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वृंदावन में सूना पड़ा यमुना का किनारा: शाम होते ही मायूस होकर घर लौट जाते हैं नाविक

Fri, 21 May 2021 12:06 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा-वृंदावन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा-वृंदावन Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 21 May 2021 12:06 AM IST
सार

वृंदावन के करीब 200 परिवारों की रोजी-रोटी नौका विहार पर निर्भर है, लेकिन कोरोना कर्फ्यू के कारण तीर्थनगरी में श्रद्धालु नहीं आ रहे हैं। इससे यमुना घाट सूने पड़े हैं। 

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employment of sailors stalled due to Corona curfew in Vrindavan
यमुना किनारे खड़ीं नावें - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्रीबांकेबिहारी के दर्शन के लिए वृंदावन आने वाले भक्तों को यमुना की सैर कराकर अपने परिवार की आजीविका चलाने वाले नाविक इन दिनों मायूस हैं। पूरा दिन उन्हें अब घाट पर खाली बैठे गुजर जाता है। लेकिन कोई भक्त नौका विहार के लिए घाट पर नहीं आता है। अब तो उनके समझ  परिवार के लिए दो जून की रोटी जुटाने का संकट पैदा होने लगा है। 

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कोविड-19 के इस दौर ने उन लोगों को बुरी तरह से तोड़ दिया है, जिनकी आजीविका दैनिक आय पर निर्भर है। इसमें वृंदावन के करीब दो सौ वह परिवार भी शामिल हैं, जो नौका विहार से अपने परिवार का गुजारा करते हैं। इन दिनों ये अधिकांश नाविक वृंदावन में यमुना के घाटों पर खाली बैठे मिलेंगे। सुबह के वक्त ही घर से निकल लेते हैं और फिर शाम को खाली हाथ घर चले जाते हैं। 
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एक माह से बंद हैं नाव 
नाविक नंदकिशोर ने बताया कि बहुत बुरा दौर चल रहा है। कोविड के प्रथम चरण से अभी उभर नहीं पाए कि यह नया दौर शुरू हो गया है। आय का एक मात्र साधन नाव हैं, जो इन दिनों पिछले एक माह से भी ज्यादा वक्त से खड़ी हैं। 

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नाविक द्वारिका ने कहा कि आम दिनों में कान्हा के भक्तों के यहां आने से अच्छी खासी आमदनी हो जाती थी। लेकिन अब तो बुरा हाल हो गया है। इसके अलावा आय का कोई और साधन नहीं है। अब इंतजार कर रहे हैं कि कब बीमारी से निजात मिले।

नाविक लक्ष्मीनारायण कहते हैं कि कुछ भी समझ नहीं आ रहा है कि क्या किया जाए। पिछले करीब डेढ़ साल से इस महामारी से सबकुछ चौपट कर दिया है। रोजी रोजी का संकट है। नाव ही आय का सहारा है। अब कोई यहां नहीं आता है।

सोनू ने कहा कि लॉकडाउन के बाद भी घर से निकल आते हैं कि शायद कोई ग्राहक मिल जाए, लेकिन शाम को फिर मायूस होकर वापस चले जाते हैं। डेढ़ माह से ऐसा ही चल रहा है। परेशानी खड़ी होने लगी हैं।

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