{"_id":"579e57924f1c1b5a7b2b8ef0","slug":"denied-emergency-treatment-in-sn-child-died","type":"story","status":"publish","title_hn":"एसएन इमरजेंसी में इलाज न मिलने से बालक की मौत ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एसएन इमरजेंसी में इलाज न मिलने से बालक की मौत
अमर उजाला आगरा
Updated Mon, 01 Aug 2016 01:24 AM IST
विज्ञापन
मां के साथ्ा बेबी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एसएन मेडिकल कालेज की इमरजेंसी में उपचार न मिलने से रविवार दोपहर 11 बजे एक माह के बालक की मौत हो गई। आरोप है कि डाक्टरों ने वेंटिलेटर खाली न होने का बहाना बनाकर बच्चे को दूसरे अस्पताल में ले जाने के लिए कह दिया। परिजन उसे एंबुलेंस से जयपुर ले जाने की तैयारी में लग गए। इस दौरान भी उसे उपचार नहीं दिया गया। इसी दौरान बालक ने दम तोड़ दिया।
मूलरूप से कस्बा रूपवास जिला भरतपुर, राजस्थान निवासी उदयभान सिंह आगरा के खेरागढ़ में किराये के मकान में रहता है। वह ड्राइवर है। उसने बताया कि चार दिन पहले बेटे श्याम की तबियत खराब हो गई थी। इस पर उसे नामनेर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। डाक्टर ने खून की कमी बताई। हालत बिगड़ने पर उसे एसएन मेडिकल कालेज की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे। उदयभान ने बताया कि उस समय वहां हंगामा चल रहा था। डाक्टर और एक युवक के बीच बहस हो रही थी।
बकौल उदयभान, पहले उसे अंदर जाने से रोका गया। जैसे-तैसे वह पहुंचा तो बच्चा वार्ड के डाक्टरों ने बच्चे को देखते ही कहा कि इसे वेंटिलेटर पर रखे जाने की जरूरत है। यहां वेंटिलेटर खाली नहीं है। इसे कहीं और ले जाओ। वे उसे लेकर बाहर आए और एंबुलेंस बुलाई। जैसे ही लेकर चले, श्याम ने दम तोड़ दिया।
विज्ञापन
न्यू बोर्न सिक केयर यूनिट में पांच बेड हैं। इसमें से एक खराब हो गया है। वेंटिलेटर न होने के कारण नवजात को भर्ती नहीं किया गया होगा।
डा. नीरज यादव, प्रभारी, एनआईसीयू
बालक को भर्ती कर इलाज किया जाना चाहिए था। वेंटिलेटर होने के बावजूद उसे क्यों भर्ती नहीं किया गया, इसकी जांच कराई जाएगी।
डा. सरोज सिंह, प्राचार्य, एसएन मेडिकल कालेज
विज्ञापन
मूलरूप से कस्बा रूपवास जिला भरतपुर, राजस्थान निवासी उदयभान सिंह आगरा के खेरागढ़ में किराये के मकान में रहता है। वह ड्राइवर है। उसने बताया कि चार दिन पहले बेटे श्याम की तबियत खराब हो गई थी। इस पर उसे नामनेर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। डाक्टर ने खून की कमी बताई। हालत बिगड़ने पर उसे एसएन मेडिकल कालेज की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे। उदयभान ने बताया कि उस समय वहां हंगामा चल रहा था। डाक्टर और एक युवक के बीच बहस हो रही थी।
विज्ञापन
बकौल उदयभान, पहले उसे अंदर जाने से रोका गया। जैसे-तैसे वह पहुंचा तो बच्चा वार्ड के डाक्टरों ने बच्चे को देखते ही कहा कि इसे वेंटिलेटर पर रखे जाने की जरूरत है। यहां वेंटिलेटर खाली नहीं है। इसे कहीं और ले जाओ। वे उसे लेकर बाहर आए और एंबुलेंस बुलाई। जैसे ही लेकर चले, श्याम ने दम तोड़ दिया।
विज्ञापन
न्यू बोर्न सिक केयर यूनिट में पांच बेड हैं। इसमें से एक खराब हो गया है। वेंटिलेटर न होने के कारण नवजात को भर्ती नहीं किया गया होगा।
डा. नीरज यादव, प्रभारी, एनआईसीयू
बालक को भर्ती कर इलाज किया जाना चाहिए था। वेंटिलेटर होने के बावजूद उसे क्यों भर्ती नहीं किया गया, इसकी जांच कराई जाएगी।
डा. सरोज सिंह, प्राचार्य, एसएन मेडिकल कालेज