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बैंडबाजा न बराती, महज 17 मिनट में दूल्हा-दुल्हन हो गए जीवनसाथी
ब्यूरो/अमर उजाला बाह (आगरा)
Updated Mon, 02 Oct 2017 02:18 PM IST
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कपल
- फोटो : Demo Pic
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आगरा में बाह के बिजौली गांव में कबीरपंथ के अनुयायियों ने धूम-धड़ाका और तड़क भड़क केबगैर सादगी के साथ विवाह करके समाज में नई मिसाल पेश की। इस विवाह में तो दुल्हन ने मेहंदी रचाई, न दूल्हे ने पगड़ी पहनी।
न दूल्हा बारात लेकर पहुंचा और न ही दुल्हन को विदा करने के लिए गाड़ी सजाई गई। और तो और दुल्हा-दुल्हन ने अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे भी नहीं लिए। इतना ही नहीं। दुल्हन की मांग में सिंदूर भी नहीं भरा गया।
सत्संग में गुरुवाणी के बीच दोनों एक दूसरे के हो गए। इस सादगी से प्रभावित होकर वहां मौजूद 200 लोगों ने अपने बच्चों की दहेज रहित शादी करने का संकल्प ले लिया। बताया गया है कि दूल्हा और दुल्हन के परिवार संत रामपाल के अनुयायी है।
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न दूल्हा बारात लेकर पहुंचा और न ही दुल्हन को विदा करने के लिए गाड़ी सजाई गई। और तो और दुल्हा-दुल्हन ने अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे भी नहीं लिए। इतना ही नहीं। दुल्हन की मांग में सिंदूर भी नहीं भरा गया।
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सत्संग में गुरुवाणी के बीच दोनों एक दूसरे के हो गए। इस सादगी से प्रभावित होकर वहां मौजूद 200 लोगों ने अपने बच्चों की दहेज रहित शादी करने का संकल्प ले लिया। बताया गया है कि दूल्हा और दुल्हन के परिवार संत रामपाल के अनुयायी है।
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आडंबरों को छोड़ने का संदेश
दुल्हा बरात लेकर नहीं पहुंचा था। शादी का एक मकसद आडंबरों को छोड़ने का संदेश देना भी था। सत्संग के दौरान अशोक नगर बाह के राजकुमार की पुत्री नेहा का विवाह जसोल निवासी अजय के पुत्र दिनेश के साथ हुआ। सत्संग में मौजूद लोग ही घराती और बाराती की भूमिका में रहे।
मेहंदी और हल्दी की रस्में भी नहीं हुई। न ही कोई पकवान बनाया गया। महज 17 मिनट में सभी आडंबरों और कुरीतियों से दूर दहेज रहित शादी संपन्न हुई। सत्संग आयोजक रविन्द्र दास, ओमप्रकाश दास, करन दास ने बताया कि शादियों में होने वाली फिजूलखर्ची रोकने के लिए यह पहल की गई है।
मेहंदी और हल्दी की रस्में भी नहीं हुई। न ही कोई पकवान बनाया गया। महज 17 मिनट में सभी आडंबरों और कुरीतियों से दूर दहेज रहित शादी संपन्न हुई। सत्संग आयोजक रविन्द्र दास, ओमप्रकाश दास, करन दास ने बताया कि शादियों में होने वाली फिजूलखर्ची रोकने के लिए यह पहल की गई है।