{"_id":"5e3c4fd78ebc3ee5a554a360","slug":"environmentalist-mc-mehta-inspected-agra-sewer-system","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आगरा आए पर्यावरणविद एमसी मेहता, हकीकत देख बोले- यहां तो नरक जैसे हालात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आगरा आए पर्यावरणविद एमसी मेहता, हकीकत देख बोले- यहां तो नरक जैसे हालात
Fri, 07 Feb 2020 12:15 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 07 Feb 2020 12:15 AM IST
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निरीक्षण करते पर्यावरणविद एमसी मेहता साथ में अधिकारीगण
- फोटो : अमर उजाला
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चोक पड़ी सीवर लाइन के कारण आगरा में नरक जैसे हालात हैं। पर्यावरणविद और सुप्रीम कोर्ट में ताज मामलों के याचिकाकर्ता एमसी मेहता ने जब बृहस्पतिवार को आगरा की सीवर व्यवस्था का जायजा लिया तो सबसे पहले कहा कि यहां बदहाल सीवर से नरक जैसे हालात हैं। जनता आवाज उठाए।
उन्होंने कहा कि जब लोग सवाल उठाएंगे और शिकायत करेंगे तो अफसरों को काम करना पडे़गा। मेहता ने हैरत जताई कि ऐसे हालात में लोग यहां आखिर कैसे रहते हैं। बीमार सीवर व्यवस्था के खिलाफ आवाज क्यों नहीं उठाते। मेहता के साथ नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) के वैज्ञानिक डॉ. एसके गोयल भी आगरा आए हैं।
मंटोला नाले के निरीक्षण के बाद चलते चलते हुई अमर उजाला से बातचीत में पर्यावरणविद एमसी मेहता ने कहा कि सामान्य नागरिक को सीवर उफ नते के कारण स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हैं। ऐसे में उन्हें अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए। लोगों को जागरूक होना पड़ेगा।
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उन्होंने कहा कि जब लोग सवाल उठाएंगे और शिकायत करेंगे तो अफसरों को काम करना पडे़गा। मेहता ने हैरत जताई कि ऐसे हालात में लोग यहां आखिर कैसे रहते हैं। बीमार सीवर व्यवस्था के खिलाफ आवाज क्यों नहीं उठाते। मेहता के साथ नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) के वैज्ञानिक डॉ. एसके गोयल भी आगरा आए हैं।
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मंटोला नाले के निरीक्षण के बाद चलते चलते हुई अमर उजाला से बातचीत में पर्यावरणविद एमसी मेहता ने कहा कि सामान्य नागरिक को सीवर उफ नते के कारण स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हैं। ऐसे में उन्हें अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए। लोगों को जागरूक होना पड़ेगा।
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सुप्रीम कोर्ट में पेश करेंगे रिपोर्ट
उन्होंने जो देखा है, उसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सौंपेंगे। बता दें कि दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने आगरा में उफनते सीवर की शिकायतों का स्वत: संज्ञान लिया था और सुप्रीम कोर्ट में ताज मामलों के याचिकाकर्ता एमसी मेहता और नीरी को संयुक्त निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए थे।
जितना सुंदर ताजमहल है, वैसा ही स्वच्छ आगरा होना चाहिए, लेकिन मुझे हैरत है कि यहां लोग ऐसी सीवर व्यवस्था में कैसे रह लेते हैं। लोगों को आवाज उठानी चाहिए, तब अफसर काम करेंगे। ताजनगरी में सीवर सिस्टम फेल है। इसके दुष्प्रभाव आम लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे हैं- एमसी मेहेता, याचिकाकर्ता एवं पर्यावरणविद
ये डाल-डाल, वो पात-पात
नाले की सफाई करते कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एमसी मेहता और नीरी वैज्ञानिक के आगरा दौरे से पहले नगर निगम और जलनिगम ने नालों की सफाई और बंद एसटीपी पर व्यवस्थाएं सुधारने में कर्मचारी लगा दिए। एमसी मेहता और नीरी वैज्ञानिक अधिकारियों के साथ बैठक में रहे, लेकिन मेहता की प्रशिक्षणार्थियों ने शहर भर में घूमकर उफनते सीवर, बंद एसटीपी के फोटो खींच लिए।
सुबह ट्रेन से आगरा आईं मेहता की टीम की सदस्यों ने ताजमहल के पीछे दशहरा घाट ड्रेन, यमुना नदी, किले के पास मंटोला नाला, खैराती टोला, बिजलीघर, ताज पूर्वी गेट, ताजगंज, शहीद नगर, आवास विकास कालोनी समेत शहर के अलग अलग हिस्सों की हकीकत कैमरे में कैद की।
सुबह ट्रेन से आगरा आईं मेहता की टीम की सदस्यों ने ताजमहल के पीछे दशहरा घाट ड्रेन, यमुना नदी, किले के पास मंटोला नाला, खैराती टोला, बिजलीघर, ताज पूर्वी गेट, ताजगंज, शहीद नगर, आवास विकास कालोनी समेत शहर के अलग अलग हिस्सों की हकीकत कैमरे में कैद की।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मांगा यमुना प्रदूषण का ब्योरा
पर्यावरणविद एमसी मेहता साथ में वैज्ञानिक डॉ. एसके गोयल व अन्य
- फोटो : अमर उजाला
भैंरों नाला, मंटोला नाले का निरीक्षण करने के बाद एमसी मेहता ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी भुवन प्रकाश यादव से यमुना प्रदूषण का ब्योरा मांगा। अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम के एक साल के प्रदूषण की जानकारी मांगी।
प्रदूषण बोर्ड ने मेहता को बताया कि जल निगम पर एसटीपी संचालन न करने पर 12 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है, वहीं हाइवे अथारिटी पर वायु प्रदूषण फैलाने पर 6.91 करोड़ रुपये के जुर्माने की सिफारिश की गई है।
जहरीली हवा से सहयोगी की तबियत खराब
कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर शाम को निरीक्षण करने पहुंचे एमसी मेहता की सहयोगी कात्यायनी की तबियत खराब हो गई। यहां कचरे के कारण जहरीली हवा से सांस लेना मुश्किल हो गया। नगर आयुक्त अरुण प्रकाश ने मेहता को वेस्ट टू एनर्जी प्लांट की जानकारी दी तो उन्होंने कई सवाल खड़े कर दिए। चेकोस्लोवाकिया की कंपनी के कामकाज और जगह पर उन्होंने आपत्ति जताई।
प्रदूषण बोर्ड ने मेहता को बताया कि जल निगम पर एसटीपी संचालन न करने पर 12 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है, वहीं हाइवे अथारिटी पर वायु प्रदूषण फैलाने पर 6.91 करोड़ रुपये के जुर्माने की सिफारिश की गई है।
जहरीली हवा से सहयोगी की तबियत खराब
कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर शाम को निरीक्षण करने पहुंचे एमसी मेहता की सहयोगी कात्यायनी की तबियत खराब हो गई। यहां कचरे के कारण जहरीली हवा से सांस लेना मुश्किल हो गया। नगर आयुक्त अरुण प्रकाश ने मेहता को वेस्ट टू एनर्जी प्लांट की जानकारी दी तो उन्होंने कई सवाल खड़े कर दिए। चेकोस्लोवाकिया की कंपनी के कामकाज और जगह पर उन्होंने आपत्ति जताई।