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#Internationalwidows'day: 'मदर इंडिया' बन उर्मिला ने बच्चों के लिए किया ये सब
ब्यूरो/अमर उजाला एटा
Updated Thu, 22 Jun 2017 10:07 PM IST
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उर्मिला
- फोटो : अमर उजाला
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एटा के गांव वाहनपुर निवासी लाखन सिंह की तीन साल पहले कैंसर से मौत हुई तो उनकी पत्नी उर्मिला के सामने मानों मुश्किलों का पहाड़ खड़ा हो गया। तीन बच्चों की परवरिश और आमदनी का एक मात्र जरिया खेती करने वाला भी कोई नहीं बचा। ऐसे हालातों ने उर्मिला ने मदर इंडिया की तरह ही खुद खेत में हल चलाया और फसल पैदाकर अपने बच्चों का पालन किया।
उर्मिला ने बताया कि शादी के छह साल बाद ही पति की मौत से वह पूरी तरह टूट गई थीं। परिवार और समाज के लोगों ने उनसे दूसरी शादी करने की बात कही, लेकिन अपने तीन छोटे बच्चों के भविष्य की खातिर उन्होंने इससे साफ इंकार कर दिया। मेरे सामने आजीविका चलाने के लिए खेती के अलावा कोई संसाधन नहीं था, इसलिए पति की विरासत को संभाल लिया।
रोज सुबह उठती और खेत पर जाकर हल चलाना, फसल की बुवाई, सिंचाई, कटाई के काम में जुट जाती। इससे जो कुछ भी उपज होती है उससे अपने बच्चों को बेहतर परवरिश देने का प्रयास कर रही हूं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में थोड़ी मुश्किल आई। गांव के लोगों ने भी विरोध किया, लेकिन अपने बच्चों की खुशी के लिए उन्होंने इसका सामना किया और खेती का कार्य जारी रखा।
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आज उनका बड़ा बेटा अभिषेक नौ साल का है और तीसरी क्लास में पढ़ता है। छह साल की बेटी कल्पना और तीन साल का अर्पित भी स्कूल जाते हैं। उन्होंने बताया कि उनके चचिया ससुर होतीलाल और बड़े भाई कौंडरा निवासी जय सिंह और बचान ने उनकी इसमें खूब मदद की। उर्मिला अपने बच्चों को खूब पढ़ा लिखाकर अच्छा आदमी बनाना चाहती हैं। इसके लिए वह खेतों पर जीतोड़ मेहनत करती हैं।
समाजसेविका डा. श्यामलता वेद बताती हैं कि उर्मिला ने समाज के आगे मिसाल कायम की है। सामाजिक बंधनों को तोड़कर आगे बढ़ीं और खेती जैसे व्यवसाय को संभाला, यह बेहद सराहनीय है। महिलाओं को इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। साथ ही महिलाओं को लेकर समाज को भी सोच बदलने की जरूरत है।
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उर्मिला ने बताया कि शादी के छह साल बाद ही पति की मौत से वह पूरी तरह टूट गई थीं। परिवार और समाज के लोगों ने उनसे दूसरी शादी करने की बात कही, लेकिन अपने तीन छोटे बच्चों के भविष्य की खातिर उन्होंने इससे साफ इंकार कर दिया। मेरे सामने आजीविका चलाने के लिए खेती के अलावा कोई संसाधन नहीं था, इसलिए पति की विरासत को संभाल लिया।
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रोज सुबह उठती और खेत पर जाकर हल चलाना, फसल की बुवाई, सिंचाई, कटाई के काम में जुट जाती। इससे जो कुछ भी उपज होती है उससे अपने बच्चों को बेहतर परवरिश देने का प्रयास कर रही हूं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में थोड़ी मुश्किल आई। गांव के लोगों ने भी विरोध किया, लेकिन अपने बच्चों की खुशी के लिए उन्होंने इसका सामना किया और खेती का कार्य जारी रखा।
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आज उनका बड़ा बेटा अभिषेक नौ साल का है और तीसरी क्लास में पढ़ता है। छह साल की बेटी कल्पना और तीन साल का अर्पित भी स्कूल जाते हैं। उन्होंने बताया कि उनके चचिया ससुर होतीलाल और बड़े भाई कौंडरा निवासी जय सिंह और बचान ने उनकी इसमें खूब मदद की। उर्मिला अपने बच्चों को खूब पढ़ा लिखाकर अच्छा आदमी बनाना चाहती हैं। इसके लिए वह खेतों पर जीतोड़ मेहनत करती हैं।
समाजसेविका डा. श्यामलता वेद बताती हैं कि उर्मिला ने समाज के आगे मिसाल कायम की है। सामाजिक बंधनों को तोड़कर आगे बढ़ीं और खेती जैसे व्यवसाय को संभाला, यह बेहद सराहनीय है। महिलाओं को इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। साथ ही महिलाओं को लेकर समाज को भी सोच बदलने की जरूरत है।