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पैदावार घटी, लागत बढ़ी और बढ़ता गया कर्ज
पैदावार घटी, लागत बढ़ी और बढ़ता गया कर्ज
Updated Wed, 05 Apr 2017 01:15 AM IST
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पैदावार घटी, लागत बढ़ी और बढ़ता गया कर्ज
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कर्ज के बोझ तले किसान दबे हैं तो इसके पीछे बड़ी वजह लागत का कई गुना बढ़ जाना है। जुताई-सिंचाई महंगी होने से खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि इसके उलट पैदावार कम हो रही है। 10 साल में फसल की पैदावार में 30 फीसदी तक की गिरावट आई है। देश की सबसे बड़ी आलू बेल्ट में आलू की पैदावार जहां पहले 40-50 पैकेट प्रति बीघे थी, वह अब 30-35 पैकेट तक रह गई है। सरसों दो से तीन कुंतल थी जो अब पौने दो कुंतल तक ही है। गेहूं 4-6 कुंतल प्रति बीघे से घटकर 3-5 कुंतल रह गया। यह हालात भी तब हैं, जब सूखा, ओलावृष्टि न हो। गांव बांसवाला के किसान रोहताश्व कुमार का कहना है कि सूखा, ओला पड़ने पर किसान चौतरफा आर्थिक नुकसान सहता है।
कुल खेती: 2.60 लाख हेक्टेयर
गेहूं: 1.25 लाख हेक्टेयर
आलू: 80 हजार हेक्टेयर
सरसों: 45 हजार हेक्टेयर
ये प्रति बीघा आता खर्च:
आलू: 10-12 हजार रुपये प्रति बीघा
गेहूं: तीन से पांच हजार रुपये प्रति बीघा
सरसों: डेढ़ से दो हजार रुपये प्रति बीघा
इन वजहों से बढ़ रही लागत
नहरों में पानी की कमी, ट्यूबेल पर निर्भरता
देशी खाद की कमी, रासायनिक खाद महंगे
तालाब खत्म होने से जलस्तर कम होना
डीजल महंगा होने से जोत के दाम बढ़े
सीएम साहब, नहरों में पानी छुड़वाइये
कर्जा माफी से किसानों को बड़ी राहत मिली है, लेकिन किसान खेती के लिए सुविधा की मांग ज्यादा कर रहे हैं। एत्मादपुर के गांव मौसनाबाद के प्रधान कृष्णवीर सिंह का कहना है कि सरकार ऐसी व्यवस्था करे कि किसानों को कर्जा लेने की नौबत ही न आए। नहरों में पानी छोड़ा जाए, किसान बही के आधार पर डीजल खरीदने में सब्सिडी मिले और देशी-कंपोस्ट खाद के लिए सुविधाएं दी जाएं।
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कुल खेती: 2.60 लाख हेक्टेयर
गेहूं: 1.25 लाख हेक्टेयर
आलू: 80 हजार हेक्टेयर
सरसों: 45 हजार हेक्टेयर
ये प्रति बीघा आता खर्च:
आलू: 10-12 हजार रुपये प्रति बीघा
गेहूं: तीन से पांच हजार रुपये प्रति बीघा
सरसों: डेढ़ से दो हजार रुपये प्रति बीघा
इन वजहों से बढ़ रही लागत
नहरों में पानी की कमी, ट्यूबेल पर निर्भरता
देशी खाद की कमी, रासायनिक खाद महंगे
तालाब खत्म होने से जलस्तर कम होना
डीजल महंगा होने से जोत के दाम बढ़े
सीएम साहब, नहरों में पानी छुड़वाइये
कर्जा माफी से किसानों को बड़ी राहत मिली है, लेकिन किसान खेती के लिए सुविधा की मांग ज्यादा कर रहे हैं। एत्मादपुर के गांव मौसनाबाद के प्रधान कृष्णवीर सिंह का कहना है कि सरकार ऐसी व्यवस्था करे कि किसानों को कर्जा लेने की नौबत ही न आए। नहरों में पानी छोड़ा जाए, किसान बही के आधार पर डीजल खरीदने में सब्सिडी मिले और देशी-कंपोस्ट खाद के लिए सुविधाएं दी जाएं।
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