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ढिलाई : बेदखली के आदेश पर भी 15 तालाबों से नहीं हटाया अतिक्रमण
Mon, 26 Oct 2020 01:53 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 26 Oct 2020 01:53 AM IST
सार
क्षेत्रीय लेखपाल टीकम सिंह व राजस्व निरीक्षक संजीव कुमार ने एसडीएम को भेजी रिपोर्ट में बताया कि न्यायालय में लंबित होने के
कारण कोई कार्रवाई नहीं हो सकती।
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डीसी वैदिक कॉलेज के सामने तालाब का सर्वे करने पहुंची प्रशासनिक टीम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा सदर तहसील क्षेत्र में ऐसे 15 मामले सामने आए हैं, जिनमें तालाब से कब्जेदारों को बेदखल कर दिए जाने के अदालत के आदेश के बावजूद राजस्व विभाग की टीम कब्जा लेने के लिए नहीं गई। ऐसे भी मामले हैं, जिनमें एक साल तक कब्जा नहीं लिया गया। इससे कब्जेदारों को उच्च न्यायालय में जाने का मौका मिल गया और मामला फिर से कानूनी पेंच में फंस गया।
ऐसा ही एक मामला गांव मोहम्मद का है। खसरा 235 में 1380 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में तालाब था। इसमें 940 वर्ग मीटर जमीन खाली थी। बाकी भूमि पर अवैध कब्जे व अतिक्रमण हैं। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एम अरुन्मौली ने इस तालाब के कब्जे की जांच कराई तो हैरान करने वाली जानकारी सामने आई।
उन्होंने बताया कि तालाब पर अतिक्रमण करने वाले छीतर सिंह व अन्य लोगों को सन 2017 में राजस्व न्यायालय ने धारा 67 के तहत बेदखल कर दिया गया था, परंतु एक साल तक राजस्वकर्मियों ने कब्जा नहीं लिया। इसके बाद 2018 में कब्जेदार ने बेदखली के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील दाखिल कर दी। पिछले दो साल से मामला लंबित है। इधर, तालाब की जमीन पर कब्जेदार ही काबिज है।
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ऐसा ही एक मामला गांव मोहम्मद का है। खसरा 235 में 1380 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में तालाब था। इसमें 940 वर्ग मीटर जमीन खाली थी। बाकी भूमि पर अवैध कब्जे व अतिक्रमण हैं। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एम अरुन्मौली ने इस तालाब के कब्जे की जांच कराई तो हैरान करने वाली जानकारी सामने आई।
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उन्होंने बताया कि तालाब पर अतिक्रमण करने वाले छीतर सिंह व अन्य लोगों को सन 2017 में राजस्व न्यायालय ने धारा 67 के तहत बेदखल कर दिया गया था, परंतु एक साल तक राजस्वकर्मियों ने कब्जा नहीं लिया। इसके बाद 2018 में कब्जेदार ने बेदखली के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील दाखिल कर दी। पिछले दो साल से मामला लंबित है। इधर, तालाब की जमीन पर कब्जेदार ही काबिज है।
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क्षेत्रीय लेखपाल टीकम सिंह व राजस्व निरीक्षक संजीव कुमार ने एसडीएम को भेजी रिपोर्ट में बताया कि न्यायालय में लंबित होने के कारण कोई कार्रवाई नहीं हो सकती।
इस तरह के सदर तहसील में 15 मामले हैं। जिनमें निचली अदालत से कब्जेदारों की बेदखली होने के बाद राजस्वकर्मियों की लापरवाही से कब्जे नहीं हट सके। उधर, उच्च न्यायालय में तहसील की कमजोर पैरवी व ढिलाई के कारण मामलों का त्वरित निस्तारण नहीं हो रहा।
कब्जा लेने में ढिलाई बरतता है प्रशासन
आगरा के तालाबों को लेकर जनहित याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता सुरेश चंद्र सोनी ने बताया कि तालाबों पर अवैध कब्जे करने वालों को उच्च न्यायालय से कोई राहत नहीं मिलती। परंतु प्रशासन की ढिलाई से उन्हें मोहलत जरूर मिल जाती है। राजस्व न्यायालय के आदेश के तत्काल बाद अगर प्रशासन अपना कब्जा ले ले तो उन्हें ये मोहलत भी नहीं मिलेगी। लेकिन कब्जेदार से राजस्वकर्मियों व अधिकारियों की मिलीभगत के कारण यह नहीं हो पाता है।
इस तरह के सदर तहसील में 15 मामले हैं। जिनमें निचली अदालत से कब्जेदारों की बेदखली होने के बाद राजस्वकर्मियों की लापरवाही से कब्जे नहीं हट सके। उधर, उच्च न्यायालय में तहसील की कमजोर पैरवी व ढिलाई के कारण मामलों का त्वरित निस्तारण नहीं हो रहा।
कब्जा लेने में ढिलाई बरतता है प्रशासन
आगरा के तालाबों को लेकर जनहित याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता सुरेश चंद्र सोनी ने बताया कि तालाबों पर अवैध कब्जे करने वालों को उच्च न्यायालय से कोई राहत नहीं मिलती। परंतु प्रशासन की ढिलाई से उन्हें मोहलत जरूर मिल जाती है। राजस्व न्यायालय के आदेश के तत्काल बाद अगर प्रशासन अपना कब्जा ले ले तो उन्हें ये मोहलत भी नहीं मिलेगी। लेकिन कब्जेदार से राजस्वकर्मियों व अधिकारियों की मिलीभगत के कारण यह नहीं हो पाता है।