैसा शेयर मार्केट में लगा दें। अनिल तैयार हो गए। उनसे 3.11 लाख रुपये खातों में जमा करा लिए। इसके बाद फोन उठाना बंद कर दिया। इस मामले में थाना पर मुकदमा दर्ज किया गया। 

रेंज साइबर सेल के प्रभारी राजेश कुमार शर्मा और एसआई चेतन भारद्वाज सहित टीम को इस छानबीन में लगाया गया। इसके बाद 14 सदस्यों के नाम प्रकाश में आए। गैंग के चार सदस्यों को सोमवार को मथुरा के गोवर्धन रोड स्थित श्रीजी गार्डन हाइट्स से गिरफ्तार कर लिया।  

इनकी हुई गिरफ्तारी 
इस मामले में आरोपी सुनील और उसका भाई सचिन कुमार निवासी वंदना एन्क्लेव, खोड़ा कॉलोनी, गाजियाबाद और मथुरा के श्रीजी गार्डन हाइट्स निवासी शिशिर और उसके पिता विजय प्रकाश अग्रवाल को गिरफ्तार किया गया है।

गैंग का एक सदस्य एमपी में गिरफ्तार 
पुलिस के मुताबिक, गैंग का एक सदस्य सौरभ निवासी कल्यानपुरी, चिल्लासरोदा खादर, दिल्ली को दो दिन पहले मध्य प्रदेश के राजगर स्थित बाइओरा पुलिस स्टेशन पुलिस ने धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार कर लिया था।

दो सरगना सहित नौ आरोपी हैं फरार 
फरार आरोपियों में अंशुल अग्रवाल (निवासी गाजियाबाद के इंद्रापुरम स्थित ऑरेंज काउंटी), कुलदीप ठाकुर (निवासी शिव विहार, खोडा कॉलोनी, शिपरासुन सिटी, गाजियाबाद), विकास तिवारी उर्फ विक्की (निवासी मयूर विहार, फेस-2, दिल्ली), इशू उपाध्याय उर्फ दादा (निवासी नजफगढ़, दिल्ली), प्रविंदर सिंह उर्फ आलोक (निवासी गाजियाबाद), सनातन कश्यप (निवासी खोडा, गाजियाबाद), राजनमान (निवासी लक्ष्मीनगर, दिल्ली), रघु (निवासी दिल्ली) और विजय कश्यप (निवासी बोटेनिकल गार्डन, नोएडा) हैं। अंशुल अग्रवाल और सनातन गैंग के मुख्य सरगना हैं। 

ये हुई बरामदगी
21 मोबाइल, दो लैपटॉप, चार आधार कार्ड, आठ चेकबुक, चार पैन कार्ड, सात डेबिट कार्ड, तीन पासबुक, एक इंटरनेट डोंगल, दो आरसी व डीएल, छह सिम, छह मुहर, एक बाइक, एक कार, 50 हजार रुपये कैश बरामद किया है। रेंज साइबर सेल ने बताया कि एनकेसी सर्विसेस कंपनी के नाम से खेाला गया एक बैंक खाता फ्रीज कराया है। इसमें 4.90 लाख रुपये जमा थे। यह रकम लोगों से ठगी गई थी। इसके अलावा दस्तावेज, लोगों के मोबाइल नंबर का डाटा मिला है।

खातों में चार करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन 
रेंज साइबर सेल ने बताया कि आरोपियों के 14 बैंक खातों की जानकारी मिली है। इनमें से एनकेसी सर्विसेज के नाम से बंधन बैंक में खोला। इसमें छह महीने में दो करोड़ रुपये आए। 

इसी नाम से आईसीआईसीआई बैंक, सौरभ के नाम से आईडीएफसी और इंडुसलेंड बैंक, विजय प्रकाश के नाम से आईडीएफसी बैंक (छह महीने में 52 लाख रुपये प्राप्त किए), विजय प्रकाश के नाम से ही आईसीआईसीआई बैंक (छह महीने में 50 लाख रुपये प्राप्त किए) खोले गए। इसके अलावा सात और खाते आईडीएफसी बैंक और एक खाता एयू बैंक में खोला गया। इन खातों में भी लेन-देन हुआ है। 

200 लोगों से गैंग कर चुका है ठगी 
आईजी नवीन अरोरा के मुताबिक, आरोपियों ने कई नाम से फर्जी कंपनी बनाई थीं। इनमें एचआर रिक्रूटमेंट एंड कंसल्टेंसी, बाइक सर्विसेस, एसक्वीक सेल कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड, आईजीएमएस, मैक्स स्योर आदि नाम हैं। उनके नाम से जीएसटी का पंजीकरण कराते थे। इसके बाद करंट एकाउंट खोलते थे।

ऐसे लोगों का डाटा बाजार से लेते थे, जो कि बीमा पालिसी और शेयर ले चुके होते हैं। इसके अलावा उनके पास नौकरी के लिए आवेदन करने वालों, लोन लेने के इच्छुक लोगों का डाटा होता था। गैंग के सदस्य लोगों को शेयर ब्रोकर, कंसल्टेंसी, बीमा कंपनी अधिकारी बनकर कॉल करते थे। लाभ दिलाने के  नाम पर झांसे में लेते थे। 

खाते में रकम जमा कराकर मोबाइल नंबर बंद कर लेते थे। खाते में आने वाली रकम को चेक और एटीएम से निकालते थे। काल करने के दौरान अपने नाम प्रमोद तिवारी, प्रेमचंद कोठारी, जितेंद्र, मनोज आदि बताते थे। जानकारी मिली है कि गैंग तकरीबन 200 लोगों से छह महीने में चार करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है।

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