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जिला अस्पताल न इलाज मिला, न दवाएं
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Thu, 24 Sep 2015 01:46 AM IST
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अल्ट्रासाउंड कराने आए मरीज लौटाए जा रहे हैं। डेंगू की जांच के लिए सैंपल नहीं लिए जा रहे। दवाइयों की कमी है। उपचार करने के बजाए एक कमरे में बैठे डाक्टर और टेक्नीशियन गप्पें लड़ा रहे हैं। यह हाल है जिला अस्पताल का जो बुधवार दोपहर डीएम पंकज कुमार की आंखों के सामने आया। डीएम को मुआयने के दौरान अस्पताल में एक भी व्यवस्था ठीक नहीं मिली। यह देख उनके चेहरे पर गुस्सा तो बहुत नजर आया। कर्मचारियों से लेकर डाक्टरों तक को फटकार भी खूब लगाई, लेकिन फिलहाल कोई एक्शन नहीं लिया। सुधार के लिए सीएमएस को दो दिन का अल्टीमेटम दिया है।
पूर्वाह्न 11 बजे डीएम जिला अस्पताल पहुंचे, सबसे पहले अल्ट्रासाउंड कक्ष का जायजा लिया। कमरा बंद था, बाहर मरीजों की भीड़ थी। डीएम ने दरवाजा खुलवाया तो यहां डाक्टर और टेक्नीशियन गप्पे लड़ा रहे थे। डीएम को देख हड़बड़ा गए। पूछने पर डाक्टर ने बताया कि 45 मरीजों के बाद अल्ट्रासाउंड नहीं करते, इस पर डीएम ने जीओ मांगा तो डाक्टर बगले झांकने लगा।
डीएम ने फटकारा और अल्ट्रासाउंड तय समय तक करने के निर्देश दिए। यहां से पैथोलॉजी लैब गए, जहां दो मरीज मिले। इनका सैंपल नहीं लिया गया। इस पर प्रभारी को फटकारा। दवा वितरण केंद्र पर मरीजाें से बात की तो पता चला कि पर्चे में लिखी दवाओं में कुछ ही मिलती हैं, बाकी बाहर से लानी पड़ती हैं। यह सुन डीएम ने सीएमएस से दवाआें के स्टाक के बारे में पूछा। उन्होंने कमी बताई तो डीएम ने लोकल पर्चेज करने की सलाह दी।
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डीएम ने दवाओं के स्टाक का रिकार्ड मांगा। सीएमएस डा. पीके गुप्ता ने बताया कि साफ-सफाई से डीएम खुश थे, दवाओं की कमी के लिए उन्होंने सूची मांगी है। उनके द्वारा बताई गई खामियों को दूर किया जाएगा।
डाक्टरों से मांगी दवाओं की डिमांड
डीएम की फटकार के बाद सीएमएस ने सभी विभागों से दवाआें की डिमांड मांगी। इसमें 45 दवाओं की सूची तैयार हुई। सीएमएस का कहना है कि इसमें अधिकांश दवाओं का स्टाक है, बाकी भी खरीदारी कर ली जाएगी।
मरीजों से उगाही करने वाले एजेंट को जड़ा थप्पड़
जिला अस्पताल में एजेंट भी सक्रिय हैं। एक एजेंट अल्ट्रासाउंड कक्ष के अंदर मिला, जो मरीजाें से अल्ट्रासाउंड कराने के नाम पर उगाही कर रहा था। रुपये का भुगतान होने के बाद मरीजाें का अल्ट्रासाउंड कराया जा रहा था। कमरे में जब डीएम ने इस तीसरे शख्स के बारे में पूछा तो वह भागने लगा। इस पर डीएम ने उसे जोरदार तमाचा जड़ दिया। कहा कि भविष्य में मरीजों को ठगा तो खैर नहीं। डाक्टरों को भी फटकारा। हालांकि डीएम का कहना है कि उन्होंने एजेंट को बाहर करवा दिया था, थप्पड़ नहीं मारा।
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पूर्वाह्न 11 बजे डीएम जिला अस्पताल पहुंचे, सबसे पहले अल्ट्रासाउंड कक्ष का जायजा लिया। कमरा बंद था, बाहर मरीजों की भीड़ थी। डीएम ने दरवाजा खुलवाया तो यहां डाक्टर और टेक्नीशियन गप्पे लड़ा रहे थे। डीएम को देख हड़बड़ा गए। पूछने पर डाक्टर ने बताया कि 45 मरीजों के बाद अल्ट्रासाउंड नहीं करते, इस पर डीएम ने जीओ मांगा तो डाक्टर बगले झांकने लगा।
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डीएम ने फटकारा और अल्ट्रासाउंड तय समय तक करने के निर्देश दिए। यहां से पैथोलॉजी लैब गए, जहां दो मरीज मिले। इनका सैंपल नहीं लिया गया। इस पर प्रभारी को फटकारा। दवा वितरण केंद्र पर मरीजाें से बात की तो पता चला कि पर्चे में लिखी दवाओं में कुछ ही मिलती हैं, बाकी बाहर से लानी पड़ती हैं। यह सुन डीएम ने सीएमएस से दवाआें के स्टाक के बारे में पूछा। उन्होंने कमी बताई तो डीएम ने लोकल पर्चेज करने की सलाह दी।
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डीएम ने दवाओं के स्टाक का रिकार्ड मांगा। सीएमएस डा. पीके गुप्ता ने बताया कि साफ-सफाई से डीएम खुश थे, दवाओं की कमी के लिए उन्होंने सूची मांगी है। उनके द्वारा बताई गई खामियों को दूर किया जाएगा।
डाक्टरों से मांगी दवाओं की डिमांड
डीएम की फटकार के बाद सीएमएस ने सभी विभागों से दवाआें की डिमांड मांगी। इसमें 45 दवाओं की सूची तैयार हुई। सीएमएस का कहना है कि इसमें अधिकांश दवाओं का स्टाक है, बाकी भी खरीदारी कर ली जाएगी।
मरीजों से उगाही करने वाले एजेंट को जड़ा थप्पड़
जिला अस्पताल में एजेंट भी सक्रिय हैं। एक एजेंट अल्ट्रासाउंड कक्ष के अंदर मिला, जो मरीजाें से अल्ट्रासाउंड कराने के नाम पर उगाही कर रहा था। रुपये का भुगतान होने के बाद मरीजाें का अल्ट्रासाउंड कराया जा रहा था। कमरे में जब डीएम ने इस तीसरे शख्स के बारे में पूछा तो वह भागने लगा। इस पर डीएम ने उसे जोरदार तमाचा जड़ दिया। कहा कि भविष्य में मरीजों को ठगा तो खैर नहीं। डाक्टरों को भी फटकारा। हालांकि डीएम का कहना है कि उन्होंने एजेंट को बाहर करवा दिया था, थप्पड़ नहीं मारा।