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चकबंदी की प्रक्रिया से परेशान हैं किसान
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कासगंज। ग्राम म्यूनी में चल रही चकबंदी की प्रक्रिया से किसान काफी परेशान है। इस प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों पर मनमानी व रिश्वत के आरोप लग रहे हैं। दो दिन पहले किसानों ने डीएम से मिलकर मामले की शिकायत की थी। मृतक किसान भी शिकायतकर्ताओं में शामिल था। किसानों ने गांव को चकबंदी प्रक्रिया से बाहर रखे जाने की मांग की थी।
भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष रमाकांत मिश्रा के नेतृत्व में किसानों ने आरोप लगाया था कि सहायक चकबंदी अधिकारी के द्वारा किसानों के की शिकायतों का निस्तारण नहीं किया जा रहा हैं और उनके द्वारा चकों का आवंटन भी विधि एवं न्याय संगत तरीके से नहीं किया जा रहा । वादों के संबंध में किसानों को चकबंदी कार्यालय के चक्कर लगाने होते हैं। चकबंदी अधिकारी मनमानी करते हैं। उनके रहते न्याय संगत तरीके से चकंबदी नहीं की जाती। जिलाधिकारी हर्षिता माथुर ने किसानों को भरोसा दिया है कि उनका उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। उनकी जो भी समस्या है उसका निस्तारण होगा।
क्या है चकबंदी
किसानों के इधर-उधर बिखरे हुए खेतों को उनके आकार के आधार पर एक स्थान पर करके एक बड़ा चक बना दिया जाता है। इससे किसानों को खेती करने में आसानी के साथ ही उनके चकों की संख्या भी कम हो जाती है। चकबंदी कहलाता है।
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भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष रमाकांत मिश्रा के नेतृत्व में किसानों ने आरोप लगाया था कि सहायक चकबंदी अधिकारी के द्वारा किसानों के की शिकायतों का निस्तारण नहीं किया जा रहा हैं और उनके द्वारा चकों का आवंटन भी विधि एवं न्याय संगत तरीके से नहीं किया जा रहा । वादों के संबंध में किसानों को चकबंदी कार्यालय के चक्कर लगाने होते हैं। चकबंदी अधिकारी मनमानी करते हैं। उनके रहते न्याय संगत तरीके से चकंबदी नहीं की जाती। जिलाधिकारी हर्षिता माथुर ने किसानों को भरोसा दिया है कि उनका उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। उनकी जो भी समस्या है उसका निस्तारण होगा।
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क्या है चकबंदी
किसानों के इधर-उधर बिखरे हुए खेतों को उनके आकार के आधार पर एक स्थान पर करके एक बड़ा चक बना दिया जाता है। इससे किसानों को खेती करने में आसानी के साथ ही उनके चकों की संख्या भी कम हो जाती है। चकबंदी कहलाता है।
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