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बारादरी और छतरी के उत्खनन में पेड़ बने बाधा

Sun, 08 May 2016 02:39 AM IST
अमर उजाला आगरा
अमर उजाला आगरा Updated Sun, 08 May 2016 02:39 AM IST
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Delivered ... again saved lives
बारादरी और छतरी के उत्खनन में पेड़ बने बाधा - फोटो : Amar Ujala
ताजमहल कांप्लेक्स का हिस्सा रहे महताब बाग में बारादरी और छतरी के उत्खनन में पेड़ बाधा बन रहे हैं। महताब बाग के पश्चिमी ओर की छतरी का अष्टकोणीय प्लेटफार्म तो निकलने लगा है, लेकिन पीएसी कैंप पर कई पेड़ हैं जिससे उत्खनन का काम रुका है। एएसआई डायरेक्टर जाह्नीज शर्मा ने वर्ल्ड मान्यूमेंट फं ड की टीम के साथ महताब बाग और एत्माद्दौला का दौरा किया। एएसआई अधिकारियों ने उनसे महताब बाग के साइंटिफिक क्लीयरेंस पर सलाह ली।
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2014 से एएसआई ने एनजीओ वर्ल्ड मान्यूमेंट फंड के साथ मुगल बागीचों के संरक्षण पर काम करना शुरू किया। महताब बाग में पूर्व और पश्चिमी ओर मिट्टी में दबी बारादरी और पश्चिमी किनारे पर अष्टकोणीय छतरी को निकालने का काम करना है। एएसआई ने छतरी पर काम शुरू किया, लेकिन बड़े हिस्से में उत्खनन के लिए कई पेड़ हटाने होंगे। यहां पूर्व में पीएसी का कैंप रहा है और घने पेड़ लगे हैं। जाह्नीज शर्मा, सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर जामवाल के साथ आगरा के अधीक्षण पुरातत्वविद डा. भुवन विक्रम और संरक्षण सहायक राज नरायण ने महताब बाग का निरीक्षण किया। वर्ल्ड मान्यूमेंट फं ड यहां ड्राइंग और रिकार्ड में एएसआई की मदद कर रहा है। इस टीम ने इससे पहले एत्माद्दौला की कोठरियों के संरक्षण का काम देखा। एत्माद्दौला के मकबरे में मुगलिया दौर की जल प्रणाली को पुनर्जीवित किया जाना है।
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इंडो यूएस प्रोजेक्ट में सामने आया महताब बाग
1652 में औरंगजेब के एक पत्र में महताब बाग का ब्यौरा सामने आया था, जिसमें बाढ़ से बाग को नुकसान होने की जानकारी शहंशाह शाहजहां को दी गई थी। उसके बाद फ्रेंच यात्री टेवर्नियर ने 17 वीं सदी में काले ताज की अवधारणा को फैलाया। 1871 में ब्रिटिश आर्कियोलोजिस्ट एसीएल कार्लाइल ने महताब बाग पर रिपोर्ट दी। 1996 में एएसआई ने इंडो यूएस प्रोजेक्ट के तहत महताब बाग का उत्खनन कराया, जिसमें 25 फव्वारों वाला टैंक, छोटा टैंक और बारादरी सामने आईं। 289 मीटर की दक्षिणी दीवार वाले महताब बाग में 25 एकड़ में मुगलिया दौर के पौधे लगाए गए हैं।
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