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बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाः नहीं मिले डॉक्टर, बंद हो गया मैनपुरी जिला महिला अस्पताल
Thu, 17 Sep 2020 01:35 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 17 Sep 2020 01:35 PM IST
सार
जुलाई 2019 तक यहां प्रतिदिन 400 से 500 महिला मरीज उपचार के लिए आते थे। इस अस्पताल के लिए आठ डॉक्टरों के पद सृजित थे, इनमें से मात्र तीन डॉक्टर ही मिल सके। य
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जिला महिला अस्पताल, मैनपुरी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
डॉक्टरों की कमी के चलते जिला महिला अस्पताल बंद हो गया है। यहां तैनात डॉक्टर और स्टाफ को सौ शैया अस्पताल से संबद्ध कर दिया गया है। पर्याप्त स्टाफ न होने से यहां भी मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है।
वर्ष 1962 में महाराजा तेज सिंह जिला महिला अस्पताल की स्थापना कराई गई थी। 2019 तक जिले में महाराजा तेज सिंह महिला जिला अस्पताल संचालित हो रहा था। इस अस्पताल के लिए अब भी आठ पदों के सापेक्ष सीएमएस और दो डॉक्टरों की तैनाती है।
जुलाई 2019 तक यहां प्रतिदिन 400 से 500 महिला मरीज उपचार के लिए आते थे। इस अस्पताल के लिए आठ डॉक्टरों के पद सृजित थे, इनमें से मात्र तीन डॉक्टर ही मिल सके। यहां स्टाफ की व्यवस्था न होने के कारण जिला प्रशासन ने अगस्त 2019 में सौ शैया मातृ एवं शिशु अस्पताल के शुरू होते ही महाराजा तेज सिंह जिला महिला अस्पताल को बंद करा दिया। यहां के स्टाफ को सौ शैया से संबद्ध कर दिया गया। अब दोनों ही अस्पतालों के डॉक्टरों की संख्या मिलकर छह हो गई है। इसमें भी एक चिकित्सक जिला अस्पताल से संबद्ध हैं।
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वर्ष 1962 में महाराजा तेज सिंह जिला महिला अस्पताल की स्थापना कराई गई थी। 2019 तक जिले में महाराजा तेज सिंह महिला जिला अस्पताल संचालित हो रहा था। इस अस्पताल के लिए अब भी आठ पदों के सापेक्ष सीएमएस और दो डॉक्टरों की तैनाती है।
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जुलाई 2019 तक यहां प्रतिदिन 400 से 500 महिला मरीज उपचार के लिए आते थे। इस अस्पताल के लिए आठ डॉक्टरों के पद सृजित थे, इनमें से मात्र तीन डॉक्टर ही मिल सके। यहां स्टाफ की व्यवस्था न होने के कारण जिला प्रशासन ने अगस्त 2019 में सौ शैया मातृ एवं शिशु अस्पताल के शुरू होते ही महाराजा तेज सिंह जिला महिला अस्पताल को बंद करा दिया। यहां के स्टाफ को सौ शैया से संबद्ध कर दिया गया। अब दोनों ही अस्पतालों के डॉक्टरों की संख्या मिलकर छह हो गई है। इसमें भी एक चिकित्सक जिला अस्पताल से संबद्ध हैं।
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कोविड अस्पताल के रूप में किया जा रहा प्रयोग
अगस्त 2019 से बंद पड़े जिला महिला अस्पताल को अब कोविड लेवल टू अस्पताल के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ.आरके सिंह को यहां का नोडल अधिकारी बनाया गया है। जिला अस्पताल के स्टाफ से ही कोविड लेवल टू की देखरेख कराई जा रही है।
जिला महिला अस्पताल में आठ में से मात्र तीन डॉक्टर थे, सौ शैया में भी डॉक्टरों की कमी थी। इसे देखते हुए सौ शैया में स्टाफ को संबद्ध कर दिया गया। दोनों जगह अस्पताल संचालन से एक भी जगह सही व्यवस्था नहीं बन पा रही थी। डॉ.एके पांडेय, सीएमओ
अगस्त 2019 से बंद पड़े जिला महिला अस्पताल को अब कोविड लेवल टू अस्पताल के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ.आरके सिंह को यहां का नोडल अधिकारी बनाया गया है। जिला अस्पताल के स्टाफ से ही कोविड लेवल टू की देखरेख कराई जा रही है।
जिला महिला अस्पताल में आठ में से मात्र तीन डॉक्टर थे, सौ शैया में भी डॉक्टरों की कमी थी। इसे देखते हुए सौ शैया में स्टाफ को संबद्ध कर दिया गया। दोनों जगह अस्पताल संचालन से एक भी जगह सही व्यवस्था नहीं बन पा रही थी। डॉ.एके पांडेय, सीएमओ