{"_id":"5b7fd4cb42c792463d4acf1c","slug":"fake-ticket-gang-active-in-up-roadways-buses","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"चार घंटे में करीब पांच लाख की 'काली' कमाई, रोडवेज बसों में ऐसे होता था फर्जीवाड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चार घंटे में करीब पांच लाख की 'काली' कमाई, रोडवेज बसों में ऐसे होता था फर्जीवाड़ा
आशीष शर्मा, अमर उजाला आगरा
Updated Sat, 25 Aug 2018 09:48 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपी रोडवेज बसों में फर्जी टिकट गिरोह रोजाना पांच लाख का चूना विभाग को लगा रहा था। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक इस गिरोह में संविदा कर्मी से लेकर अधिकारियों की संलिप्तता भी सामने आई है। अभी इसकी जांच चल रही है।
फर्जी टिकट गिरोह की बसें आगरा, अलीगढ़, हाथरस, मथुरा, सादाबाद में चलती थीं, इसमें 50 से 60 बसें शामिल थीं। मथुरा और बुद्ध विहार डिपो की बस अधिक रहती थीं। इस गिरोह की बसें सुबह के चार घंटों में सबसे ज्यादा कमाई करती थी।
तड़के चार से सुबह आठ बजे के बीच बसों को अलग-अलग रूटों पर निकाला जाता था। रोजाना 200 से 250 लोग रहते थे। सुबह के समय चेकिंग दल भी सक्रिय नहीं रहता था। इस कारण कमाई ज्यादा हो जाती थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
फर्जी टिकट गिरोह की बसें आगरा, अलीगढ़, हाथरस, मथुरा, सादाबाद में चलती थीं, इसमें 50 से 60 बसें शामिल थीं। मथुरा और बुद्ध विहार डिपो की बस अधिक रहती थीं। इस गिरोह की बसें सुबह के चार घंटों में सबसे ज्यादा कमाई करती थी।
विज्ञापन
तड़के चार से सुबह आठ बजे के बीच बसों को अलग-अलग रूटों पर निकाला जाता था। रोजाना 200 से 250 लोग रहते थे। सुबह के समय चेकिंग दल भी सक्रिय नहीं रहता था। इस कारण कमाई ज्यादा हो जाती थी।
विज्ञापन
इन नहीं दी जाती थी टिकट
सभी बसों में यात्री बिना टिकट यात्रा करते थे। रोजाना और आए दिन यात्रा करने वालों को टिकट नहीं दी जाती थी। नया यात्री आने पर टिकट दे दी जाती थी। कई बार चार यात्री हैं तो दो लोगों को टिकट देते थे। दो बाद में टिकट देने की बात करते थे।
अगर, कोई विरोध करता था तो उसकी पिटाई लगा देते थे। इस तरह से प्रतिदिन रोडवेज को तकरीबन पांच लाख रुपये का चूना लगाया जा रहा था। यह खेल पिछले 10 साल से चल रहा था। इस तरह से विभाग को करोड़ों का चूना लगाया जा चुका है।
पिछले दिनों रोडवेज की ओर से एसटीएफ के आईजी से शिकायत की गई थी। इसके बाद एसटीएफ की आगरा यूनिट और रोडवेज की संयुक्त टीम बनाई गई थी। इसमें एसटीएफ सीओ श्यामकांत शामिल थे। एसटीएफ के मुताबिक, अभी एक मुख्य सरगना अशोक निवासी अलीगढ़ फरार है। वह अधिकारियों से सेटिंग करता था।
कोड वर्ड में होती थी बात
बस में बाउंसरों के साथ ही एक संविदा कर्मी रहता था। आपस में यह लोग कोड वर्ड में कहते थे। ओके का मतलब होता था, सभी टिकट दी जाए। डब्ल्यूटी का मतलब सभी बिना टिकट रहें। इसके लिए ट्रेनिंग भी दी गई। यह देवेंद्र ने दी थी। उसका एक वीडियो भी मिला है। सुबह के समय डब्ल्यूटी करते थे।
अगर, कोई विरोध करता था तो उसकी पिटाई लगा देते थे। इस तरह से प्रतिदिन रोडवेज को तकरीबन पांच लाख रुपये का चूना लगाया जा रहा था। यह खेल पिछले 10 साल से चल रहा था। इस तरह से विभाग को करोड़ों का चूना लगाया जा चुका है।
पिछले दिनों रोडवेज की ओर से एसटीएफ के आईजी से शिकायत की गई थी। इसके बाद एसटीएफ की आगरा यूनिट और रोडवेज की संयुक्त टीम बनाई गई थी। इसमें एसटीएफ सीओ श्यामकांत शामिल थे। एसटीएफ के मुताबिक, अभी एक मुख्य सरगना अशोक निवासी अलीगढ़ फरार है। वह अधिकारियों से सेटिंग करता था।
कोड वर्ड में होती थी बात
बस में बाउंसरों के साथ ही एक संविदा कर्मी रहता था। आपस में यह लोग कोड वर्ड में कहते थे। ओके का मतलब होता था, सभी टिकट दी जाए। डब्ल्यूटी का मतलब सभी बिना टिकट रहें। इसके लिए ट्रेनिंग भी दी गई। यह देवेंद्र ने दी थी। उसका एक वीडियो भी मिला है। सुबह के समय डब्ल्यूटी करते थे।