एटा किशोर आत्महत्या प्रकरण: मानवाधिकार आयोग के दखल के बाद चारों आरोपी पुलिसकर्मी निलंबित
एटा जिले में कथित तौर पर मादक पदार्थ रखने के आरोप में पुलिस ने 15 साल के किशोर को जेल भेज दिया था। जमानत पर बाहर आने के बाद किशोर ने आत्महत्या कर ली थी। यह मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा था।
विस्तार
एटा के बापूनगर निवासी 15 साल के अभिषेक सिंह के आत्महत्या मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। आरोपी बनाए गए चारों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। अभिषेक सिंह ने 21 सितंबर को घर पर ही तमंचे से गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी।
इस मामले में चार पुलिसकर्मियों पर आत्महत्या के लिए उकसाने की रिपोर्ट उसी दिन अभिषेक के पिता रवेंद्र सिंह की तहरीर पर दर्ज कर ली गई थी, लेकिन कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की गई थी। अफसरों का कहना था कि प्राथमिक जांच के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
संबंधित खबर- एटा: पुलिस की कार्रवाई से आहत 15 साल के किशोर ने दी जान, मानवाधिकार आयोग ने तलब की रिपोर्ट
इसके बाद मृतक के पिता ने मामले की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में की थी। आयोग ने इस पर संज्ञान लेते हुए एसएसपी से रिपोर्ट तलब की। बाद में रवेंद्र सिंह ने विवेचना में गड़बड़ी की आशंका जाहिर करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया। विवेचना की अदालत द्वारा मॉनीटरिंग किए जाने की उनकी मांग मान ली गई।
एसएसपी ने चारों पुलिसकर्मियों को किया निलंबित
सोमवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उदयवीर सिंह ने आरोपित चारों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। उस समय कोतवाली नगर में तैनात उपनिरीक्षक मोहित राना, उपनिरीक्षक शिवकुमार, हेड कांस्टेबल उपेंद्र कुमार और कांस्टेबल रवीश कुमार के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
रवेंद्र का आरोप था कि इन चारों सिपाहियों ने 9 मार्च को पिज्जा लेने जा रहे उनके पुत्र अभिषेक को पकड़ लिया। 12 मार्च को मादक पदार्थ का फर्जी मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया। 25 जुलाई को जेल से छूटने के बाद अभिषेक तनाव में रहने लगा। जिसके चलते उसने आत्महत्या कर ली।
एसएसपी उदय शंकर सिंह ने बताया कि पूर्व में चारों पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया था। विवेचना के क्रम में विभागीय कार्रवाई के तहत उनको निलंबित किया गया है। जिससे विवेचना की निष्पक्षता पर कोई प्रभाव न पड़ सके।