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धक से रह गए सैंकड़ों मां-बाप के दिल

Tue, 12 Apr 2016 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो आगरा
अमर उजाला ब्यूरो आगरा Updated Tue, 12 Apr 2016 01:49 AM IST
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parents fear to hear attack on indian student in ukrane
यूक्रेन में बगैर सुरक्षा के रह रहे भारतीय छात्र - फोटो : अमर उजाला
यूक्रेन में एक ही कमरे में रह रहे दो भारतीय छात्रों की हत्या और तीसरे पर जानलेवा हमले की घटना का पता चलते ही सैंकड़ों मां-बाप केदिल धक से रह गए। इनके जिगर के टुकड़े भी यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे   हैं। इनमें से ज्यादातर मध्यम वर्गीय परिवारों से हैं। ऐसे भी मां-बाप हैं जिन्हें यही नहीं पता कि 4.4 करोड़ आबादी वाले देश में उनके जिगर का टुकड़ा किस हिस्से में रह रहा है? वहां उनकी सुरक्षा के लिए बंदोबस्त भी नहीं किए गए हैं।
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घायल छात्र इंद्रजीत चौहान के पिता नरेंद्र चौहान को यह भी नहीं मालूम कि उनका बेटा यूक्रेन के किस कॉलेज में पढ़ाई कर रहा है? वह जिस कमरे में दोस्तों के साथ किराए पर रह रहा है, वहां हमलावर पहुंच गए, उन्हें किसी ने रोका नहीं। समझा जा सकता है कि सुरक्षा के उपाय नहीं थे।
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दरअसल, मां-बाप अपने बच्चों को यूक्रेन इसलिए भेज देते हैं, क्योंकि एक तो देश के मुकाबले यहां पढ़ाई सस्ती है और दूसरा आसान भी। यहां छह साल में एमबीबीएस और एमडी/एमएस की डिग्री मिल जाती है।
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नरेंद्र चौहान का सपना है बेटे को डाक्टर बनाने का और इसे पूरा करने के लिए उसे यूक्रेन भेज दिया। ऐसे ही सैंकड़ों और भी छात्र हैं जो एजेंटों के माध्यम से डाक्टर बनने के लिए यूक्रेन गए हैं। इनमें फीरोजाबाद, अलीगढ़, हाथरस और आगरा के 100 से अधिक हैं। नरेंद्र चौहान बताते हैं कि उसके कई दोस्त आगरा के आस पास के ही हैं। घटना के बाद उनके परिवार वालों के फोन आ रहे     हैं।
एजेंट लेते हैं पूरा ठेका
यूक्रेन में एडमिशन से लेकर पासपोर्ट और वीजा तक का ठेका एजेंट लेते हैं। ऐसे कई एजेंट आगरा में भी सक्रिय हैं। नरेन्द्र चौहान ने बताया कि इंद्रजीत चौहान को भी एजेंट के माध्यम से भेजा था।
कॉलेज ने नहीं किया संपर्क
इंद्रजीत चौहान जिस कॉलेज से पढ़ाई कर रहा है, उसके अधिकारियों ने कई जानकारी देना तक जरूरी नहीं समझा। नरेंद्र चौहान ने बताया कि उसके दोस्तों के तो फोन आए लेकिन कॉलेज अधिकारियों के नहीं।

चार-पांच लाख का खर्च
नरेंद्र चौहान ने बताया कि एडमिशन में पांच-छह लाख रुपये लगे थे। इसके बाद हर साल चार से पांच लाख का खर्च है। इसमें खाना और रहना भी शामिल है। हमारे यहां के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में इससे कई गुना खर्च आता है।
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