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खबर जो खो गईः मां-बाप का डकैतों ने किया कत्ल, तो बेटी ने भी इस वजह से दी जान...फिर भी न मिला न्याय

Tue, 08 Oct 2024 02:13 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Tue, 08 Oct 2024 02:13 PM IST
सार

मथुरा में वर्ष 2017 में हुए दोहरे हत्याकांड को आज भी लोग नहीं भुला सके हैं। डकैतों ने दंपती की बेरहमी से हत्या कर दी थी। मामले का खुलासा न होने पर बेटी ने विषाक्त का सेवन कर जान दे दी। तीन मौतों के बाद भी इस हत्याकांड के कातिल अभी तक पकड़े नहीं जा सके हैं। 

 

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dacoits had murdered parents nine years ago daughter also committed suicide still justice was not given.
मृतका का फाइल फोटो और उसका भाई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मथुरा के हाईवे थाना क्षेत्र की अमर कालोनी निवासी एक बेटी ने अपने माता-पिता के हत्यारों की गिरफ्तारी के लिए अपनी जान की आहुती तक दे दी, लेकिन पुलिस सात साल बाद भी किसी हत्यारे को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। अब तो मृतक के बेटे और उसकी दूसरी बेटी को न्याय की उम्मीद भी खत्म हो गई है।
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हाईवे थाना क्षेत्र की अमर कालोनी में 8 मार्च 2017 को ट्रक ड्राइवर बनवारी लाल के घर में डकैती की वारदात हुई। डकैतों ने बनवारी लाल और उनकी पत्नी रविवाला की निर्मम हत्या कर दी। डकैती और पति-पत्नी की हत्या के बाद मौके पर पुलिस के अधिकारियों का जमावड़ा लग गया। पुलिस ने मुकदमा तो दर्ज कर लिया, लेकिन आठ माह बाद भी पुलिस किसी हत्यारे को पकड़ नहीं सकी। हत्यारों की गिरफ्तारी के लिए मृतक की बड़ी बेटी राखी लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाती रही, लेकिन उसे कहीं से कोई सहायता नहीं मिली।
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अधिकारियों की कुंभकर्णी निद्रा तोड़ने के लिए उसने 8 अक्तूबर 2017 को विषाक्त खाकर अपनी जान दे दी। इसके बाद पुलिस प्रशासन के अधिकारियों में अफरा-तफरी तो मची, लेकिन समय के साथ फिर अधिकारियों ने पुराना रवैया अपना लिया। राखी को आत्महत्या किए हुए आज सात साल पूरे हो गए, लेकिन अभी तक पुलिस इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं कर पाई है। पुलिस ने  मृतक के पुत्र राहुल और दूसरी बेटी दीपा की सुरक्षा में दो पुरुष और एक महिला कांस्टेबल की तैनाती की, लेकिन दो साल पहले इस सुरक्षा को भी हटा लिया गया। पुलिस ने 2022 में इस मामले में एफआर लगाकर अपना पल्ला झाड़ लिया। सामाजिक कार्यकर्ता मधुमंगल शरण दास शुक्ल ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन यहां भी तारीखों के अलावा कुछ नहीं मिला।

 
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बहन की आहुति नहीं आई काम
राखी के भाई राहुल चौधरी ने बताया कि जब यह वारदात हुई वह नाबालिग था। उसकी बड़ी बहन राखी सुबह से लेकर शाम तक पुलिस अधिकारियों के चक्कर लगाती और रात को घर में आकर रोती। उसने अपनी बहन को पूरी-पूरी रात बिस्तर में रोते हुए देखा है। अधिकारियों के रवैया से दुखी बहन अपनी उम्मीद खो चुकी थी, लेकिन इसका एहसास उसने हमें नहीं होने दिया। माता-पिता को न्याय दिलाने के लिए अपनी जान की आहुति तक दे दी, लेकिन नाकारा सिस्टम के आगे उसकी आहूति भी काम नहीं आई।

 
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एसटीएफ ने 15 दिन में खुलासे का किया था दावा
युवती की आत्महत्या के बाद तत्कालीन एडीजी अजय आनंद ने 15 सदस्यीय एसटीएफ टीम का गठन किया और 15 दिन में वारदात के खुलासे का आश्वासन दिया, लेकिन अभी तक उनका यह दावा पूरा नहीं हो पाया है। अब तो शायद उन्हें भी याद नहीं होगा कि उन्होंने राहुल और दीपा से उसके माता पिता के हत्यारों की गिरफ्तारी का वायदा किया था।


 

डकैतों ने बेरहमी से की थी हत्या
अमर कॉलोनी निवासी बनवारी लाल और उसकी पत्नी रविवाला की डकैतों ने बेरहमी से हत्या की थी। डकैतों ने उनकी आंखें तक निकाल ली और घर में रखे 5 लाख रुपये की नगदी और सोने-चांदी के जेवरात ले गए। राहुल ने बताया कि वारदात के समय उसका मकान बन रहा था। मकान बनवाने के लिए उसके पिता ने अपनी पुश्तैनी जमीन 5 लाख रुपये में बेची थी। बताया कि पहले वात्सल्य ग्राम से राशन का सामान आता था, लेकिन करीब दो साल से वहां से भी राशन का सामान नहीं आ रहा है। ताऊ-चाचा और उनके लड़के परिवार चला रहा है। तत्कालीन जिलाधिकारी ने सरकारी नौकरी का वायदा भी किया, लेकिन वह भी पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है।
 

राहुल और दीपा दोनों हैं बीए के छात्र
राहुल और दीपा दोनों बीए के छात्र हैं। राहुल जसवंत सिंह भदौरिया कॉलेज से बीए की पढ़ाई कर रहा है। जबकि दीपा केआर डिग्री कॉलेज से पढ़ाई कर रही है। राहुल ने बताया कि उसकी बहन दीपा आईपीएस अधिकारी बनना चाहती है। ताकि किसी बेटी को अपने माता पिता को इंसाफ दिलाने की लिए आत्महत्या न करनी पड़े।

जिन पर शक था किसी को पुलिस ने नहीं उठाया
राहुल चौधरी ने बताया कि उसकी बहन ने कई लोगों पर शक जाहिर किया था। इस मामले में विनोद, शिमला, बुआ के लड़के रमन का लाई डिटेक्टर टेस्ट हुआ। टेस्ट का क्या परिणाम रहा आज तक उन्हें नहीं बताया गया है। पिता की पुश्तैनी जमीन लीज पर लेने वाले व्यक्ति पर भी शक जाहिर किया था, लेकिन पुलिस ने पूछताछ तक नहीं की। जब पुलिस से मामले का खुलासा नहीं हो पा रहा था वह सीबीआई जांच के लिए भेज सकती थी, लेकिन ऐसा भी नहीं किया गया।  एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि खुलासे के लिए पुलिस ने पूरा प्रयास किया, एडीजी स्तर से एसटीएफ टीम का गठन हुआ। फिर भी कोई हत्यारा हाथ नहीं लगा। पुलिस प्रत्येक मामले के खुलासे का प्रयास करती है, लेकिन कभी-कभी कुछ मामलों में सफलता नहीं मिलती। यह इसी तरह का मामला है।
 
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