{"_id":"5d24479b8ebc3e6d18101d98","slug":"devshayani-ekadashi-2019-know-about-significance-puja-vidhi-and-date","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"देवशयनी एकादशी 12 जुलाई को, चार माह तक नहीं होंगे मांगलिक कार्य, ये है मान्यता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देवशयनी एकादशी 12 जुलाई को, चार माह तक नहीं होंगे मांगलिक कार्य, ये है मान्यता
Wed, 10 Jul 2019 12:21 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 10 Jul 2019 12:21 AM IST
विज्ञापन
देवशयनी एकादशी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देवशयनी एकादशी 12 जुलाई को मनाई जाएगी। इस दिन से भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाएंगे। ज्योतिषाचार्य के अनुसार इसके बाद चार महीने तक कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। देवोत्थान एकादशी के बाद से ही मांगलिक कार्य शुरू हो सकेंगे।
मथुरा के ज्योतिषाचार्य श्याम चतुर्वेदी के अनुसार पुराणों में बताया गया है कि देवशयनी एकादशी से लेकर अगले चार महीने के लिए भगवान देवप्रबोधनी तक निद्रा में चले जाते हैं। हिंदू धर्म में देव सो जाने की वजह से कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है।
ज्योतिषाचार्य का कहना है कि वामन पुराण में बताया गया है कि असुरों के राजा बलि ने अपने पराक्रम से तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। राजा बलि के आधिपत्य को देखकर इंद्र देवता घबराकर भगवान विष्णु के पास मदद मांगने पहुंचे।
विज्ञापन
विज्ञापन
मथुरा के ज्योतिषाचार्य श्याम चतुर्वेदी के अनुसार पुराणों में बताया गया है कि देवशयनी एकादशी से लेकर अगले चार महीने के लिए भगवान देवप्रबोधनी तक निद्रा में चले जाते हैं। हिंदू धर्म में देव सो जाने की वजह से कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है।
विज्ञापन
ज्योतिषाचार्य का कहना है कि वामन पुराण में बताया गया है कि असुरों के राजा बलि ने अपने पराक्रम से तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। राजा बलि के आधिपत्य को देखकर इंद्र देवता घबराकर भगवान विष्णु के पास मदद मांगने पहुंचे।
विज्ञापन
दो पग में नापा धरती-आकाश
भगवान विष्णु वामन अवतार लेकर राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुंच गए। भगवान वामन ने बलि से तीन पग भूमि मांगी। पहले और दूसरे पग में भगवान ने धरती और आकाश को नाप लिया। तीसरा पग रखने के लिए कुछ बचा नहीं तो राजा बलि ने कहा कि तीसरा पग उनके सिर पर रख दें।
भगवान विष्णु राजा बलि के दान धर्म से बहुत प्रसन्न थे। उन्होंने राजा बलि से वरदान मांगने को कहा तो बलि उनसे पाताल में उनके साथ बसने का वर मांग लिया। बलि की इच्छापूर्ति के लिए भगवान को उनके साथ पाताल जाना पड़ा।
राजा बलि को दिए वरदान के कारण ही आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी से कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तक पाताल लोक में वास किया। पाताल लोक में उनके रहने की इस अवधि को योगनिद्रा माना जाता है।
भगवान विष्णु राजा बलि के दान धर्म से बहुत प्रसन्न थे। उन्होंने राजा बलि से वरदान मांगने को कहा तो बलि उनसे पाताल में उनके साथ बसने का वर मांग लिया। बलि की इच्छापूर्ति के लिए भगवान को उनके साथ पाताल जाना पड़ा।
राजा बलि को दिए वरदान के कारण ही आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी से कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तक पाताल लोक में वास किया। पाताल लोक में उनके रहने की इस अवधि को योगनिद्रा माना जाता है।