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कम्युनिटी रेडियो पर हुई मानवाधिकार पर चर्चा, वक्ताओं ने कहा- ‘हमें खुद के साथ दूसरों के अधिकारों का ध्यान रखना होगा’
Tue, 15 Dec 2020 09:41 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 15 Dec 2020 09:41 AM IST
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सामाजिक सरोकार कार्यक्रम में मौजूद अतिथिगण
- फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला और डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो 90.4-आगरा की आवाज के साप्ताहिक कार्यक्रम ‘सामाजिक सरोकार’ के तहत ‘मानवाधिकार’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसमें विशेषज्ञों ने कहा कि हमें खुद के साथ दूसरे के अधिकारों का ध्यान रखना चाहिए। एक-दूसरे की भावनाओं को समझकर ऐसा किया जा सकता है।
उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य निर्मला दीक्षित ने कहा कि रिश्तों को सहेजने और संभालने की बहुत जरूरत है। हमें खुद के साथ दूसरों के अधिकारों का भी ध्यान रखना होगा। बच्चों की भावनाओं को समझकर, उन्हें संस्कार देना होगा। बेटी और बहु के साथ समान व्यवहार किया जाए तो घरों में समस्याएं नहीं खड़ी होंगी।
दयालबाग शिक्षण संस्थान की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सोना दीक्षित ने कहा कि कोरोना संक्रमण की वजह से जो लोग आर्थिक या मानसिक रूप से परेशान हैं, डरे हुए हैं, उनकी समाज के सक्षम लोगों को मदद करनी चाहिए। काउंसिलिंग करनी चाहिए। हम अपनी निजता के अधिकार की बात करते हैं, पर दूसरे की निजता का ध्यान नहीं रखते हैं। खासतौर पर मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल करते हुए।
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सेठ पदमचंद जैन संस्थान की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. स्वाति माथुर ने कहा कि बुजुर्ग हमारे घर की नींव और पेड़ की जड़ की तरह हैं। उनकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए। पहले संयुक्त परिवार थे, लोग एक-दूसरे का सम्मान करते थे और भावनाओं को समझते थे। सभी के अधिकार तभी सुरक्षित रहेंगे, जब हम सभी की भावनाओं को समझेंगे। कार्यक्रम का संचालन सामुदायिक रेडियो की प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव पूजा सक्सेना ने किया।
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उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य निर्मला दीक्षित ने कहा कि रिश्तों को सहेजने और संभालने की बहुत जरूरत है। हमें खुद के साथ दूसरों के अधिकारों का भी ध्यान रखना होगा। बच्चों की भावनाओं को समझकर, उन्हें संस्कार देना होगा। बेटी और बहु के साथ समान व्यवहार किया जाए तो घरों में समस्याएं नहीं खड़ी होंगी।
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दयालबाग शिक्षण संस्थान की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सोना दीक्षित ने कहा कि कोरोना संक्रमण की वजह से जो लोग आर्थिक या मानसिक रूप से परेशान हैं, डरे हुए हैं, उनकी समाज के सक्षम लोगों को मदद करनी चाहिए। काउंसिलिंग करनी चाहिए। हम अपनी निजता के अधिकार की बात करते हैं, पर दूसरे की निजता का ध्यान नहीं रखते हैं। खासतौर पर मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल करते हुए।
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सेठ पदमचंद जैन संस्थान की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. स्वाति माथुर ने कहा कि बुजुर्ग हमारे घर की नींव और पेड़ की जड़ की तरह हैं। उनकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए। पहले संयुक्त परिवार थे, लोग एक-दूसरे का सम्मान करते थे और भावनाओं को समझते थे। सभी के अधिकार तभी सुरक्षित रहेंगे, जब हम सभी की भावनाओं को समझेंगे। कार्यक्रम का संचालन सामुदायिक रेडियो की प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव पूजा सक्सेना ने किया।