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UP: फर्जी शस्त्र लाइसेंस प्रकरण...पत्रावलियां न मिलने से अटकी जांच, एसटीएफ के रुक गए कदम
Mon, 30 Jun 2025 10:00 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 30 Jun 2025 10:00 AM IST
सार
फर्जी शस्त्र लाइसेंस प्रकरण में एसटीएफ के बढ़ते कदम रुक गए हैं। एसटीएफ को पत्रावलियां नहीं मिल पा रही हैं।
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फर्जी शस्त्र लाइसेंस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
अवैध शस्त्र और कारतूस कांड की जांच कर रही एसटीएफ को 35 दिन बाद भी पत्रावलियों का इंतजार है। आरोपियों ने शस्त्र की खरीद कहां से की, कितने कारतूस लिए और लाइसेंस बनवाने में किन दस्तावेजों को लगाया। इनसे संबंधित पत्रावलियां असलहा कार्यालय कलेक्ट्रेट से नहीं मिल सकी हैं।
इस मामले की एसटीएफ के निरीक्षक यतेंद्र शर्मा ने 10 महीने जांच की थी। उन्होंने तमाम साक्ष्य जुटाए थे। इसके बाद शासन को रिपोर्ट भेजी गई थी। 24 मई को डीजीपी के निर्देश पर थाना नाई की मंडी में केस दर्ज किया गया। मोहम्मद जैद खान, खिलाड़ी शूटर अरशद खान, प्रापर्टी डीलर भूपेंद्र सारस्वत, शिव कुमार सारस्वत, मीडियाकर्मी शोभित चतुर्वेदी, राजेश कुमार बघेल और रिटायर्ड असलहा बाबू संजय कपूर को आरोपी बनाया गया।
35 दिन से केस की विवेचना चल रही है। एसटीएफ को शस्त्र लाइसेंस और शस्त्रों की खरीद से संबंधित मूल दस्तावेज चाहिए। इसके लिए असलहा कार्यालय में विवेचक ने छानबीन की और पत्रावलियां मांगी थीं। विवेचक हुकुम सिंह ने बताया कि पुख्ता साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
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इस मामले की एसटीएफ के निरीक्षक यतेंद्र शर्मा ने 10 महीने जांच की थी। उन्होंने तमाम साक्ष्य जुटाए थे। इसके बाद शासन को रिपोर्ट भेजी गई थी। 24 मई को डीजीपी के निर्देश पर थाना नाई की मंडी में केस दर्ज किया गया। मोहम्मद जैद खान, खिलाड़ी शूटर अरशद खान, प्रापर्टी डीलर भूपेंद्र सारस्वत, शिव कुमार सारस्वत, मीडियाकर्मी शोभित चतुर्वेदी, राजेश कुमार बघेल और रिटायर्ड असलहा बाबू संजय कपूर को आरोपी बनाया गया।
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35 दिन से केस की विवेचना चल रही है। एसटीएफ को शस्त्र लाइसेंस और शस्त्रों की खरीद से संबंधित मूल दस्तावेज चाहिए। इसके लिए असलहा कार्यालय में विवेचक ने छानबीन की और पत्रावलियां मांगी थीं। विवेचक हुकुम सिंह ने बताया कि पुख्ता साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
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